श्रीकृष्ण पर मौलाना जरजिस के बयान पर देवबंद में रोष: मौलाना इसहाक़ गोरा बोले— सबूत दें या पूरे देश से माफ़ी माँगें
श्रीकृष्ण को पाँच वक्त का नमाज़ी बताने वाले मौलाना जरजिस के बयान पर देवबंदी उलेमा इसहाक़ गोरा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रमाण पेश करने या माफ़ी माँगने की बात कही।
मौलाना जरजिस के दावे पर देवबंदी उलेमा ने उठाए सवाल, कहा— बिना ठोस ऐतिहासिक और धार्मिक प्रमाण के समाज में भ्रम फैलाना गलत
उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले एक मुस्लिम धर्मगुरु के विवादित बयान के बाद पूरे देश के धार्मिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है। मौलाना जरजिस ने अपने एक सार्वजनिक भाषण के दौरान यह दावा किया था कि श्रीकृष्ण पाँचों वक्त नमाज़ पढ़ते थे। इंटरनेट मीडिया पर इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद अलग-अलग समुदायों और विचारकों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। इस संवेदनशील मामले पर प्रमुख देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक चरित्र या धार्मिक अक़ीदे से जुड़ी बात को बिना किसी पक्के प्रमाण के जनता के बीच कहना पूरी तरह अनुचित है।
मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने अपनी राय रखते हुए कहा कि जरजिस ने यह बात किस ऐतिहासिक आधार या धार्मिक पुस्तक के प्रमाण पर कही है, इसकी कोई जानकारी किसी के पास नहीं है। उन्होंने माँग की कि अगर जरजिस के पास अपने इस दावे को सच साबित करने के लिए क़ुरआन, हदीस, विश्वसनीय इस्लामी इतिहास या किसी अन्य प्रामाणिक स्रोत का कोई स्पष्ट प्रमाण है, तो वे उसे तुरंत देश की जनता के सामने रखें। यदि उनके पास इस बात का कोई ठोस दस्तावेज़ या सुबूत नहीं है, तो उन्हें तुरंत अपना बयान वापस लेना चाहिए और बिना किसी शर्त के पूरे देश से माफ़ी माँगनी चाहिए।
इस्लामी सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि धर्म हमेशा ज्ञान, गहरी खोज और पुख्ता सबूतों के साथ बात करने की सीख देता है। बिना किसी आधार के मनगढ़ंत बातों को धर्म का हिस्सा बनाकर पेश करना समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुँचाता है। इससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनती है और आपसी भाईचारे में दरार आने का डर रहता है।
उन्होंने देश के सभी धार्मिक प्रचारकों, वक्ताओं और मंचों से बात करने वाले लोगों से बेहद ज़िम्मेदार रहने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक मंच एक बड़ी सामाजिक धरोहर हैं, जहाँ से केवल वही बातें कही जानी चाहिए जिनकी ऐतिहासिक और धार्मिक सच्चाई प्रमाणित हो। एक ज़िम्मेदार व्यक्ति हमेशा तथ्यों को परखने के बाद ही अपनी जुबान खोलता है, इसलिए सार्वजनिक रूप से कोई भी ऐसी बात कहने से बचना चाहिए जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित हो। समाज में आपसी भरोसा बनाए रखने के लिए ईमानदारी और पूर्ण जिम्मेदारी से बात रखना बेहद आवश्यक है।
What's Your Reaction?




