Hardoi : हरदोई की मानसी पाठक को आईआईटी खड़गपुर से मिली पीएचडी, ग्रामीण वायु प्रदूषण पर किया देश का पहला बड़ा शोध

मानसी ने अपने शोध के दौरान 1997 से 2019 तक भारत के विभिन्न क्षेत्रों (इंडो-गंगेटिक मैदान, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत, प्रायद्वीपीय भारत, पहाड़ी क्षेत्र और पूर्वो

Jul 17, 2025 - 00:27
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Hardoi : हरदोई की मानसी पाठक को आईआईटी खड़गपुर से मिली पीएचडी, ग्रामीण वायु प्रदूषण पर किया देश का पहला बड़ा शोध
हरदोई की मानसी पाठक को आईआईटी खड़गपुर से मिली पीएचडी

हरदोई जिले की मानसी पाठक, पुत्री अचल पाठक और रमा पाठक (ग्राम प्रधान, सैतियापुर), ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर से डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि हासिल की। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और हरदोई जिले के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। मानसी का शोध "ग्रामीण भारत में वायुमंडलीय प्रदूषण: स्रोत, कारक, रुझान और निहितार्थ" भारत में ग्रामीण वायु प्रदूषण पर पहला व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन माना जा रहा है।

शोध के बारे में

मानसी का शोध आईआईटी खड़गपुर के कोरल (Centre for Ocean, River, Atmosphere and Land Sciences - CORAL) केंद्र में प्रोफेसर जयनारायणन कुट्टिप्पुरथ के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। उनके शोध का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत में वायु प्रदूषण के स्तर, स्रोतों और स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करना था। इस अध्ययन में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) के स्तर को मापने के लिए सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया गया, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रदूषण की तुलना की गई। शोध में पाया गया कि भारत में कुल NO2 प्रदूषण का 41% ग्रामीण क्षेत्रों से आता है, जिसमें परिवहन (45%) और बिजली संयंत्र (40%) प्रमुख स्रोत हैं।

मानसी ने अपने शोध के दौरान 1997 से 2019 तक भारत के विभिन्न क्षेत्रों (इंडो-गंगेटिक मैदान, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत, प्रायद्वीपीय भारत, पहाड़ी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत) में NO2 के रुझानों का विश्लेषण किया। शोध में यह भी सामने आया कि सर्दियों में NO2 का स्तर सबसे अधिक (2.0 × 10^15 अणु प्रति वर्ग सेंटीमीटर) और मानसून में सबसे कम (1.5 × 10^15 अणु प्रति वर्ग सेंटीमीटर) होता है। यह अध्ययन ग्रामीण भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है, जो देश की 67% आबादी (2020 में 94.7 करोड़) के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।मानसी ने अपने शोध कार्यकाल के दौरान आठ शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित किए, जिनमें Environmental Pollution, Chemosphere, Journal of Hazardous Materials Advances, और Environmental Science: Processes & Impacts शामिल हैं। उनके शोध ने ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य जोखिमों, जैसे अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, निमोनिया और हृदय रोगों, पर प्रकाश डाला।

मानसी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हरदोई के सेंट जेवियर स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की। उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें आईआईटी खड़गपुर में पीएचडी के लिए चयनित किया। मानसी के दादा रमेश चंद्र पाठक हरदोई के एक वरिष्ठ पत्रकार और उद्यमी हैं, जिन्होंने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। उनके परिवार और स्थानीय समुदाय में इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है।

आईआईटी खड़गपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में मानसी को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। उनकी डॉक्टरेट समिति में प्रोफेसर किंसुक नस्कर (अध्यक्ष), प्रोफेसर रेंजी रेमेसन, प्रोफेसर अभिषेक राय, और प्रोफेसर प्रणब देब शामिल थे। इस समारोह में मानसी की उपलब्धि को खूब सराहा गया।

मानसी का शोध भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की अनदेखी समस्या को सामने लाता है। आमतौर पर वायु प्रदूषण को शहरी समस्या माना जाता है, लेकिन उनके अध्ययन ने साबित किया कि ग्रामीण क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। मानसी ने अपने एक बयान में कहा, "हम अक्सर सोचते हैं कि वायु प्रदूषण केवल शहरों में है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में भी हवा की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। भारत की 67% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, और उनके स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना देश के विकास के लिए जरूरी है।"

उनके शोध में यह भी सुझाव दिया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में NO2 प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारत स्टेज (Bharat Stage) जैसे उत्सर्जन मानकों को बिजली संयंत्रों और उद्योगों पर लागू करना चाहिए। यह शोध नीति निर्माताओं और पर्यावरणविदों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो ग्रामीण भारत में स्वच्छ हवा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

मानसी की इस उपलब्धि ने हरदोई जिले में गर्व और उत्साह का माहौल पैदा किया है। सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी मेहनत और लगन की सराहना की, और इसे युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। एक पोस्ट में कहा गया, "गांव की गलियों से निकलकर आईआईटी खड़गपुर की लैब तक का सफर मानसी ने दिखा दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती।" उनकी उपलब्धि ग्रामीण भारत की बेटियों के लिए एक मिसाल है, जो यह दर्शाती है कि मेहनत और प्रतिभा से किसी भी क्षेत्र में इतिहास रचा जा सकता है।

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