Hardoi News: संडीला में आत्मा योजना के कर्मियों को 12 माह से ऑपरेशनल व्यय और 5 माह से मानदेय नहीं, भुखमरी की कगार पर कर्मचारी
ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि मानदेय और ऑपरेशनल व्यय के अभाव में न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, बल्कि विभागी..
रिपोर्ट: अभिषेक त्रिवेदी
By INA News Hardoi.
हरदोई : उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के संडीला ब्लॉक में कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत कार्यरत कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आत्मा योजना के ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर (BTM) और असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर (ATM) को पिछले 12 महीनों से ऑपरेशनल व्यय और 5 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इस वजह से कर्मचारियों को विभागीय कार्यों के साथ-साथ अपने परिवार के भरण-पोषण में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने इसे "भुखमरी की कगार" पर पहुंचने की स्थिति बताया है।
आत्मा योजना के तहत कार्यरत ये कर्मचारी कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन पूरी निष्ठा से करते आए हैं। इसके बावजूद, लंबे समय से वित्तीय सहायता न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। इस मुद्दे को लेकर संडीला ब्लॉक के आत्मा कर्मचारियों ने कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें अतिशीघ्र मानदेय और ऑपरेशनल व्यय के भुगतान की मांग की गई है।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि मानदेय और ऑपरेशनल व्यय के अभाव में न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, बल्कि विभागीय कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में भी बाधा आ रही है। उन्होंने कृषि निदेशक से अनुरोध किया है कि इस समस्या का त्वरित समाधान किया जाए ताकि कर्मचारी बिना वित्तीय दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। आत्मा योजना के तहत कार्यरत BTM और ATM कर्मचारी किसानों तक कृषि विभाग की योजनाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ये कर्मचारी तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने का काम करते हैं। हालांकि, भुगतान में देरी के कारण उनकी कार्यक्षमता और मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई है कि उनका ज्ञापन गंभीरता से लिया जाएगा और शीघ्र ही उनके बकाया भुगतानों को जारी किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है, और कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे और कड़े कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं। इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कर्मचारियों और स्थानीय किसानों की नजर अब उनके अगले कदम पर टिकी है।
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