मैं बाहुबली शहाबुद्दीन हूं, एक हफ्ते में तुझे गोली मार दूंगा, सपा नेता ने सुपरवाइजर को पिस्तौल दिखाकर दी धमकी। 

लखनऊ में सुल्तानपुर जिले के समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता शहाबुद्दीन उर्फ इरफान और उनके भाई शावेज उर्फ खुर्रम के खिलाफ एक गंभीर मामला सामने आया है।

Aug 21, 2025 - 16:19
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मैं बाहुबली शहाबुद्दीन हूं, एक हफ्ते में तुझे गोली मार दूंगा, सपा नेता ने सुपरवाइजर को पिस्तौल दिखाकर दी धमकी। 
मैं बाहुबली शहाबुद्दीन हूं, एक हफ्ते में तुझे गोली मार दूंगा, सपा नेता ने सुपरवाइजर को पिस्तौल दिखाकर दी धमकी। 

लखनऊ में सुल्तानपुर जिले के समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता शहाबुद्दीन उर्फ इरफान और उनके भाई शावेज उर्फ खुर्रम के खिलाफ एक गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना चिनहट इलाके में टोयोटा के सर्विस सेंटर पर हुई, जहां दोनों भाई अपनी फॉर्च्यूनर कार की सर्विस कराने पहुंचे थे। मामूली बात को लेकर वर्कशॉप सुपरवाइजर के साथ उनकी बहस हो गई, जो इतनी बढ़ गई कि शहाबुद्दीन ने सुपरवाइजर पर पिस्तौल तान दी और उसे एक हफ्ते के भीतर गोली मारने की धमकी दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद पुलिस ने दोनों भाइयों और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना 18 अगस्त 2025 को लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र में स्थित टोयोटा सर्विस सेंटर पर हुई। सुल्तानपुर जिले के कादीपुर क्षेत्र के रहने वाले शहाबुद्दीन उर्फ इरफान और उनके भाई शावेज उर्फ खुर्रम अपनी फॉर्च्यूनर कार की सर्विस कराने सर्विस सेंटर पहुंचे थे। बताया जाता है कि कार की सर्विस को लेकर सुपरवाइजर प्रमोद विश्वकर्मा के साथ उनकी कुछ कहासुनी हुई। विवाद का कारण कार की डिलीवरी में देरी और सर्विस की गुणवत्ता को लेकर असंतोष था।

बात इतनी बढ़ गई कि शहाबुद्दीन ने सुपरवाइजर पर पिस्तौल तान दी और उसे जान से मारने की धमकी दी। वायरल वीडियो में शहाबुद्दीन को सुपरवाइजर को धमकाते और पिस्तौल की बट से उसे मारते हुए देखा जा सकता है। सुपरवाइजर प्रमोद विश्वकर्मा को इस हमले में गंभीर चोटें आईं, और वह लहूलुहान हो गया। वीडियो में शहाबुद्दीन को यह कहते सुना गया, "मैं बाहुबली शहाबुद्दीन हूं, एक हफ्ते में तुझे गोली मार दूंगा।" इस घटना के बाद सुपरवाइजर ने चिनहट थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की।

सुपरवाइजर की शिकायत के आधार पर चिनहट पुलिस ने शहाबुद्दीन, उनके भाई शावेज और उनके दो साथियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 323 (मारपीट), 504 (अपमानजनक टिप्पणी), 506 (आपराधिक धमकी), और आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने वायरल वीडियो को सबूत के रूप में लिया और घटनास्थल की जांच की। सीसीटीवी फुटेज और अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने शहाबुद्दीन, शावेज और उनके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया।

लखनऊ के डीसीपी (पूर्वी), शशांक सिंह ने बताया कि इस मामले में सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है, और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने शहाबुद्दीन की पिस्तौल को भी बरामद कर लिया है और उसकी वैधता की जांच की जा रही है। इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या शहाबुद्दीन और उनके भाई का कोई आपराधिक इतिहास है।

इस घटना का वीडियो सर्विस सेंटर के सीसीटीवी कैमरे और वहां मौजूद कुछ लोगों द्वारा रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में शहाबुद्दीन को सुपरवाइजर को धमकाते और मारते हुए साफ देखा जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों ने इसकी कड़ी निंदा की। कई लोगों ने इसे सपा नेताओं की गुंडागर्दी का उदाहरण बताया, जबकि कुछ ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता से जोड़ा। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए गए हैं।

  • समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, कुछ स्थानीय सपा नेताओं ने इस मामले से पार्टी का कोई संबंध न होने की बात कही है। उनका कहना है कि शहाबुद्दीन का यह व्यवहार उनकी व्यक्तिगत हरकत है, और पार्टी इसका समर्थन नहीं करती। सपा के एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर शहाबुद्दीन दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ पार्टी भी कार्रवाई करेगी। लेकिन इस बयान को कई लोग अपर्याप्त मान रहे हैं, क्योंकि शहाबुद्दीन और उनके भाई लंबे समय से सपा से जुड़े रहे हैं।

यह घटना उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक नेताओं की छवि पर गंभीर सवाल उठाती है। समाजवादी पार्टी पहले भी अपने नेताओं के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों का सामना करती रही है। इस घटना ने एक बार फिर सपा की छवि को नुकसान पहुंचाया है, खासकर तब जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। विपक्षी दलों, खासकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), ने इस घटना को लेकर सपा पर निशाना साधा है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यह घटना सपा के "गुंडाराज" की मानसिकता को दर्शाती है।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना की कड़ी आलोचना हो रही है। कई यूजर्स ने लिखा कि इस तरह की हरकतें समाज में डर और अराजकता का माहौल बनाती हैं। कुछ लोगों ने मांग की है कि शहाबुद्दीन जैसे नेताओं को पार्टी से निकाला जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। सुपरवाइजर प्रमोद विश्वकर्मा को इस हमले में गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। प्रमोद ने अपनी शिकायत में कहा कि वह केवल अपनी ड्यूटी कर रहा था, और उसे इस तरह की हिंसा और धमकी का सामना करना पड़ा। उसने पुलिस से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है, क्योंकि उसे डर है कि शहाबुद्दीन और उनके साथी भविष्य में भी उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इस मामले में पुलिस ने जो धाराएं लगाई हैं, वे गंभीर अपराधों से संबंधित हैं। अगर शहाबुद्दीन और उनके साथी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें लंबी सजा हो सकती है। आर्म्स एक्ट के तहत पिस्तौल का अवैध उपयोग भी एक गंभीर अपराध है, और इसकी जांच में यह पता लगाया जाएगा कि शहाबुद्दीन के पास हथियार का लाइसेंस था या नहीं। पुलिस ने यह भी कहा कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह कोई सुनियोजित हमला था या आवेश में हुई घटना।

लखनऊ के चिनहट में हुई यह घटना न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह समाज में शक्ति के दुरुपयोग और राजनीतिक नेताओं की गुंडागर्दी को भी दर्शाती है। शहाबुद्दीन और उनके भाई शावेज की इस हरकत ने समाजवादी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है और उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से यह उम्मीद जताई जा रही है कि पीड़ित को न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा दी जाएगी।

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