Lucknow : अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस- वृद्धावस्था पेंशन अब घर बैठे खाते में, सम्मान समारोह में वरिष्ठों को किया गया पुरस्कृत
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस हर वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1990 में शुरू किया गया यह दिवस वृद्धजनों के सम्मान, उनकी चुनौतियों और
लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग ने हेल्पेज इंडिया और वरिष्ठ नागरिक महासमिति उत्तर प्रदेश के सहयोग से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में हुआ, जहां वृद्धजनों के कल्याण पर चर्चा हुई और उनकी सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित किया गया। इस वर्ष की थीम 'एडवेंटेज60: पावरिंग एस्पिरेशंस – सक्रिय, सक्षम एवं सशक्त' रही। यह थीम बढ़ती उम्र को चुनौती देने वाली पुरानी धारणाओं को तोड़ने का प्रयास करती है। इसका संदेश है कि 60 वर्ष की उम्र के बाद भी जीवन सक्रिय भागीदारी, योगदान और संतुष्टि से भरा हो सकता है। हेल्पेज इंडिया की यह राष्ट्रीय मुहिम वृद्धजनों को संपत्ति के रूप में देखने पर जोर देती है, न कि बोझ के रूप में। कार्यक्रम में वृद्धावस्था पेंशन योजना में बदलाव की घोषणा की गई, जिससे पात्र वृद्धजनों को लाभ स्वतः मिलेगा।
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस हर वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1990 में शुरू किया गया यह दिवस वृद्धजनों के सम्मान, उनकी चुनौतियों और योगदान पर ध्यान केंद्रित करता है। विश्व स्तर पर इसकी थीम 'ओल्डर पर्सन्स ड्राइविंग लोकल एंड ग्लोबल एक्शन: अवर एस्पिरेशंस, अवर वेल-बीइंग एंड अवर राइट्स' रही, जो उनकी आकांक्षाओं, कल्याण और अधिकारों पर आधारित है। भारत में यह दिवस वृद्धजनों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए उपयोग किया जाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में 60 वर्ष से अधिक आयु के 15 करोड़ से ज्यादा वृद्धजन हैं, जिनमें से अधिकांश को स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन की जरूरत है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह संख्या 2.5 करोड़ से अधिक है। ऐसे कार्यक्रम जागरूकता फैलाते हैं और सरकारी योजनाओं को करीब लाते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत हेल्पेज इंडिया के राज्य प्रमुख अनूप पंत द्वारा रूपरेखा प्रस्तुत करने से हुई। उन्होंने थीम के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि वृद्धजन समाज की जड़ें हैं, जिनके अनुभव से नई पीढ़ी सीख सकती है। समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आर.पी. सिंह ने वृद्धजनों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। इनमें वृद्धावस्था पेंशन, वृद्धाश्रम सुविधाएं, स्वास्थ्य बीमा और आपातकालीन सहायता शामिल हैं। सिंह ने कहा कि विभाग डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाओं को आसान बना रहा है, ताकि वृद्धजनों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। कार्यक्रम में कल्याण साथी हेल्पलाइन नंबर 14586 का भी प्रचार किया गया, जो सुबह 9:30 से शाम 6:30 तक उपलब्ध है। इस हेल्पलाइन से वृद्धजन पेंशन, चिकित्सा और कानूनी सहायता ले सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार वृद्धजनों के कल्याण के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन योजना में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की। अब पात्र वृद्धजनों को लाभ स्वतः मिलेगा। इसके लिए आवेदन पत्र भरने या कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। पेंशन सीधे बैंक खाते में पहुंच जाएगी। अरुण ने बताया कि यह सुधार डेटाबेस एकीकरण से संभव हो रहा है, जहां आधार, राशन कार्ड और जनगणना डेटा का उपयोग होगा। योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले वृद्धजनों को प्रतिमाह 1000 रुपये मिलते हैं। 2025-26 के बजट में इस योजना के लिए 8105 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 728 करोड़ अधिक है। अरुण ने कहा कि इससे लाखों वृद्धजन लाभान्वित होंगे, और विभाग का लक्ष्य कवरेज को 100 प्रतिशत करना है। एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल sspy-up.gov.in पर स्थिति जांच आसान होगी।
कार्यक्रम में वृद्ध उपलब्धि सम्मान और श्रवण कुमार सम्मान प्रदान किए गए। ये सम्मान वृद्धजनों के योगदान को मान्यता देने के लिए दिए जाते हैं। श्रवण कुमार सम्मान भक्ति और सेवा की कथा से प्रेरित है, जो वृद्ध माता-पिता की देखभाल पर आधारित है। सम्मानित व्यक्तियों में डॉ. अतुल रस्तोगी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमलेश्वर नाथ, 102 वर्षीय हंसी देवी, डॉ. कमला डी. सिंह, डॉ. सविता मित्तल, एम.सी. शर्मा और निर्मल कुमार शामिल रहे। इनमें से हंसी देवी ने अपनी लंबी उम्र में सामाजिक कार्यों का जिक्र किया, जबकि डॉ. रस्तोगी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान बताया। सम्मान समारोह भावुक क्षणों से भरा था, जहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम में सीएमएस आरडीएसओ शाखा के बच्चों ने दादा-दादी पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। इन गीतों ने वातावरण को गर्मजोशी से भर दिया। बच्चों ने वृद्धजनों की सेवा और सम्मान के लिए शपथ भी ली। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों का हमेशा ख्याल रखेंगे। यह शपथ अंतरपीढ़ी एकजुटता को मजबूत करने का प्रतीक बनी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में वृद्धजनों ने 'सुर-संगम' जैसे कार्यक्रम पेश किए। इनमें लोकगीत, कविताएं और नृत्य शामिल थे, जो उनके अनुभवों को दर्शाते थे। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावुक और उत्साहित किया। विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू ने कहा कि वृद्धजनों के अनुभव समाज की सबसे बड़ी धरोहर हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे बुजुर्गों से सीखें और उनकी सलाह को महत्व दें। लू ने बताया कि विभाग वृद्धाश्रमों को मजबूत कर रहा है और स्वास्थ्य जांच शिविर बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के निदेशक कुमार प्रशांत, उप निदेशक जे. राम, ए.के. सिंह, अमरजीत सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी सिंह और अनामिका सिंह उपस्थित रहीं। इनकी मौजूदगी ने आयोजन को और प्रभावी बनाया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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