हमीरपुर में भीषण अग्निकांड: दो पोल्ट्री फार्म जलकर राख, आग की लपटों में जिंदा जल गए 4 हजार मुर्गे।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जहाँ एक तरफ कुदरत और तकनीकी खराबी

Apr 17, 2026 - 12:22
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हमीरपुर में भीषण अग्निकांड: दो पोल्ट्री फार्म जलकर राख, आग की लपटों में जिंदा जल गए 4 हजार मुर्गे।
हमीरपुर में भीषण अग्निकांड: दो पोल्ट्री फार्म जलकर राख, आग की लपटों में जिंदा जल गए 4 हजार मुर्गे।
  • हादसे में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: पोल्ट्री फार्म में लगी आग तो भुने हुए मुर्गे लूटने के लिए उमड़ पड़ी ग्रामीणों की भीड़
  • शॉर्ट सर्किट ने मचाई तबाही: कुरारा क्षेत्र में लाखों का नुकसान, मालिक के आंसू और लोगों की 'रोस्टेड चिकन' लूट की शर्मनाक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जहाँ एक तरफ कुदरत और तकनीकी खराबी के कहर ने एक गरीब किसान की मेहनत को राख में बदल दिया, वहीं दूसरी तरफ समाज की संवेदनहीनता का एक वीभत्स चेहरा भी देखने को मिला। जिले के कुरारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में स्थित दो विशाल पोल्ट्री फार्मों में अचानक भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और फार्म के भीतर मौजूद लगभग 4 हजार मुर्गों की दर्दनाक मौत हो गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि मुर्गों को बाहर निकालने का मौका तक नहीं मिला। इस हादसे ने पोल्ट्री फार्म के मालिक को आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, जिसकी जीवन भर की जमा पूंजी और व्यवसाय कुछ ही घंटों में धुएं में तब्दील हो गया। हादसे के कारणों की प्रारंभिक जांच में बिजली के शॉर्ट सर्किट को मुख्य वजह माना जा रहा है। चश्मदीदों के अनुसार, दोपहर के समय जब तापमान काफी अधिक था, तभी पोल्ट्री फार्म के ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइनों में जोरदार स्पार्किंग हुई। चिंगारी गिरते ही फार्म की छत पर पड़ी सूखी घास और प्लास्टिक की कतरनों ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। फार्म के मालिक और वहां काम करने वाले मजदूरों ने आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता के आगे उनके प्रयास नाकाफी साबित हुए। चीख-पुकार और धुएं के गुबार के बीच हजारों मुर्गों की तड़प-तड़प कर जान चली गई। दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुँचतीं, तब तक सब कुछ जलकर खाक हो चुका था।

इस त्रासदी के बीच जो सबसे हैरान और परेशान करने वाला नजारा दिखा, वह था स्थानीय ग्रामीणों का व्यवहार। जैसे ही आग पर काबू पाया गया और धुआं कम हुआ, आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए। दुखद बात यह रही कि वे लोग फार्म मालिक की मदद करने या सहानुभूति जताने के बजाय, आग में झुलसे और मर चुके मुर्गों को लूटने में जुट गए। आग की तपन से कई मुर्गे प्राकृतिक रूप से 'रोस्टेड' हो चुके थे, जिन्हें लोग बोरियों और झोलों में भर-भर कर अपने घर ले जाने लगे। मालिक के आंखों के सामने उसकी बर्बादी का तमाशा बन रहा था और लोग मरे हुए मुर्गों को मुफ्त का माल समझकर झपट रहे थे। यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चित हो रहा है, जिसने समाज की नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि आग में झुलसे या दम घुटने से मरे हुए मुर्गों का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है। ऐसे पक्षियों के शरीर में टॉक्सिन्स पैदा हो जाते हैं, जो इंसानों में गंभीर संक्रमण या फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। ग्रामीणों की यह लूट न केवल अनैतिक है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी खतरनाक है।

हादसे की सूचना मिलने के बाद राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। फार्म मालिक ने बताया कि इस आगजनी में उसे करीब 15 से 20 लाख रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। मुर्गों के अलावा, मुर्गियों का दाना, दवाइयां और पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर जलकर बर्बाद हो गया है। मालिक का कहना है कि उसने बैंक से बड़ा कर्ज लेकर इस व्यवसाय को खड़ा किया था और अब उसके पास भविष्य के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है। पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को वहां से खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। प्रशासन अब नुकसान का आकलन कर रहा है ताकि शासन स्तर पर आर्थिक सहायता की रिपोर्ट भेजी जा सके। क्षेत्र के पशुपालन विभाग ने भी इस घटना पर अपनी चिंता व्यक्त की है। विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है कि जो लोग मरे हुए मुर्गों को उठाकर ले गए हैं, वे उनका सेवन कतई न करें। आग लगने के समय उपयोग किए गए रसायनों और दम घुटने वाली गैसों के कारण मुर्गों का मांस जहरीला हो सकता है। साथ ही, विभाग ने अन्य पोल्ट्री फार्म संचालकों को बिजली के फिटिंग की जांच करने और गर्मी के मौसम में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। हमीरपुर की इस घटना ने प्रशासन की मुस्तैदी और आपदा प्रबंधन की तैयारी पर भी सवालिया निशान लगा दिया है, क्योंकि समय पर दमकल की गाड़ियां न पहुँच पाने से नुकसान का दायरा बढ़ गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों द्वारा की गई इस 'लूट' की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि जहाँ एक व्यक्ति अपनी पूरी संपत्ति खो चुका हो, वहां इस तरह का व्यवहार करना अमानवीयता की पराकाष्ठा है।

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