बंगाल में भाजपा की संभावित सरकार: मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल ये 5 दिग्गज चेहरे, किसकी चमकेगी किस्मत?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के साथ ही राज्य में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। निर्वाचन
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के साथ ही राज्य में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा बहुमत के आंकड़े की ओर बढ़ने के संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को जन्म दे दिया है कि यदि भाजपा की सरकार बनती है, तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा। बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्य में नेतृत्व को लेकर भाजपा आलाकमान हमेशा से काफी गोपनीय रहा है, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पांच ऐसे प्रमुख चेहरे हैं जो इस दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे पहला और प्रमुख नाम सुवेंदु अधिकारी का है। वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सुवेंदु ने ममता बनर्जी की सरकार को सदन से लेकर सड़क तक कड़ी टक्कर दी है। 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को पराजित करने के बाद उनका कद पार्टी के भीतर काफी बढ़ गया था। 2026 के चुनावों में भी उन्होंने जंगलमहल और पूर्व मेदिनीपुर जैसे क्षेत्रों में पार्टी की बढ़त सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सांगठनिक क्षमता और प्रशासनिक अनुभव के मामले में सुवेंदु का पलड़ा काफी भारी है। वे बंगाल के जमीनी मुद्दों और स्थानीय राजनीति की गहरी समझ रखते हैं, जो उन्हें इस पद के लिए एक सशक्त दावेदार बनाता है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में दूसरा महत्वपूर्ण नाम सुकांत मजूमदार का है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री के रूप में सुकांत ने पार्टी के कैडर को एकजुट करने और ग्रामीण बंगाल में भाजपा के आधार को विस्तार देने में काफी मेहनत की है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने इस बार के चुनावों में एक सुव्यवस्थित अभियान चलाया। सुकांत मजूमदार की छवि एक शिक्षित, सौम्य और विवादों से दूर रहने वाले नेता की है, जो भाजपा के वैचारिक ढांचे (RSS) के भी काफी करीब माने जाते हैं। यदि पार्टी किसी ऐसे चेहरे को चुनना चाहती है जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके और जिसकी छवि बेदाग हो, तो सुकांत मजूमदार एक आदर्श विकल्प साबित हो सकते हैं।
दिलीप घोष, जो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में पार्टी के कद्दावर नेता हैं, इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं। बंगाल में भाजपा को एक शून्य से निकालकर मुख्य विपक्षी दल बनाने का श्रेय काफी हद तक दिलीप घोष की आक्रामक शैली और कठोर परिश्रम को जाता है। वे कार्यकर्ताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं और अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। भले ही पिछले कुछ समय में उनकी भूमिका संगठन में बदली है, लेकिन उनकी जन अपील आज भी बरकरार है। जंगलमहल और उत्तर बंगाल के आदिवासी क्षेत्रों में उनकी गहरी पकड़ है। पार्टी के पुराने और वफादार कैडर का मानना है कि यदि संघर्ष की बात आए, तो दिलीप घोष से बेहतर कोई नेतृत्व नहीं हो सकता। चौथा नाम जो इस रेस में चर्चा का विषय बना हुआ है, वह है लॉकेट चटर्जी का। भाजपा की महिला विंग की पूर्व अध्यक्ष और प्रमुख महिला चेहरा होने के नाते लॉकेट चटर्जी ने महिला सुरक्षा और संदेशखाली जैसे मुद्दों पर तृणमूल सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाला था। चूंकि पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रही है, इसलिए पार्टी किसी महिला नेतृत्व को आगे कर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। लॉकेट चटर्जी ने हुगली और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी के जनाधार को मजबूत किया है और वे केंद्रीय नेतृत्व की भी काफी भरोसेमंद मानी जाती हैं। उनकी सक्रियता और आक्रामकता उन्हें नेतृत्व के दावेदारों की सूची में ऊपर रखती है।
अंतिम और सबसे चर्चित 'डार्क हॉर्स' (Dark Horse) के रूप में मिथुन चक्रवर्ती का नाम लिया जा रहा है। फिल्म जगत के महानायक और भाजपा के स्टार प्रचारक मिथुन दा ने इस चुनाव में रिकॉर्ड रैलियां की हैं। उनकी लोकप्रियता किसी भी राजनीतिक सीमा से परे है और वे 'महानगर' से लेकर 'मफस्सिल' तक हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। हालांकि उन्होंने खुद कभी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा नहीं जताई है, लेकिन यदि भाजपा बहुमत हासिल करती है और किसी ऐसे चेहरे की तलाश करती है जो राज्य में स्थिरता और गौरव का प्रतीक बन सके, तो मिथुन चक्रवर्ती का नाम चौंकाने वाला हो सकता है। वे भाजपा के 'सोनार बांग्ला' के सपने को सांस्कृतिक रूप से प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े चेहरे हैं। नेतृत्व चयन की इस प्रक्रिया में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अक्सर चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाना जाता है, जैसा कि हमने पूर्व में राजस्थान और मध्य प्रदेश के चुनावों के बाद देखा है। संभव है कि इन पांच नामों के अलावा कोई नया चेहरा जैसे डॉ. अनिर्बान गांगुली या जगन्नाथ सरकार भी सामने आ जाए। मुख्यमंत्री के चयन में इस बार 'कानून-व्यवस्था' और 'भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल' के वादों को अमली जामा पहनाने की क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, जातीय समीकरण और उत्तर-दक्षिण बंगाल के बीच संतुलन बनाना भी एक बड़ी चुनौती होगी। दिल्ली में बैठे पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार फिलहाल मतगणना के अंतिम नतीजों का इंतजार कर रहे हैं ताकि सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले नेतृत्व पर अंतिम मुहर लगाई जा सके।
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