Rampur News: रामपुर में आज भी आजम खान के कब्जे में है PWD की 3.5 किमी लंबी सड़क, DM ने दिए जांच के आदेश
Rampur Road Encroachment Case: रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के भीतर PWD की 3.5 किमी लंबी सड़क के होने के मामले में डीएम ने सख्त जांच के आदेश दिए हैं।
- Rampur Road Controversy: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर पीडब्ल्यूडी की सड़क? रामपुर डीएम का बड़ा एक्शन
- रामपुर में फिर गरमाया आजम खान का मुद्दा: यूनिवर्सिटी परिसर में 'कैद' मिली PWD की 3.5 KM सड़क, जिलाधिकारी ने बुलाई जांच टीम
- रामपुर से बड़ी खबर: जौहर यूनिवर्सिटी में PWD की 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क शामिल होने का दावा, DM ने बैठाई जांच
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान से जुड़ा एक नया प्रशासनिक विवाद सामने आया है। रामपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) की करीब 3.5 किलोमीटर लंबी एक सार्वजनिक सड़क आज भी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के परिसर के भीतर होने का दावा किया गया है। बुधवार को इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए रामपुर के जिलाधिकारी (DM) ने लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम को विस्तृत पैमाइश और जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है और आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी के इस विवादित हिस्से पर पैमाइश कर रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
यह पूरा मामला रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ है, जिसे पूर्व मंत्री आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। ताजा प्रशासनिक रिपोर्ट्स और शिकायतों के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निर्माण के दौरान लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के स्वामित्व वाली एक सार्वजनिक सड़क, जिसकी लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर बताई जा रही है, उसे कथित तौर पर परिसर की चहारदीवारी के अंदर शामिल कर लिया गया था। यह सड़क आम जनता के आवागमन के लिए थी, लेकिन वर्तमान में यह यूनिवर्सिटी की 'कैद' में है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने इसकी आधिकारिक जांच शुरू करवा दी है ताकि स्थिति को स्पष्ट किया जा सके।
रामपुर जिला प्रशासन को हाल ही में कुछ स्थानीय स्रोतों और विभागीय दस्तावेजों के माध्यम से यह जानकारी मिली कि सिंगनखेड़ा या उसके आसपास के गांवों को जोड़ने वाली पीडब्ल्यूडी की एक पुरानी सड़क सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, लेकिन धरातल पर वह जौहर यूनिवर्सिटी के मुख्य परिसर के अंदर जा चुकी है। इसके चलते आम ग्रामीणों को कई किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ता है।
दस्तावेजों की शुरुआती समीक्षा के बाद, बुधवार को रामपुर के जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) और संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी (SDM) को एक पत्र जारी किया। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व अभिलेखों (नक्शा और खसरा-खतौनी) का मिलान कर उक्त 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क की वर्तमान स्थिति का पता लगाया जाए। इसके लिए मौके पर जाकर जीपीएस (GPS) और पारंपरिक पैमाइश तकनीकों के जरिए सीमांकन किया जाएगा। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्या वाकई किसी सरकारी संपत्ति को निजी या ट्रस्ट की भूमि में अवैध रूप से मिलाया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में संतुलित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। रामपुर जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह जांच किसी राजनीतिक द्वेष के तहत नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों के संरक्षण के तय नियमों के मुताबिक की जा रही है। अगर पीडब्ल्यूडी की सड़क यूनिवर्सिटी के अंदर पाई जाती है, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई होगी।"
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी और आजम खान के समर्थकों का कहना है कि जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर पहले ही कई तरह की जांच चल रही हैं और इस नए मामले को भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। उनके कानूनी सलाहकारों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय सभी नियमों और भूमि विनिमय (Land Exchange) की प्रक्रियाओं का पालन किया गया था, और जांच टीम के सामने सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए जाएंगे।
इस जांच के आदेश के बाद रामपुर की स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:
प्रशासनिक स्तर पर: पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के अधिकारी अब पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं ताकि यह जाना जा सके कि यह सड़क किस वर्ष बनी थी और इसे बंद करने या परिसर में शामिल करने की कोई अनुमति ली गई थी या नहीं।
स्थानीय जनता पर: यदि यह सड़क सार्वजनिक घोषित होती है और इसे आम जनता के लिए दोबारा खोला जाता है, तो आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों का आवागमन सुगम हो जाएगा।
राजनीतिक सरगर्मी: आजम खान वर्तमान में जेल में हैं और उनकी अनुपस्थिति में उनके इस प्रोजेक्ट पर प्रशासनिक शिकंजा कसने से जिले का राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है।
जिलाधिकारी के आदेश के मुताबिक, संयुक्त जांच दल को आगामी कुछ दिनों के भीतर मौके का निरीक्षण कर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी होगी। यदि पैमाइश में यह साबित होता है कि 3.5 किलोमीटर लंबी सरकारी सड़क पर अवैध रूप से कब्जा कर उसे परिसर में मिलाया गया है, तो प्रशासन यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर सकता है। इसके बाद सार्वजनिक मार्ग को वापस लेने या अतिक्रमण हटाने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पुलिस प्रशासन को भी पैमाइश के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अलर्ट पर रहने को कहा गया है।
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