महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे का बयान- मुस्लिम समुदाय को ‘हरे सांप’ कहा, गोल टोपी और दाढ़ी वालों ने मुझे वोट नहीं दिया। मैं हिंदुओं के वोट से विधायक बना हूं। 

Maharashtra News: महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे 11 जुलाई 2025 को मुंबई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए अपने बयान के कारण विवादों....

Jul 12, 2025 - 13:05
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महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे का बयान- मुस्लिम समुदाय को ‘हरे सांप’ कहा, गोल टोपी और दाढ़ी वालों ने मुझे वोट नहीं दिया। मैं हिंदुओं के वोट से विधायक बना हूं। 
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे का बयान- मुस्लिम समुदाय को ‘हरे सांप’ कहा, गोल टोपी और दाढ़ी वालों ने मुझे वोट नहीं दिया।

Maharashtra News: महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे 11 जुलाई 2025 को मुंबई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए अपने बयान के कारण विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने कहा, “गोल टोपी और दाढ़ी वालों ने मुझे वोट नहीं दिया। मैं हिंदुओं के वोट से विधायक बना हूं। अगर मैं हिंदुओं का समर्थन नहीं करूंगा, तो क्या उर्दू बोलने वालों का समर्थन करूंगा? वे हरे सांप हैं... मुंबई का डीएनए हिंदू है।” इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा, “हम हिंदू और मराठी होने पर गर्व करते हैं।” इस बयान ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने के साथ-साथ विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों, और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं जन्म दी हैं।

नितेश राणे का यह बयान मुंबई में मराठी भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर चल रहे तनाव के बीच आया। हाल ही में, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं द्वारा एक गैर-मराठी दुकानदार को मराठी न बोलने के लिए कथित तौर पर पीटने की घटना ने सुर्खियां बटोरी थीं। इस घटना के बाद, राणे ने मराठी भाषा के उपयोग और कथित तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाए जाने के मुद्दे पर यह बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि हिंदुओं को मराठी न बोलने के लिए परेशान किया जा रहा है, जबकि अन्य समुदायों, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय को, इस तरह की मांगों से छूट दी जाती है।

राणे ने अपने बयान में मुस्लिम समुदाय को “गोल टोपी और दाढ़ी वाले” और “हरे सांप” जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया, जिसे कई लोगों ने सांप्रदायिक और भड़काऊ माना। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई का “डीएनए हिंदू” है और उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे की एक संयुक्त रैली को “जिहादी और हिंदू-विरोधी” करार दिया। यह बयान महाराष्ट्र में भाषा और धर्म के आधार पर बढ़ते ध्रुवीकरण को और हवा देता है।

नितेश राणे, जो कणकवली विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे हैं, अपने आक्रामक और विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं। वह स्वाभिमान संगठना के प्रमुख हैं, जो युवा बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं, और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर काम करता है। हालांकि, उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही है, जो हिंदुत्व और मराठी अस्मिता को लेकर भड़काऊ बयान देता है। उनके कुछ पिछले विवाद इस प्रकार हैं:

जनवरी 2025: राणे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को “एवरी वोट अगेंस्ट मुल्ला” कहा, जिसे विपक्ष और एनडीए सहयोगी रामदास अठावले की पार्टी ने निंदनीय बताया।

दिसंबर 2024: उन्होंने केरल को “मिनी पाकिस्तान” करार दिया और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा के समर्थकों को “आतंकवादी” कहा।

अप्रैल 2025: राणे ने हिंदुओं से दुकानदारों का धर्म पूछकर खरीदारी करने की अपील की, जिसे महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने समाज को बांटने वाला बताया।

जुलाई 2025: मराठी भाषा विवाद में उन्होंने MNS कार्यकर्ताओं को मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे मोहम्मद अली रोड और नल बाजार में जाकर मराठी बोलने की मांग करने की चुनौती दी।

इन बयानों के कारण राणे के खिलाफ कई प्राथमिकियां (FIR) दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें धार्मिक भावनाएं भड़काने और नफरत फैलाने के आरोप शामिल हैं।

नितेश राणे के इस बयान ने विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों में तीखा विरोध पैदा किया है। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आज़मी ने इसे “नफरत की राजनीति” करार देते हुए कहा, “उर्दू भारत में जन्मी भाषा है और आजादी की लड़ाई में इसका बड़ा योगदान रहा है। राणे को किसी के धर्म में दखल देने का कोई हक नहीं।” उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राणे के लिए “नफरत फैलाने का अलग मंत्रालय” बनाने की मांग की।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने कहा, “राणे को मुसलमानों पर गाली-गलौज के लिए मंत्रालय मिला हुआ है। उनके खिलाफ 20 से ज्यादा FIR हैं, लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती।” कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे ने राणे के बयान की निंदा करते हुए पूछा, “क्या ऐसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में रहने का हक है?” मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस बयान को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बताया और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

X पर इस बयान को लेकर कई पोस्ट्स वायरल हुईं। एक यूजर ने लिखा, “राणे का बयान न केवल मुसलमानों के खिलाफ है, बल्कि मुंबई की बहुसांस्कृतिक पहचान पर हमला है।” एक अन्य ने कहा, “भाजपा को मराठी और हिंदू अस्मिता के नाम पर समाज को बांटना बंद करना चाहिए।” हालांकि, कुछ यूजर्स ने राणे के बयान का समर्थन करते हुए इसे हिंदू और मराठी गौरव से जोड़ा। ये पोस्ट्स लोगों की भावनाओं को दर्शाते हैं, लेकिन तथ्यों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय नहीं हैं।

राणे का बयान महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (भाजपा, शिवसेना, और NCP) के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। उनके भाई और शिवसेना विधायक नीलेश राणे ने जून 2025 में उन्हें सावधानी से बोलने की सलाह दी थी, यह कहते हुए कि “गठबंधन का माहौल खराब नहीं होना चाहिए।” उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने भी अप्रैल 2025 में राणे के एक बयान के बाद सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी। इस बार भी, गठबंधन के कुछ नेताओं ने निजी तौर पर राणे के बयान को गैर-ज़रूरी और हानिकारक बताया, लेकिन भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

राणे का बयान महाराष्ट्र में भाषा और धर्म के आधार पर पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है। मुंबई, जो एक बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी शहर है, पहले भी मराठी बनाम गैर-मराठी और हिंदू-मुस्लिम जैसे विवादों का केंद्र रहा है। “मुंबई का डीएनए हिंदू” और मुस्लिम समुदाय को “हरे सांप” कहने जैसे बयान न केवल सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाते हैं, बल्कि मराठी भाषा के मुद्दे को धार्मिक रंग दे देते हैं।

मराठी भाषा को अनिवार्य करने की मांग लंबे समय से महाराष्ट्र में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। हालांकि, राणे का यह दावा कि हिंदुओं को मराठी न बोलने के लिए निशाना बनाया जा रहा है, तथ्यात्मक रूप से सत्यापित नहीं है। इस तरह के बयान भाषा के मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देकर सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

राणे के खिलाफ पहले भी धार्मिक भावनाएं भड़काने और नफरत फैलाने के लिए कई FIR दर्ज हो चुकी हैं। इस ताजा बयान के बाद, मुंबई पुलिस ने कहा कि वे इसकी समीक्षा कर रहे हैं और अगर ज़रूरी हुआ तो कार्रवाई करेंगे। समाजवादी पार्टी और AIMIM ने राणे के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है। हालांकि, 12 जुलाई 2025 तक इस बयान पर कोई नया मामला दर्ज नहीं हुआ है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राणे को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है।

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