अब ऋषि सुनक Goldman Sachs में करेंगे नौकरी, पूर्व ब्रिटिश पीएम बने सीनियर सलाहकार।

UK Prime Minister Rishi Sunak: पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जिन्होंने अक्टूबर 2022 से जुलाई 2024 तक ब्रिटेन का नेतृत्व किया, अब न्यूयॉर्क की मशहूर निवेश बैंक ....

Jul 10, 2025 - 19:39
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अब ऋषि सुनक Goldman Sachs में करेंगे नौकरी, पूर्व ब्रिटिश पीएम बने सीनियर सलाहकार।
पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक

Rishi Sunak: पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जिन्होंने अक्टूबर 2022 से जुलाई 2024 तक ब्रिटेन का नेतृत्व किया, अब न्यूयॉर्क की मशहूर निवेश बैंक Goldman Sachs में सीनियर सलाहकार के रूप में अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। यह खबर 8 जुलाई 2025 को Goldman Sachs ने आधिकारिक रूप से घोषित की। कंपनी के सीईओ डेविड सोलोमन ने कहा कि सुनक अपने अनुभव और वैश्विक आर्थिक व भू-राजनीतिक मुद्दों पर गहरी समझ के साथ कंपनी के ग्राहकों को सलाह देंगे। यह कदम सुनक के लिए एक तरह से पुरानी जड़ों की ओर लौटना है, क्योंकि उन्होंने 2001 से 2004 तक Goldman Sachs में बतौर विश्लेषक काम किया था। सुनक इस भूमिका में अंशकालिक रूप से काम करेंगे और रिचमंड एंड नॉर्थलरटन के सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां भी निभाते रहेंगे। उनकी इस नई भूमिका और इसके प्रभाव को समझने के लिए आइए विस्तार से जानते हैं।
  • Goldman Sachs में सुनक की भूमिका

Goldman Sachs ने 8 जुलाई 2025 को घोषणा की कि ऋषि सुनक सीनियर सलाहकार के रूप में कंपनी में शामिल हो रहे हैं। इस भूमिका में वह कंपनी के वैश्विक ग्राहकों को आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर सलाह देंगे। डेविड सोलोमन ने बताया कि सुनक की अनोखी अंतर्दृष्टि और अनुभव कंपनी के लिए मूल्यवान होंगे। वह Goldman Sachs के नेताओं के साथ मिलकर काम करेंगे और कंपनी के कर्मचारियों के साथ वैश्विक स्तर पर समय बिताकर उनकी सीखने और विकास की संस्कृति को बढ़ावा देंगे। सुनक की सैलरी को उनके और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति द्वारा स्थापित द रिचमंड प्रोजेक्ट नामक चैरिटी को दान किया जाएगा, जो ब्रिटेन में गणित की शिक्षा को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।

सुनक की यह नियुक्ति इसलिए भी खास है, क्योंकि वह 2000 में Goldman Sachs में ग्रीष्मकालीन इंटर्न के रूप में शामिल हुए थे और 2001 से 2004 तक विश्लेषक के तौर पर काम किया था। यह अनुभव उनके वित्तीय और आर्थिक नीतियों को समझने में मददगार रहा, जो बाद में उनकी राजनीतिक भूमिकाओं में दिखा।

ऋषि सुनक का जन्म 1980 में साउथम्पटन, ब्रिटेन में भारतीय मूल के माता-पिता के घर हुआ था। उनके माता-पिता 1960 के दशक में पूर्वी अफ्रीका से ब्रिटेन आए थे। सुनक ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र में पढ़ाई की और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। वह फुलब्राइट स्कॉलर भी रहे। 2001 में Goldman Sachs में काम करने के बाद, उन्होंने द चिल्ड्रन्स इनवेस्टमेंट फंड मैनेजमेंट (TCI) और थीलम पार्टनर्स जैसे हेज फंड्स में काम किया।

2015 में सुनक ने राजनीति में कदम रखा और रिचमंड (यॉर्क्स) से कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बने। 2020 से 2022 तक वह ब्रिटेन के वित्त मंत्री (चांसलर ऑफ द एक्सचेकर) रहे, जहां उन्होंने कोविड-19 संकट के दौरान आर्थिक नीतियों का नेतृत्व किया। अक्टूबर 2022 में लिज ट्रस के इस्तीफे के बाद वह ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री बने। हालांकि, जुलाई 2024 में कंजर्वेटिव पार्टी की ऐतिहासिक हार के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री और पार्टी नेता का पद छोड़ दिया। इस हार में पार्टी की सीटें 2019 के 365 से घटकर 121 रह गईं।

सुनक ने जुलाई 2024 तक विपक्ष के नेता के रूप में काम किया और फिर नवंबर 2024 में केमी बडेनॉक ने उनकी जगह ली। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के हूवर इंस्टीट्यूशन में मानद भूमिकाएं लीं, जिनके लिए उन्हें कोई वेतन नहीं मिलता। इसके अलावा, अप्रैल 2025 से उन्होंने तीन भाषणों के लिए 5 लाख पाउंड (लगभग 5.5 करोड़ रुपये) से अधिक की कमाई की।

सुनक की Goldman Sachs में वापसी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह उनके करियर का एक पूर्ण चक्र दर्शाता है, क्योंकि वह उसी कंपनी में लौट रहे हैं जहां से उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की थी। Goldman Sachs में उनकी भूमिका वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य पर सलाह देने की होगी, जो उनकी वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अनुभव को दर्शाती है। डेविड सोलोमन ने कहा कि सुनक का अनुभव वैश्विक निवेशकों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने में मदद करेगा।

सुनक का यह कदम वैश्विक वित्तीय क्षेत्र में एक आम रुझान को भी दर्शाता है, जहां पूर्व वरिष्ठ राजनेताओं को उनके अनुभव और नेटवर्क के कारण बैंकों और निवेश फर्मों में नियुक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, पूर्व वित्त मंत्री जॉर्ज ओसबोर्न ब्लैकरॉक में सलाहकार बने, और साजिद जाविद सेंट्रिकस में पार्टनर बने।

सुनक की नियुक्ति को ब्रिटेन की Advisory Committee on Business Appointments (ACOBA) ने मंजूरी दी है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। सुनक को जुलाई 2024 से दो साल तक ब्रिटिश सरकार के साथ लॉबिंग करने या अपने मंत्रालयी संपर्कों का इस्तेमाल नीतियों को प्रभावित करने के लिए करने की मनाही है। ACOBA ने यह भी नोट किया कि सुनक ने वित्तीय क्षेत्र में सुधारों की देखरेख की थी, जिससे Goldman Sachs जैसे बैंकों को फायदा हुआ, लेकिन वह इन नीतियों के विकास में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं थे। Goldman Sachs ने स्पष्ट किया कि सुनक की भूमिका लॉबिंग से संबंधित नहीं होगी और वह अपने मंत्रालयी अनुभव का दुरुपयोग नहीं करेंगे।

ऋषि सुनक की Goldman Sachs में सीनियर सलाहकार के रूप में नियुक्ति उनके करियर का एक नया अध्याय है। यह कदम उनके वित्तीय और राजनीतिक अनुभव को जोड़ता है, जिससे वह वैश्विक निवेशकों को सलाह दे सकेंगे। उनकी सैलरी का दान द रिचमंड प्रोजेक्ट को जाएगा, जो शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देगा। सुनक की यह नियुक्ति वैश्विक वित्तीय क्षेत्र में पूर्व राजनेताओं की मांग को दर्शाती है। वह रिचमंड एंड नॉर्थलरटन के सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां भी निभाते रहेंगे, जिससे उनका प्रभाव राजनीति और वित्त दोनों क्षेत्रों में बना रहेगा। सुनक की इस नियुक्ति ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। कुछ लोगों ने उनके ससुर, इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति के "70 घंटे काम" वाले बयान पर मजाक बनाया, तो कुछ ने उनकी नई भूमिका को उनकी योग्यता और बहुमुखी प्रतिभा का सबूत बताया। सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति की कुल संपत्ति 64 करोड़ पाउंड (लगभग 7,000 करोड़ रुपये) है, जिसमें अक्षता की इन्फोसिस में हिस्सेदारी का बड़ा योगदान है। उनकी सैलरी का द रिचमंड प्रोजेक्ट को दान करना सामाजिक प्रभाव को बढ़ाएगा।

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