शुभेंदु अधिकारी का विवादित बयान- झड़प करने वालों को बताया 'बांग्लादेशी घुसपैठिया', चुनाव आयोग से की कड़ी कार्रवाई की मांग

भवानीपुर विधानसभा सीट पर इस बार सीधा मुकाबला मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच है। चुनाव आयोग ने इस क्षेत्र को 'अति संवेदनशील' की श्रेणी में रखा था और यहां केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 20 से अधिक कंपनियां तैनात की गई थीं। इसके बावजूद, मुख्य उम्मीदवार के दौरे के समय हु

Apr 29, 2026 - 13:54
 0  7
शुभेंदु अधिकारी का विवादित बयान- झड़प करने वालों को बताया 'बांग्लादेशी घुसपैठिया', चुनाव आयोग से की कड़ी कार्रवाई की मांग
शुभेंदु अधिकारी का विवादित बयान- झड़प करने वालों को बताया 'बांग्लादेशी घुसपैठिया', चुनाव आयोग से की कड़ी कार्रवाई की मांग
  • भवानीपुर का सियासी अखाड़ा: शुभेंदु अधिकारी और समर्थकों के बीच तीखी झड़प, मतदान केंद्र के बाहर भारी तनाव
  • बंगाल चुनाव का चरम: भवानीपुर में बूथ विजिट के दौरान हुआ हंगामा, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के दौरान राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर में राजनीतिक हिंसा और तनाव का एक नया अध्याय जुड़ गया है। बुधवार को मतदान के दौरान भाजपा उम्मीदवार और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी जब भवानीपुर के एक मतदान केंद्र का जायजा लेने पहुंचे, तो वहां मौजूद प्रतिद्वंद्वी दल के कार्यकर्ताओं के साथ उनकी जबरदस्त भिड़ंत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी का काफिला जैसे ही बूथ के करीब पहुंचा, वहां पहले से मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी, जो देखते ही देखते धक्कमुक्की और शारीरिक झड़प में तब्दील हो गई। इस घटना ने चुनाव के शांतिपूर्ण दावों के बीच सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की तैनाती करनी पड़ी। स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई थी कि पुलिस को उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

इस झड़प के तुरंत बाद शुभेंदु अधिकारी ने एक अत्यंत गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बयान दिया, जिसने विवाद की आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने उन पर और उनके समर्थकों पर हमला किया, वे स्थानीय नागरिक नहीं बल्कि 'बांग्लादेशी मुस्लिम' और घुसपैठिए हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल ने जानबूझकर ऐसे तत्वों को भवानीपुर के संवेदनशील बूथों पर तैनात किया है ताकि मतदाताओं को डराया जा सके और चुनावी प्रक्रिया में बाधा डाली जा सके। शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और हमलावरों को संरक्षण देती दिखी। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में 'बाहरी बनाम भीतरी' और 'सांप्रदायिक ध्रुवीकरण' की बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

भवानीपुर में हुई इस घटना के दौरान सुरक्षा घेरा पूरी तरह टूटता नजर आया। जब भाजपा उम्मीदवार बूथ के अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे, तब बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उनके वाहन को घेर लिया और 'गो बैक' के नारे लगाए। इस दौरान हुई धक्कामुक्की में शुभेंदु अधिकारी के कुछ निजी सुरक्षा गार्डों को भी मामूली चोटें आईं। जवाबी कार्रवाई में भाजपा समर्थकों ने भी नारेबाजी की, जिससे सड़क युद्ध जैसी स्थिति बन गई। पुलिस अधिकारियों ने बड़ी मुश्किल से शुभेंदु अधिकारी को सुरक्षित वहां से निकाला। इस अफरातफरी के कारण करीब एक घंटे तक मतदान केंद्र पर वोटिंग की रफ्तार थम गई, क्योंकि आम मतदाता डर के मारे बाहर निकलने से कतरा रहे थे। प्रशासन ने बाद में सुरक्षा बढ़ाते हुए इलाके में फ्लैग मार्च किया ताकि शांति बहाल की जा सके।

भवानीपुर की संवेदनशीलता

भवानीपुर विधानसभा सीट पर इस बार सीधा मुकाबला मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच है। चुनाव आयोग ने इस क्षेत्र को 'अति संवेदनशील' की श्रेणी में रखा था और यहां केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 20 से अधिक कंपनियां तैनात की गई थीं। इसके बावजूद, मुख्य उम्मीदवार के दौरे के समय हुई यह हिंसक झड़प सुरक्षा खामियों की ओर बड़ा इशारा करती है। आयोग ने इस पूरी घटना की वीडियो फुटेज मंगवाई है। झड़प की इस खबर के फैलते ही राज्य के अन्य हिस्सों में भी राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। प्रतिद्वंद्वी दल के नेतृत्व ने शुभेंदु अधिकारी के बयान को 'घृणास्पद' और 'सांप्रदायिक' करार दिया। उनका तर्क है कि जब विपक्ष के नेता को अपनी हार साफ नजर आने लगती है, तो वे इसी तरह के विभाजनकारी बयानों का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि भवानीपुर की जनता शांतिप्रिय है और जो लोग विरोध कर रहे थे, वे वहां के स्थानीय निवासी थे जो विपक्ष की नीतियों से नाराज हैं। वहीं, भाजपा ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताया है और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति और उम्मीदवार के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम मतदाता की सुरक्षा की क्या गारंटी है। यह साफ होता है कि मतदान केंद्रों के बाहर भीड़ का जमावड़ा चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन था। नियमों के मुताबिक, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का राजनीतिक जमावड़ा प्रतिबंधित है, लेकिन भवानीपुर में दोनों ही पक्षों के कार्यकर्ता सैकड़ों की तादाद में मौजूद थे। पुलिस ने बाद में कार्रवाई करते हुए 10 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को लिखे अपने औपचारिक पत्र में उन विशिष्ट बूथों की सूची सौंपी है, जहां उनके अनुसार 'बाहरी तत्वों' का बोलबाला है। उन्होंने इन बूथों पर फिर से मतदान कराने और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की है ताकि शेष समय में निष्पक्ष वोटिंग सुनिश्चित हो सके। दोपहर के बाद भवानीपुर के इस इलाके में सन्नाटा तो पसर गया, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी चुनाव के दिन इस तरह का उग्र प्रदर्शन नहीं देखा था। शुभेंदु अधिकारी का 'बांग्लादेशी मुस्लिम' वाला आरोप सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया, जिससे राज्य के अन्य संवेदनशील जिलों में भी सुरक्षा अलर्ट जारी करना पड़ा। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि मतदान के बाद भी इन दोनों समूहों के बीच होने वाली संभावित झड़पों को कैसे रोका जाए। पुलिस ने संवेदनशील चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी है और संदिग्धों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow