डायमंड हार्बर में 'सिंघम' की धमक- IPS अजय पाल शर्मा ने संभाला मोर्चा, अपराधियों और उपद्रवियों में खौफ
आईपीएस अजय पाल शर्मा की कार्यप्रणाली अन्य अधिकारियों से अलग है क्योंकि वे केवल दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं लेते, बल्कि खुद सड़कों पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हैं। डायमंड हार्बर की संकरी गलियों और ग्रामीण इलाकों में वे भारी सुरक्षा घेरे के साथ लगा
- बंगाल चुनाव में यूपी के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का एक्शन: फर्जी मतदान रोकने के लिए सख्त पहरा, पोलिंग बूथों पर खुद कर रहे निगरानी
- चुनावी रण में 'रियल लाइफ सिंघम': डायमंड हार्बर की संवेदनशीलता के बीच अजय पाल शर्मा की तैनाती, निष्पक्ष मतदान के लिए कड़ा संदेश
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले का डायमंड हार्बर क्षेत्र राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मियों का केंद्र बन गया है। इस संवेदनशील इलाके में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को बतौर पुलिस ऑब्जर्वर तैनात किया है। 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' और 'यूपी के सिंघम' के नाम से मशहूर अजय पाल शर्मा की यहां मौजूदगी ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। पदभार संभालते ही उन्होंने डायमंड हार्बर और इसके आसपास के विधानसभा क्षेत्रों, विशेषकर फाल्टा में अपनी सख्त कार्यशैली का परिचय देना शुरू कर दिया। उनकी तैनाती का मुख्य उद्देश्य उन ताकतों पर लगाम लगाना है जो डरा-धमकाकर या बल प्रयोग के जरिए चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते रहे हैं। डायमंड हार्बर में मतदान शुरू होने से पहले ही अजय पाल शर्मा एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने क्षेत्र के अति संवेदनशील पोलिंग बूथों का दौरा किया और स्थानीय पुलिस बल के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या बूथ कैप्चरिंग की कोशिश को तुरंत कुचल दिया जाए। एक वायरल वीडियो में वे फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के एक उम्मीदवार के परिजनों और समर्थकों को कड़ी चेतावनी देते हुए दिखे, जिसमें वे स्पष्ट कह रहे थे कि यदि मतदाताओं को डराने की कोई भी शिकायत मिली, तो 'अच्छे से खबर ली जाएगी'। उनकी इस कार्यशैली ने जहां आम मतदाताओं में विश्वास जगाया है, वहीं उन तत्वों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो अब तक चुनावी हिंसा के बल पर अपनी सक्रियता बनाए रखते थे।
आईपीएस अजय पाल शर्मा की कार्यप्रणाली अन्य अधिकारियों से अलग है क्योंकि वे केवल दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं लेते, बल्कि खुद सड़कों पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हैं। डायमंड हार्बर की संकरी गलियों और ग्रामीण इलाकों में वे भारी सुरक्षा घेरे के साथ लगातार गश्त कर रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग की नजर हर संदिग्ध गतिविधि पर है। फर्जी मतदान रोकने के लिए उन्होंने 'एंटी-रिगिंग' दस्ते को सक्रिय किया है और मतदान केंद्रों के बाहर 100 मीटर के दायरे में किसी भी अनधिकृत जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगा दी है। उनकी इस सक्रियता का परिणाम यह हुआ है कि मतदान के शुरुआती घंटों में डायमंड हार्बर के कई इलाकों में अप्रत्याशित शांति और व्यवस्था देखने को मिली है।
अधिकारी प्रोफाइल: कौन हैं अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस महानिरीक्षक (DIG) के पद पर तैनात हैं। पेशे से डेंटिस्ट रहे शर्मा ने पुलिस सेवा में आने के बाद 500 से अधिक एनकाउंटर्स का नेतृत्व किया है। उन्हें उनकी निडरता और त्वरित न्याय के लिए 'सिंघम' की उपाधि मिली है। बंगाल चुनाव में उनकी तैनाती को निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। हालांकि, अजय पाल शर्मा के इस सख्त अंदाज ने राज्य में एक बड़े राजनीतिक विवाद को भी जन्म दे दिया है। सत्तारूढ़ दल ने उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे 'डराने-धमकाने वाली राजनीति' करार दिया है। आरोप लगाए गए हैं कि पुलिस ऑब्जर्वर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और केवल एक पक्ष को निशाना बना रहे हैं। फाल्टा के एक उम्मीदवार ने तो यहां तक दावा किया कि अधिकारी ने उनके घर में जबरन प्रवेश किया और परिवार के सदस्यों को अपमानित किया। इस मामले को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें उनकी नियुक्ति को रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालतों ने चुनावी प्रक्रिया के बीच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिससे अजय पाल शर्मा के हाथ और मजबूत हो गए।
प्रशासनिक स्तर पर अजय पाल शर्मा ने यह सुनिश्चित किया है कि संवेदनशील मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों की तैनाती का उचित उपयोग हो। अक्सर यह शिकायत रहती थी कि राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय की कमी का फायदा उपद्रवी उठाते हैं। शर्मा ने खुद इन दोनों बलों के बीच सेतु का काम किया और हर गश्ती दल को जवाबदेही के साथ काम करने का आदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया और कंट्रोल रूम के जरिए मिलने वाली शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) की प्रणाली विकसित की है। यही कारण है कि डायमंड हार्बर में इस बार पुरानी चुनावी हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने में प्रशासन को काफी हद तक सफलता मिलती दिख रही है। डायमंड हार्बर का यह चुनाव अजय पाल शर्मा के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यहां के परिणाम राज्य की अगली सरकार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। ऐसे में एक 'बाहरी' कैडर के अधिकारी का यहां आकर कानून का शासन स्थापित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन जिस तरह से उन्होंने अपराधियों को 'बाद में मत रोना' जैसी सख्त चेतावनी दी, उसने एक संदेश साफ कर दिया है कि कानून सबके लिए बराबर है। मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक ऐसे रक्षक की बन गई है जो उन्हें बिना किसी दबाव के अपनी मर्जी से वोट देने का अवसर प्रदान कर रहा है।
What's Your Reaction?









