Vial: नागौर में ई-मित्र संचालक की सूझबूझ ने बचाई जान, हार्ट अटैक से जूझ रहे युवक को CPR देकर दी नई जिंदगी, वायरल हुआ वीडियो।
राजस्थान के नागौर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने न केवल मानवता और तत्परता की मिसाल पेश की, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों...
राजस्थान के नागौर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने न केवल मानवता और तत्परता की मिसाल पेश की, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा। एक ई-मित्र सेंटर पर जन आधार कार्ड में सुधार करवाने आए एक युवक को अचानक हार्ट अटैक पड़ गया। इस गंभीर स्थिति में ई-मित्र संचालक सुरेंद्र सोलंकी ने अपनी सूझबूझ और प्रशिक्षण का परिचय देते हुए तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) दिया, जिससे युवक की जान बच गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और लोग संचालक की तारीफ करते नहीं थक रहे। 18 जून 2025 की सुबह, नागौर शहर के एक ई-मित्र सेंटर पर 32 वर्षीय युवक मोहनलाल (बदला हुआ नाम) अपने जन आधार कार्ड में कुछ सुधार करवाने के लिए पहुंचा। वह सेंटर पर मौजूद संचालक सुरेंद्र सोलंकी से बात कर ही रहा था कि अचानक उसे सीने में तेज दर्द हुआ, और वह कुर्सी से फिसलकर जमीन पर गिर गया। मोहनलाल के मुंह से झाग निकलने लगा, और वह बेहोश हो गया। यह देखकर सेंटर पर मौजूद अन्य लोग घबरा गए, लेकिन सुरेंद्र ने तुरंत स्थिति को संभाला।
सुरेंद्र को कुछ समय पहले एक सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर में CPR का बुनियादी प्रशिक्षण मिला था। उन्होंने तुरंत मोहनलाल की नब्ज और सांस की जांच की और पाया कि उनकी सांस रुक चुकी थी। बिना समय गंवाए, सुरेंद्र ने मोहनलाल को सीधा लिटाया और CPR शुरू किया। उन्होंने छाती पर संतुलित दबाव डाला और कृत्रिम सांस देने की प्रक्रिया को दोहराया। करीब 4-5 मिनट की मेहनत के बाद मोहनलाल ने हल्की सांस ली और होश में आने के संकेत दिखाए। इस बीच, सेंटर पर मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने 108 एम्बुलेंस को कॉल किया, जो 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंची।
एम्बुलेंस कर्मियों ने मोहनलाल को प्राथमिक उपचार दिया और उसे तुरंत नागौर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर CPR न दिया गया होता, तो मोहनलाल की जान बचना मुश्किल था। इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक युवक की जिंदगी बचाई, बल्कि यह भी साबित किया कि आपातकालीन स्थिति में प्रशिक्षण कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
- CPR का महत्व: जीवन रक्षक तकनीक
कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक ऐसी आपातकालीन तकनीक है, जिसका उपयोग तब किया जाता है, जब किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाती है। यह तकनीक छाती पर दबाव डालकर रक्त संचार को बहाल करने और कृत्रिम सांस देकर ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करती है। हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में पहले कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, और CPR इन मिनटों में मरीज को जीवित रखने का एकमात्र तरीका हो सकता है।
इस मामले में, सुरेंद्र सोलंकी का CPR प्रशिक्षण और उनकी त्वरित कार्रवाई मोहनलाल के लिए वरदान साबित हुई। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल लाखों लोग कार्डियक अरेस्ट के कारण अपनी जान गंवाते हैं, और इनमें से कई जिंदगियां CPR के समय पर उपयोग से बचाई जा सकती हैं। यह घटना समाज के लिए एक जागरूकता संदेश है कि CPR प्रशिक्षण को स्कूलों, कॉलेजों, और कार्यस्थलों पर अनिवार्य करना चाहिए।
लोगों ने सुरेंद्र की तारीफ करते हुए उन्हें “हीरो” और “जीवन रक्षक” बताया। एक यूजर ने लिखा, “सुरेंद्र सोलंकी जैसे लोग समाज के असली नायक हैं। उनकी वजह से एक परिवार की खुशियां बचीं।” एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया, “यह वीडियो हर किसी को CPR सीखने के लिए प्रेरित करता है। सरकार को इसे स्कूलों में अनिवार्य करना चाहिए।” इस वीडियो ने न केवल सुरेंद्र की बहादुरी को उजागर किया, बल्कि नागौर के लोगों में गर्व की भावना भी जगाई।
मोहनलाल के परिवार ने इस घटना के बाद सुरेंद्र सोलंकी और अस्पताल के कर्मचारियों का दिल से आभार व्यक्त किया। मोहनलाल की पत्नी ने बताया कि उनके पति को पहले से कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं थी, और यह हार्ट अटैक अचानक हुआ। उन्होंने कहा, “सुरेंद्र जी ने मेरे पति को नया जीवन दिया। हम उनके आभारी हैं।” मोहनलाल के भाई ने भी कहा कि इस घटना ने उन्हें CPR के महत्व का एहसास कराया, और अब वह अपने परिवार के सभी सदस्यों को यह प्रशिक्षण दिलाने की योजना बना रहे हैं।
नागौर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने भी इस घटना की सराहना की। नागौर के जिला कलेक्टर ने सुरेंद्र सोलंकी को सम्मानित करने की घोषणा की, और कहा कि उनकी त्वरित कार्रवाई अन्य लोगों के लिए प्रेरणा है। पुलिस ने यह भी सुनिश्चित किया कि घटना के बाद सेंटर पर कोई अव्यवस्था न हो, और एम्बुलेंस को समय पर पहुंचने में मदद की। @DmNagaur ने इस घटना को ट्वीट करते हुए सुरेंद्र की तारीफ की और लोगों से CPR प्रशिक्षण लेने की अपील की।
यह घटना भारत में बढ़ते हार्ट अटैक मामलों पर भी प्रकाश डालती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, और नियमित स्वास्थ्य जांच की कमी के कारण युवा आयु वर्ग में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। इस घटना ने लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक होने और नियमित जांच करवाने का संदेश दिया।
साथ ही, यह घटना CPR प्रशिक्षण की कमी को भी उजागर करती है। भारत में बहुत कम लोग इस जीवन रक्षक तकनीक से परिचित हैं, और ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह और भी दुर्लभ है। सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को इस दिशा में काम करने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक लोग CPR सीख सकें।
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