मोबाइल की लत से बच्चों के जीवन पर पड़ता विपरीत प्रभाव और पुस्तकों से दोस्ती का समाधान। 

नित नए आविष्कार जीवन को सुगम बनाने के लिए किये गये,परन्तु वर्तमान में वो कहीं ना कहीं मानव जीवन के विनाश का कारण भी बनते जा रहे हैं। यह कहना...

Jul 22, 2025 - 17:56
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मोबाइल की लत से बच्चों के जीवन पर पड़ता विपरीत प्रभाव और पुस्तकों से दोस्ती का समाधान। 
मोबाइल की लत से बच्चों के जीवन पर पड़ता विपरीत प्रभाव और पुस्तकों से दोस्ती का समाधान। 

लेखक- रतन खंगारोत, जयपुर

नित नए आविष्कार जीवन को सुगम बनाने के लिए किये गये,परन्तु वर्तमान में वो कहीं ना कहीं मानव जीवन के विनाश का कारण भी बनते जा रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा की ,अति तो नुकसानदायक ही होती है, फिर वह चाहे किसी भी क्षेत्र में क्यों ना हो मोबाइल। फोन जो आपसी संवाद के लिए बनाया गया था। वह वर्तमान में एक अति आवश्यक जरूरत बनकर रह गया है। किसी भी व्यक्ति विशेष के सारे कार्य  फोन पर ही निर्भर हो गए है। फिर भी एक व्यस्क व्यक्ति को पता है कि उसे , फोन को कितना  काम में लेना है। 

परंतु इस मोबाइल की वजह से बच्चों के जीवन पर जो विपरीत असर पड़ रहा है, वह एक गंभीरऔर चिंताजनक विषय है। कोरोना काल के बाद से तो बच्चों को मोबाइल की एक भारी लत लग गई है। क्योंकि 99% स्कूल  अपने सारे कार्य व नीत नए प्रोजेक्ट फोन पर ही देने लग गए हैं। जिस कारण न चाहते हुए भी माता-पिता को अपने बच्चों के हाथ में फोन देना ही पड़ता है। अब तो हालात यह हो गए हैं कि अध्यापक भी किसी विषय को सही से नहीं पढाते तो बच्चे उनसे दोबारा समझने की बजाय मोबाइल पर सर्च करते हैं।

यह आदतें उनको दिन-ब दिन किताबों से दूर ले जा रही है। पहले कुछ समझ में नहीं आता था तो अध्यापक, दोस्तों या फिर माता-पिता से पूछा जाता था, जहां एक की जगह 10 प्रश्न समझ आते थे। परंतु अब सीधा गूगल पर सर्च किया जाता है, जहां एक मीनिंग गलत हो जाए तो बच्चे ना जाने कौन से दलदल में चले जाते हैं। मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य( आंख ,गर्दन व पीठ) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है ,वहीं मानसिक स्वास्थ्य जैसे -तनाव ,चिंता व अवसाद तथा  सामाजिक कौशल जैसे- दोस्तों व परिवार से दूर रहना। नींद व शिक्षा पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई में रुचि कम हो रही है। व ध्यान केंद्रित करने में भी कठिनाई हो रही है।

 इन सभी समस्याओं का एक ही समाधान है कि, कैसे भी करके बच्चों की किताबों से दोस्ती कराई जाए। इसके लिए सर्वप्रथम माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों को प्रतिदिन 2 घंटे का समय दे, और उनसे प्राचीन व वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा करके फिर किसी विषय पर गहन अध्ययन के लिए बच्चों को पुस्तकों का सहारा लेने के लिए प्रेरित करें। बच्चों के लिए रोचक व आकर्षक पुस्तकों को चुने जो बच्चों की रुचि और उम्र के अनुसार हो।

जब पुस्तकें  बच्चों के पसंद की होगी तो उनमें पढ़ने की उत्सुकता अधिक रहेगी।  बच्चों के लिए घर का एक कोना ऐसा हो जो शांत हो तथा रोशनी से भरपूर हो, जहां वह आरामदायक व शांति के माहौल में अपनी रुचि की पुस्तक पढ़े। बच्चों में नियमित 1 घंटे रोचकपूर्ण व शिक्षाप्रद  पुस्तक पढ़ने की आदत बनाएं। कभी-कभी बच्चों को लेकर लाइब्रेरी में भी जाना चाहिए जहां बच्चे, दूसरों को पढ़ता देखकर प्रोत्साहित होकर स्वयं भी पढ़ना चाहेंगे। 

जितना संभव हो,बच्चों के साथ माता-पिता को भी अपनी पसंद की किताबों के साथ पढ़ना चाहिए जिस कारण घर का माहौल खुशनुमा होगा और बच्चे मोबाइल फोन से दूर रहेंगे। बहुत ज्यादा जरूरी होने पर ही सिमित समय के लिए  बच्चों के हाथ में फोन दे।  बच्चों को कुछ वैज्ञानिक पुस्तकें  भी दे और छोटे- छोटे प्रयोग के साथ उन्हें खेलने दे। बच्चों की जीवन शैली में एक या दो घंटे प्रतिदिन रोचकपूर्ण व ज्ञानवर्धक पुस्तकों के साथ बिताने से उनके ज्ञान में वृद्धि होगी, व शब्दावली में सुधार तथा कल्पना शक्ति में  भी वृद्धि होगी,  जो एक सफल जीवन के लिए अति आवश्यक है।

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