गीत- पूछ रही धनिया...

बिन बोले बदला करते हैं, मौसम के तेवर...

By INA News Desk
Oct 8, 2024 - 13:33
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गीत- पूछ रही धनिया...
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पूछ रही धनिया

बिन बोले बदला करते हैं
मौसम के तेवर

कई दिनों से ठंडा है
यह लिपा-पुता चूल्हा
बिन ब्याहे लौटी बरात का
जैसे  हो  दूल्हा

उम्मीदें कच्ची दीवार सी
ढहती हैं भर-भर

बरस रहे बादल /कहते हैं
बरस रहा सोना
खाली हैं बर्तन ,घर का 
खाली कोना-कोना

पूस-माघ की सर्दी
उस पर टपक रहा छप्पर

कब हमरेहू दिन बहुरेंगे
पूछ रही धनिया
जब उधार मांगो तो
लौटा देता बनिया

क्या बेचूँ गिरवी रक्खे हैं
घर के सब जेवर

कुछ तो कहो प्रधान
दिखाये सपने बड़े-बड़े
एक कदम भी बढ़े नहीं 
हैं हम तो यहीं खड़े

पूरी ताकत से हो तुम हाकिम
तुमको किसका डर

डॉ. मधु प्रधान ,कानपुर

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