कन्या पूजन की थाली के लिए पारंपरिक भोग: घर पर ऐसे तैयार करें हलवा, चना, खीर और पूड़ी का संगम।
कन्या पूजन के प्रसाद की शुरुआत 'काले चने' से होती है, जो शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें बनाने के लिए सूखे काले चनों को रात भर पानी में
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कन्या पूजन के प्रसाद की शुरुआत 'काले चने' से होती है, जो शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें बनाने के लिए सूखे काले चनों को रात भर पानी में भिगोकर रखना अत्यंत आवश्यक है। सुबह इन्हें साफ पानी से धोकर प्रेशर कुकर में थोड़ा नमक और पानी डालकर 4-5 सीटी आने तक उबाल लें। अब एक कड़ाही में थोड़ा घी गरम करें और उसमें जीरा, बारीक कटा हुआ अदरक और हरी मिर्च का तड़का लगाएं। इसके बाद हल्दी, धनिया पाउडर, अमचूर और थोड़ा सा गरम मसाला डालकर मसालों को अच्छी तरह भूनें। उबले हुए चने (बिना पानी के) इसमें मिलाएं और मध्यम आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि मसाले चनों पर अच्छी तरह लिपट न जाएं। अंत में बारीक कटा हरा धनिया डालकर इसे सजाएं।
प्रसाद की थाली का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'सूजी का हलवा' है, जो अपनी मिठास से भोग को संपूर्ण बनाता है। इसे दानेदार और स्वादिष्ट बनाने के लिए एक कड़ाही में आधा कप देसी घी गरम करें और उसमें एक कप सूजी डालें। सूजी को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक वह सुनहरी भूरी (Golden Brown) न हो जाए और उसमें से सोंधी खुशबू न आने लगे। दूसरी ओर, तीन कप पानी में एक कप चीनी और थोड़ी इलायची डालकर उबाल लें। जब सूजी भुन जाए, तो चीनी वाला पानी धीरे-धीरे सूजी में डालें और लगातार चलाते रहें ताकि गुठलियां न बनें। जब हलवा कड़ाही छोड़ने लगे और घी अलग होने लगे, तो ऊपर से कटे हुए बादाम, काजू और किशमिश डालकर इसे सर्व करें।
'खीर' माता रानी के प्रिय भोगों में से एक है और इसे बनाने के लिए धैर्य और सही तकनीक की जरूरत होती है। सबसे पहले एक भारी तले के बर्तन में एक लीटर फुल क्रीम दूध उबालने के लिए रख दें। जब दूध में उबाल आ जाए, तो उसमें मुट्ठी भर भीगे हुए बासमती चावल (हल्के दरदरे किए हुए) डालें। धीमी आंच पर दूध को तब तक पकाएं जब तक वह गाढ़ा होकर आधा न रह जाए और चावल पूरी तरह गल न जाएं। बीच-बीच में चलाते रहें ताकि खीर नीचे न लगे। जब खीर मलाईदार हो जाए, तो इसमें स्वादानुसार चीनी, केसर के धागे और बारीक कटी मेवा मिलाएं। अंत में पिसी हुई इलायची का पाउडर डालकर इसे ठंडा या गुनगुना होने के लिए रख दें।
- पूड़ी को गुब्बारे जैसा फुलाने की तकनीक
पूड़ी को नरम और फूला हुआ बनाने के लिए आटे का सही होना बहुत जरूरी है। आटा गूंथते समय उसमें एक चम्मच घी और चुटकी भर नमक जरूर मिलाएं। पूड़ी का आटा रोटी के मुकाबले थोड़ा सख्त गूंथना चाहिए और उसे कम से कम 15-20 मिनट के लिए ढककर छोड़ देना चाहिए। तलते समय तेल अच्छी तरह गरम होना चाहिए; यदि तेल कम गरम होगा तो पूड़ी तेल सोख लेगी और फूलेगी नहीं। पूड़ी को कड़ाही में डालने के बाद हल्का सा कलछी से दबाएं, जिससे वह तुरंत फूल जाएगी।
प्रसाद की थाली में 'फूली-फूली पूड़ियां' सात्विक भोजन का मुख्य आधार होती हैं। पूड़ी बनाने के लिए गेहूं के आटे में थोड़ा सा मोयन (तेल या घी) डालकर सख्त आटा गूंथ लें। अब छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें बिना सूखा आटा लगाए थोड़ा तेल लगाकर बेलें। एक कड़ाही में पर्याप्त तेल या घी गरम करें। जब तेल से हल्का धुआं निकलने लगे, तब पूड़ी को सावधानी से डालें। मध्यम-तेज आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें। गरमागरम पूड़ियां जब हलवे और चने के साथ परोसी जाती हैं, तो इनका स्वाद दोगुना हो जाता है। ध्यान रहे कि पूड़ियों को तलकर एक पेपर नैपकिन पर रखें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए।
कन्या पूजन केवल भोजन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा का विषय है। प्रसाद तैयार करने के बाद, नौ कन्याओं और एक बालक (बटुक भैरव के रूप में) को सादर आमंत्रित करें। उनके आने पर सबसे पहले उनके पैर धोएं और उन्हें साफ आसन पर बिठाएं। उनके माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं और कलाई पर कलावा (मौली) बांधें। इसके बाद तैयार किया गया हलवा, चना, खीर और पूड़ी का प्रसाद उन्हें प्रेमपूर्वक परोसें। भोजन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कन्याओं को किसी भी चीज की कमी न हो और माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहे। भोजन के उपरांत उन्हें दक्षिणा, फल और उपहार देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
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