चैत्र नवरात्रि 2026: छतरपुर के श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ में सप्तमी की भव्य आरती, श्रद्धा का उमड़ा जनसैलाब।
दिल्ली के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर, जिसे आम बोलचाल में छतरपुर मंदिर के नाम से जाना जाता है, वहां चैत्र
- आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ दक्षिण दिल्ली का आकाश, मां कालरात्रि के पूजन के साथ छतरपुर मंदिर में विशेष अनुष्ठान संपन्न
- भक्ति और विश्वास का संगम: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन शक्तिपीठ में उमड़ी भारी भीड़, सुरक्षा और सुविधाओं के बीच भक्तों ने किए दर्शन
दिल्ली के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर, जिसे आम बोलचाल में छतरपुर मंदिर के नाम से जाना जाता है, वहां चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन यानी सप्तमी तिथि को एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर मां के जयकारों से गुंजायमान था और शाम की भव्य आरती के समय भक्ति का सैलाब चरम पर पहुंच गया। इस विशेष अवसर पर मंदिर के मुख्य पुजारी और न्यास के सदस्यों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार के साथ मां कालरात्रि की विशेष आरती की गई। आरती के दौरान ढोल-नगाड़ों और शंख की ध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मां की ज्योति के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर को देशी और विदेशी फूलों से सजाया गया था, जिसकी खुशबू दूर-दूर तक महसूस की जा रही थी।
नवरात्रि के सातवें दिन को मां कालरात्रि की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है, जिन्हें शत्रुओं का नाश करने वाली और भक्तों को शुभ फल देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। छतरपुर मंदिर में इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह शक्तिपीठ अपनी भव्यता और प्राचीन मान्यताओं के लिए पूरे भारत में विख्यात है। आरती के पूर्व मंदिर के गर्भगृह में मां की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया था। मां को नीले और लाल रंग के वस्त्रों के साथ सोने के आभूषणों से सुसज्जित किया गया था। सप्तमी की इस विशेष आरती में शामिल होने के लिए केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। भक्तों की लंबी कतारें मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर छतरपुर रोड तक देखी गईं, जो मां के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा को दर्शा रही थीं।
प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से इस बार सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। चूंकि चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन इस वर्ष 2026 में बेहद खास संयोग लेकर आया है, इसलिए मंदिर ट्रस्ट ने आरती के समय विशेष ध्यान रखा ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। जगह-जगह एलइडी स्क्रीन्स लगाई गई थीं ताकि कतारों में खड़े लोग भी मुख्य मंदिर में हो रही आरती और अनुष्ठान का सीधा प्रसारण देख सकें। सुरक्षा के लिहाज से सैकड़ों पुलिस कर्मियों और निजी सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई थी। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों के जरिए भी भीड़ पर नजर रखी जा रही थी। श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और चिकित्सा शिविरों की भी व्यवस्था की गई थी, जिससे भीषण गर्मी के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ की स्थापना संत शिरोमणि बाबा नागपाल जी ने की थी। यह मंदिर संगमरमर से निर्मित अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहाँ का 'शयन कक्ष' भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है, जहाँ देवी की एक शय्या और श्रृंगार का सामान रखा जाता है। माना जाता है कि सप्तमी की रात्रि को यहाँ की गई प्रार्थना विशेष रूप से स्वीकार होती है।
शाम की मुख्य आरती के पश्चात मंदिर परिसर में विशेष 'हवन' का आयोजन भी किया गया। सप्तमी की रात को तांत्रिक और सात्विक दोनों ही रूपों में मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। विद्वान पंडितों द्वारा वेदों के ऋचाओं का पाठ किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण में एक सकारात्मक कंपन महसूस किया जा रहा था। आरती के बाद भक्तों के बीच विशेष प्रसाद का वितरण किया गया। मंदिर प्रबंधन ने इस वर्ष पर्यावरण के अनुकूल नवरात्रि मनाने का संकल्प लिया है, जिसके तहत चढ़ावे के फूलों का उपयोग खाद बनाने में किया जा रहा है और भक्तों को प्लास्टिक मुक्त थैलों में प्रसाद वितरित किया जा रहा है। भक्तों ने मंदिर परिसर में स्थित 'कल्पवृक्ष' पर मन्नत का धागा बांधकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना की।
छतरपुर मंदिर की वास्तुकला और वहां की सजावट इस बार विशेष चर्चा का विषय रही। सप्तमी की आरती के समय मंदिर को दूधिया रोशनी और रंग-बिरंगी लाइटों से इस कदर नहलाया गया था कि वह किसी दिव्य लोक के समान प्रतीत हो रहा था। मुख्य मंदिर के गुंबद पर लगी लाइटिंग ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंदिर के सेवादारों ने बताया कि इस बार नवरात्रि उत्सव को और अधिक भव्य बनाने के लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। आरती में शामिल होने आए बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए गोल्फ कार्ट और व्हीलचेयर की विशेष व्यवस्था की गई थी ताकि वे बिना किसी कठिनाई के मां के दर्शन कर सकें। सेवा भाव का यह अनूठा उदाहरण छतरपुर मंदिर की परंपरा का हिस्सा रहा है।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। सप्तमी की संध्या पर भजन गायकों ने मां की महिमा का गुणगान किया, जिससे आरती के पूर्व का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन छतरपुर मंदिर में उपस्थिति मात्र से ही मन को असीम शांति प्राप्त होती है। आरती के समय भक्त अपने हाथों में दीये लेकर मां की वंदना कर रहे थे, जिससे मंदिर का प्रांगण हजारों दीपों की लौ से जगमगा उठा। यह दृश्य इतना मनमोहक था कि लोग इसे अपने कैमरों और यादों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाए। मंदिर की स्वच्छता और प्रबंधन की सराहना हर आने वाले श्रद्धालु द्वारा की जा रही थी। चैत्र नवरात्रि 2026 के शेष दिनों के लिए भी मंदिर में विशेष तैयारियां जारी हैं। अष्टमी और नवमी के दिन होने वाले विशाल भंडारे और कन्या पूजन के लिए अभी से रसद और अन्य सामग्री का प्रबंधन किया जा चुका है। सप्तमी की इस आरती की सफलता ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि छतरपुर मंदिर न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था और भारतीय संस्कृति का एक जीवंत प्रतीक भी है।
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