गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जासूसी सिंडिकेट का भंडाफोड़, पुलिस ने तीन और मुख्य संदिग्धों को दबोचा।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के ट्रांस हिंडन क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने एक अत्यंत गंभीर और व्यापक जासूसी नेटवर्क
- आईएसआई और आतंकी संगठनों के लिए संवेदनशील ठिकानों की रेकी करने वाले नेटवर्क का विस्तार, अब तक 21 गिरफ्तारियां
- देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले डिजिटल जासूसों का मायाजाल, सीसीटीवी और सोशल मीडिया के जरिए पड़ोसी देश भेजी जा रही थी खुफिया जानकारी
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के ट्रांस हिंडन क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने एक अत्यंत गंभीर और व्यापक जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करने में सफलता प्राप्त की है। इस कार्रवाई के नवीनतम चरण में पुलिस ने तीन और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पकड़े गए इन आरोपियों पर आरोप है कि वे सीधे तौर पर पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई और विभिन्न प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के संपर्क में थे। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पार बैठे आका अब डिजिटल माध्यमों और स्थानीय लोगों का उपयोग करके भारत के महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों की जासूसी करा रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में अब तक की जांच के बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या 21 तक पहुंचा दी है, जिसमें कई नाबालिग भी शामिल पाए गए हैं।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि इस जासूसी नेटवर्क का जाल केवल गाजियाबाद तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। हाल ही में पकड़े गए तीन संदिग्धों में एक मुख्य संचालक भी शामिल है, जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में स्थित रेलवे स्टेशनों, सैन्य छावनियों और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें और वीडियो तैयार करते थे। इन विजुअल्स को फिर एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सीमा पार भेजा जाता था। इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली इतनी व्यवस्थित थी कि प्रत्येक सूचना और वीडियो के बदले इन्हें निश्चित राशि का भुगतान किया जाता था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक पेशेवर जासूसी मॉड्यूल था।
इस गिरोह की सबसे खतरनाक साजिश का हिस्सा वे सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे थे, जिन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थापित किया गया था। पुलिस की जांच में यह बात आई है कि इन संदिग्धों ने दिल्ली छावनी और सोनीपत जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पास गुप्त रूप से सिम-आधारित कैमरे लगाए थे। इन कैमरों का लाइव फीड सीधे पड़ोसी देश में बैठे हैंडलर्स को उपलब्ध कराया जा रहा था, ताकि वे भारतीय सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति पर चौबीसों घंटे नजर रख सकें। यह तकनीक का एक ऐसा दुरुपयोग था जिसने सुरक्षा तंत्र के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। पकड़े गए आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उनका लक्ष्य ऐसे 50 से अधिक कैमरे स्थापित करना था, ताकि दिल्ली से लेकर कश्मीर तक के महत्वपूर्ण मार्गों की वास्तविक समय में निगरानी की जा सके। जांच में पाया गया है कि इस नेटवर्क ने गरीब और कम पढ़े-लिखे युवाओं को अपना निशाना बनाया। उन्हें मामूली रकम, जैसे 500 से 5,000 रुपये प्रति कार्य, का लालच देकर इस देशविरोधी गतिविधि में शामिल किया गया। इसमें महिलाओं और नाबालिगों का उपयोग इसलिए किया गया ताकि सुरक्षा बलों और पुलिस को उन पर आसानी से संदेह न हो।
पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क का मुख्य सरगना 'सरदार' उर्फ 'जोरावर सिंह' नाम का व्यक्ति है, जो संभवतः पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है। भारत में इस मॉड्यूल को संभालने वाले मुख्य गुर्गों ने सोशल मीडिया के माध्यम से दर्जनों समूह बनाए हुए थे, जिनमें सैकड़ों युवाओं को जोड़ा गया था। इन समूहों में केवल उन्हीं लोगों को सक्रिय रखा जाता था जो तकनीकी रूप से दक्ष थे या जिनकी पहुंच संवेदनशील इलाकों तक आसान थी। आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच में ऐसे कई व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड मिले हैं, जो सीधे तौर पर विदेशी हैंडलर्स के साथ उनके जुड़ाव की पुष्टि करते हैं।
इस जासूसी प्रकरण में एक और गंभीर पहलू हथियारों और जाली मुद्रा की तस्करी का भी जुड़ा हुआ है। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में से कुछ का आपराधिक इतिहास रहा है और वे पहले भी अवैध हथियारों की सप्लाई में शामिल रहे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क का उद्देश्य केवल सूचनाएं साझा करना ही नहीं था, बल्कि भविष्य में किसी बड़ी आतंकी घटना के लिए जमीन तैयार करना भी था। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें विशेष रूप से उन रेलवे लाइनों और पुलों की रेकी करने के निर्देश दिए गए थे, जिनका उपयोग सैन्य परिवहन के लिए किया जाता है। पुलिस अब इनपुट के आधार पर उन वित्तीय स्रोतों की तलाश कर रही है, जिनके माध्यम से इन जासूसों को फंड ट्रांसफर किए जा रहे थे।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया है और आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की है। गिरफ्तार किए गए नए संदिग्धों की पहचान समीर, शिवराज और एक अन्य के रूप में हुई है, जो दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छिपकर रह रहे थे। पुलिस ने इनके पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। इन लोगों ने न केवल महत्वपूर्ण ठिकानों की तस्वीरें भेजीं, बल्कि जीपीएस लोकेशन के जरिए उन स्थानों की सटीक जानकारी भी साझा की, जो किसी भी संभावित हमले के लिए बेहद संवेदनशील हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियां अब उन सभी लोगों की तलाश कर रही हैं जो इन संदिग्धों के सीधे संपर्क में थे या जिन्होंने जाने-अनजाने में इनकी मदद की थी।
क्या आप चाहते हैं कि मैं इस मामले में शामिल मुख्य आरोपियों के प्रोफाइल या उनके द्वारा उपयोग की गई विशिष्ट तकनीक के बारे में और अधिक जानकारी प्रदान करूं?
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