राजस्थान न्यूज़: खुशियारा के न्यूट्री गार्डन ने बांटी खुशियों की सौगात, कुपोषण के कारण सुर्खियों में रहा राजस्थान का बारां।
- शाहाबाद में कुपोषण व अति कुपोषण का आंकड़ा घटा
राजस्थान का बारां जिला कुपोषण के कारण मुद्दत से चर्चाओं में रहा। वजह, सहरिया जनजाति का विकास की धारा में पिछडऩा और अशिक्षा के चलते सेहतमंद शाकभाजी व फलों की गुणवत्ता से उनकी अनभिज्ञता है। कुपोषण से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से नीति आयोग के तहत न्यूट्री गार्डन विकसित किया गया। इसके सफल संचालन का जिम्मा मिला बारां की प्रगति संस्थान को। शुरूआत में 64 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 37 बच्चे अति कुपोषित तथा 168 बच्चे कुपोषित थे, जबकि अब अति कुपोषित 9 और कुपोषित बच्चों की संख्या घटकर 44 रह गई है। ऐसा चिह्नित बच्चों के अभिभावकों से निरंतर संवाद और न्यूट्री गार्डन से पोषणयुक्त हरी सब्जियों के वितरण से संभव हो पाया है।
हरी सब्जियों से मिलने वाले पोषण के प्रति शाहाबाद ब्लॉक के इन लोगों में जागरूकता लाने के लिए 25 अगस्त, 2022 को शुरू हुए न्यूट्री गार्डन से केलवाड़ा और समरानिया परिक्षेत्र के 64 आंगनबाड़ी केन्द्रों को जोड़ा गया, जो 15 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। बारां जिले के किशनगंज और शाहाबाद ब्लॉक में कुल आबादी की करीब 40 फीसदी जनसंख्या सहरिया जनजाति की है। इनकी संख्या करीब 1 लाख 30 हजार है। शाहाबाद में 236 व किशनगंज में 213 गांव हैं। इनमें से शाहाबाद के 100 और किशनगंज के 128 गांवों में सहरिया समुदाय के लोग रहते हैं। पहले इनकी आजीविका का साधन मात्र वन उपज हुआ करती था, लेकिन अब मजदूरी ही इनकी आजीविका का प्रमुख जरिया है।
राजेश खण्डेलवाल, साधना सोलंकी, बारां (राजस्थान)
शाहाबाद ब्लॉक के गांव खुशियारा स्थित राजकीय जनजातीय बालिका आवासीय स्कूल परिसर के करीब पौने दो बीघा भूमि में लगाए गए न्यूट्री गार्डन का कार्यकारी विभाग चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को बनाया, जिसे कृषि विज्ञान केन्द्र, अंता ने तकनीकी सहयोग दिया। न्यूटी गार्डन के निरीक्षण की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की रही तो उद्यान विभाग ने कृषि आधारित सहयोग किया। फिलहाल सेहत के मामले में इस क्षेत्र में कई संस्थाएं सेवारत हैं। इसलिए हैल्थ अवेयरनेस बढ़ी है, जबकि शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित सुधार की अब भी दरकार है।
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हरी सब्जियों, फलीय पौधों से लहलहाता गार्डन
स्कूल परिसर के करीब पौने दो बीघा भूमि में मौसम की सभी हरी सब्जियों, फलीय पेड़ पौधों से लहलहाता न्यूट्री गार्डन सेहत की पाती का खूबसूरत संदेशा देता प्रतीत हुआ। जिस जमीन पर न्यूट्री गार्डन बनाया, वह जमीन पहले लगभग बंजर थी। यहां घास और कटीली खरपतवार का साम्राज्य था, जिसे कड़ी मेहनत से उपजाऊ बनाया। मौसम के अनुसार लगभग हर सब्जी यहां की शोभा है। आयरन, विटामिंस से मालामाल लाल साग चौलाई, पालक, बैंगन, चुकंदर, पोदीना, काशीफल, गिलकी तुरई, लौकी, भिंडी, टमाटर, खीरा, शकरकंद, करेला, फूल व पत्ता गोभी, मूंगफली हैं तो फलीय पौधे भी अपनी उपस्थिति की महक यहां की फिजां में बिखेर रहे हैं। औषधीय गुणों को संजोए, मिठास से भरपूर अमरूद लगे हैं तो खटास भरा नींबू, करौंदा भी पक जाने को आतुर हैं। आम, जामुन, आंवला, चीकू, पपीता, सहजन, केला भी शनै: शनै: आकार ले रहे हैं।
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बाजार की सब्जियों में ऐसा स्वाद कहां?
बाजार की सब्जियां स्वादहीन लगती हैं। न्यूट्री गार्डन की सब्जियां प्राकृतिक स्वाद से भरपूर हैं। इन्हें खाकर आनंद आता है और यही आनंद अच्छी सेहत का कारक भी है। कुछ ऐसा ही कहना है खुशियारा के जनजातीय बालिका आवासीय स्कूल में कार्यरत गणित विषय की शिक्षिका कमला इन्दौरा का। गर्भवती शिक्षिका इंदौरा हंसते हुए बताती हैं, न्यूट्री गार्डन की सब्जियों का स्वाद और लाभ मैंने भी भरपूर लिया है। यहां की व्यवस्था को मैं शत-प्रतिशत अंक दूंगी। वर्कर समय से आते हैं और पूरी मेहनत से काम भी करते हैं। समय-समय पर लाभार्थियों की मीटिंग होती है, जिसमें स्वास्थ्य विकास, कार्य प्रणाली, भावी योजनाओं पर सार्थक चर्चा होती हैं। न्यूट्री गार्डन में किसी को ककड़ी खीरा खाते हुए देखती हूं तो मैं भी मांग लेती हूं। बाजार की और यहां की सब्जियों के स्वाद और रूप में अंतर साफ देखा समझा जा सकता है। यहां के फल व सब्जियां खाने से मुझे बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिला है।
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तीन माह में हीमोग्लोबिन स्तर 7 से 10.7 पहुंचा
खुशियारा निवासी कालीचरण मेहता की लाभार्थी पत्नी कृष्णा छह माह की गर्भवती हैं। तीन माह पहले जांच के दौरान खून में हीमोग्लोबिन स्तर 7 था, जिसने उसकी और परिवार वालों की चिंता बढ़ा दी। तब न्यूट्री गार्डन के काउन्सलर अनिल राठौड़ व कम्यूनिटी मोबिलाइजर तुलसीराम प्रजापति ने उन्हें गार्डन की ताजा हरी सब्जियां नियमित मुहैया करवाई और इनका महत्व समझाया। खुराक में चुकन्दर, पालक, लौकी, कद्दू , भिंडी, करेला, लाल साग, पोदीना शामिल किया गया। नतीजन अब उनके खून में हीमोग्लोबिन का स्तर 10.7 हो गया है। परिवार के अन्य सदस्य भी स्वास्थ्य जागरूकता का लाभ ले रहे हैं।
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आंगनबाड़ी पर सेहत की हलचल
आंगनबाड़ी केन्द्र संख्या 2 की सहायिका 30 वर्षीय सुआ पत्नी माखन जाटव ने 12 अक्टूबर, 2022 को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। इससे पहले 5 साल का एक बेटा था। जुड़वां बच्चों में से छोटे का वजन डेढ़ किलो व बड़े का दो किलो था। सुआ बताती है कि तब हरी सब्जियां, फल, दूध-दलिया की खुराक लेना शुरू किया। इससे मेरे दूध की पौष्टिकता बढ़ी और बच्चों की सेहत में सुधार हुआ। 15 जुलाई को जब बच्चों का वजन लिया गया, जो संतोषजनक था। इनका वजन अब 7 और 8 किलो हो गया है। सुआ कहती है, मैंने अपना एक बच्चा अब अपनी बहिन को दे दिया है, क्योंकि उसके कोई बच्चा नहीं था।
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माता-पिता काम पर, बच्चे आंगनबाड़ी में
इस आंगनबाड़ी केन्द्र पर बच्चे नमकीन-मीठे मुरमुरे, दलिया का पोषाहार लेकर व कुछ खेल कूदकर जा चुके थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रामवती मेहता ने उन्हें फिर बुलवाया तो वे दौड़ते भागते, नंगे पांव आ जुटे और वहां उपलब्ध खिलौनों में रम गए। एक-दूसरे से उलझ लिए, फिर गले में हाथ डाल दिया। इनके माता-पिता मजदूरी पर हैं और बच्चों के लिए खेल का मैदान छोटा सा आंगनबाड़ी केन्द्र।
इनका कहना है.......
- खुशियारा स्थित बालिका जनजातीय आवासीय स्कूल परिसर में बने न्यूट्री गार्डन प्रोजेक्ट की समय अवधि 31 जुलाई, 2024 को पूरी हो गई। समयावधि नहीं बढऩे के कारण न्यूट्री गार्डन आवासीय स्कूल को सौंप दिया है।
ललित वैष्णव, अध्यक्ष, प्रगति संस्थान, बारां
ललित वैष्णव, अध्यक्ष, प्रगति संस्थान, बारां
- खुशियारा में बने न्यूट्री गार्डन से लाभार्थियों को काफी फायदा हुआ। क्षेत्र में कुपोषण व अति कुपोषण की स्थिति में सुधार भी हुआ है। यहां कार्यरत टीम ने बेहतरीन काम किया। क्षेत्र में अब अन्य किसी गांव में न्यूट्री गार्डन का संचालन हो, इसके लिए जिला प्रशासन से आग्रह किया जाएगा।
विनोद मेहता, सरपंच, खुशियारा पंचायत।
विनोद मेहता, सरपंच, खुशियारा पंचायत
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