दिल्ली पुलिस की मुहिम: अक्टूबर में 10 एनकाउंटरों से 5 कुख्यात अपराधी ढेर, राजधानी का अंडरवर्ल्ड दहशत में।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, जो तेजी से बढ़ते अपराधों का केंद्र बनी हुई है, इस अक्टूबर महीने में पुलिस की सख्त कार्रवाई का गवाह बनी। 1 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक के
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, जो तेजी से बढ़ते अपराधों का केंद्र बनी हुई है, इस अक्टूबर महीने में पुलिस की सख्त कार्रवाई का गवाह बनी। 1 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक के 27 दिनों में दिल्ली पुलिस ने 10 एनकाउंटर किए, जिनमें 5 कुख्यात अपराधियों को मार गिराया गया। इसके अलावा, 12 से अधिक अपराधी घायल हुए और गिरफ्तार किए गए। ये कार्रवाइयां संगठित अपराध के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जॉइंट ऑपरेशन, हाई-टेक ट्रैकिंग और बुलेटप्रूफ जैकेट जैसे आधुनिक उपकरणों पर आधारित थीं। पुलिस का यह अभियान न केवल अपराधियों को सबक सिखा रहा है, बल्कि राजधानी को एक सुरक्षित शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
यह अभियान 1 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश से जुड़े एक अंतरराज्यीय अपराधी को घेरा। आरोपी का नाम विजय उर्फ विज्जू था, जो हत्या और जबरी वसूली के कई मामलों में वांछित था। कापसहेड़ा इलाके में हुई गोलीबारी में विजय को गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल और नकदी बरामद की। यह एनकाउंटर रोहित गोडारा गैंग से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने का पहला कदम था। विजय पर 50,000 रुपये का इनाम था।
दूसरा एनकाउंटर 3 अक्टूबर को कापसहेड़ा में ही हुआ। यहां राजस्थान के दो अपराधी आकाश राजपूत और महिपाल को घेरा गया। दोनों गोडारा सिंडिकेट से जुड़े थे और हत्या, अपहरण व वसूली के मामलों में तीन राज्यों में वांछित थे। गोलीबारी में आकाश को पैर में गोली लगी, जबकि महिपाल घायल होकर गिरफ्तार हुआ। आकाश पर 20,000 रुपये का इनाम था। पुलिस ने बताया कि ये दोनों डलर कोटिया गैंग के लिए काम करते थे। इस ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस का सहयोग था।
5 अक्टूबर को तीसरा एनकाउंटर साउथ दिल्ली के वसंत विहार में हुआ। यहां एक हथियार तस्कर रवि उर्फ छोटू को घेरा गया। रवि ने पुलिस पर फायरिंग की, लेकिन जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। उसके पास से दो देसी कट्टे बरामद हुए। रवि पर कई हथियार सप्लाई के मामले दर्ज थे। इस एनकाउंटर ने अवैध हथियारों की चेन को तोड़ा।
7 अक्टूबर को चौथा बड़ा ऑपरेशन हुआ। दिल्ली और गुड़गांव पुलिस की जॉइंट टीम ने साउथईस्ट दिल्ली के आस्था कुंज पार्क के पास नेपाल के अपराधी भीम महाबाहादुर जोरा को मार गिराया। जोरा हत्या और डकैती के अंतरराष्ट्रीय मामलों में वांछित था। गोलीबारी में जोरा को सीने में गोली लगी और वह मौके पर मारा गया। उसके पास से एक AK-47 राइफल और ग्रेनेड मिले। यह एनकाउंटर ने सीमा पार अपराध नेटवर्क को झटका दिया।
अक्टूबर का सबसे बड़ा एनकाउंटर 23 अक्टूबर को रोहिणी में हुआ। दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस की जॉइंट टीम ने सिग्मा एंड कंपनी गैंग के चार कुख्यात सदस्यों को घेरा। ये अपराधी रंजन पाठक, विमलेश महतो, मनीष पाठक और अमन ठाकुर थे। सभी बिहार के सीतामढ़ी जिले के निवासी थे। गोलीबारी में चारों मारे गए। रंजन पाठक गैंग का सरगना था, जिस पर 50,000 रुपये का इनाम था। ये अपराधी बिहार चुनाव से पहले हत्या और वसूली की साजिश रच रहे थे। पुलिस ने उनके पास से तीन सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और एक देसी हथियार बरामद किया। यह एनकाउंटर दिल्ली का 2019 के बाद का सबसे बड़ा था।
25 अक्टूबर को दो एनकाउंटर हुए। पहले मेहरौली में हथियार सप्लायर कनिष्क उर्फ कोकू को घेरा गया। कोकू सोशल मीडिया पर हथियार लहराते वीडियो डालता था। गोलीबारी में वह घायल हो गया। उसके पास से दो पिस्टल बरामद हुईं। दूसरे एनकाउंटर में नांगलोई में तीन लुटेरे गिरफ्तार हुए। इनमें से दो घायल थे। ये अपराधी डकैती और अपहरण के पुराने मामले में वांछित थे।
26 अक्टूबर को बादरपुर में लुटेरा हिमांशु को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया गया। हिमांशु ने हाल ही में एक पिज्जा डिलीवरी बॉय को लूटा था। उसके साथी पहले ही पकड़े जा चुके थे।
27 अक्टूबर को आखिरी एनकाउंटर आस्था कुंज पार्क के पास हुआ। यहां हथियार सप्लायर तेजस उर्फ भारत को घेरा गया। गोलीबारी में वह घायल हो गया। उसके पास से एक पिस्टल और गोली मिलीं।
ये सभी कार्रवाइयां हाई-टेक ट्रैकिंग पर आधारित थीं। पुलिस ने ड्रोन, जीपीएस और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग का इस्तेमाल किया। बुलेटप्रूफ जैकेट ने पुलिसकर्मियों को सुरक्षित रखा। दो पुलिसकर्मी मामूली घायल हुए। इन ऑपरेशनों से गोडारा, कोटिया और सिग्मा जैसे नेटवर्क टूटे।
दिल्ली में अपराध दर बढ़ रही थी। 2024 में 500 से अधिक एनकाउंटर हुए। इस अभियान ने अंडरवर्ल्ड में दहशत फैला दी। डीसीपी संजीव यादव ने कहा कि ये कार्रवाइयां अपराधियों को चेतावनी हैं। जनता ने सराहना की, लेकिन मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की।
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