ईरान में विरोध-प्रदर्शनों पर खूनी दमन जारी, सैटेलाइट तस्वीरों में नतांज-इस्फहान परमाणु स्थलों पर नई छतें बनीं, विशेषज्ञों ने सामग्री पुनर्प्राप्ति का संकेत बताया
तस्वीरों में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक क्षतिग्रस्त इमारतों पर नई छतें बनाई गईं। दिसंबर की शुरुआत में छत बनाना शुरू हुआ और महीने के अंत तक पूरा हो गया। विशेषज्ञों के
- मुद्रास्फीति और रियाल अवमूल्यन के खिलाफ ईरान में उबाल, सरकार की क्रूर कार्रवाई के बीच सैटेलाइट इमेज में क्षतिग्रस्त परमाणु साइट्स पर हलचल, अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद पहली बड़ी गतिविधि
- ईरान विरोध-प्रदर्शन: हजारों मौतें और गिरफ्तारियां, इस्फहान-नतांज परमाणु स्थलों पर सैटेलाइट से नई छतें दिखीं, विशेषज्ञ बोले - बचे उच्च संवर्धित यूरेनियम की जांच का प्रयास
By Sukhmaal Jain(Senior Journalist & Social Activist)
ईरान में मुद्रा अवमूल्यन, बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ दिसंबर 2025 से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शनों पर सरकार की कड़ी दमनकारी कार्रवाई से तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस बीच सैटेलाइट इमेजरी से प्राप्त तस्वीरों में देश के दो प्रमुख परमाणु स्थलों - नतांज और इस्फहान - पर नई गतिविधियां दिखाई दी हैं, जहां क्षतिग्रस्त इमारतों पर छतें बनाई गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिविधि पिछले साल अमेरिका और इजराइल के हमलों में क्षतिग्रस्त हुए स्थलों से बचे परमाणु सामग्री को पुनः प्राप्त करने या मूल्यांकन करने का प्रयास हो सकता है।
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन आर्थिक संकट से उपजे हैं। ईरानी रियाल का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जहां 1 डॉलर के लिए 1.47 मिलियन से 1.5 मिलियन रियाल तक का भाव दर्ज किया गया। यह गिरावट 2025 में 40 प्रतिशत से अधिक की रही, जिससे आयातित वस्तुओं की कीमतें आसमान छू गईं। खाद्य पदार्थों की कीमतें औसतन 72 प्रतिशत बढ़ गईं, जबकि स्वास्थ्य और चिकित्सा सामग्री में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वार्षिक मुद्रास्फीति दिसंबर 2025 में 42.2 प्रतिशत और उसके बाद 44.6 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कई वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है।
ये प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए, जहां दुकानदारों ने हड़ताल की और सड़कों पर उतर आए। जल्द ही प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए, जिसमें अन्य शहरों और प्रांतों में भी शामिल हो गए। प्रदर्शनकारी आर्थिक कुप्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, पानी और ऊर्जा की कमी तथा राजनीतिक दमन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शन राजनीतिक रूप लेते हुए वर्तमान शासन के अंत की मांग तक पहुंच गए।
सरकार ने विरोध-प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई की। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस, गोलीबारी और गिरफ्तारियां कीं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनों और दमन में हजारों लोगों की मौत हुई, जिसमें कुछ अनुमानों में 6,159 से अधिक और अन्य में 36,000 तक की संख्या बताई गई। हजारों लोग गिरफ्तार किए गए, जिसमें 3,000 से अधिक की संख्या आधिकारिक रूप से बताई गई। इंटरनेट ब्लैकआउट लगाया गया, जिससे सूचना का प्रवाह बाधित हुआ। इलाम प्रांत के मलेकशाही शहर में सबसे घातक कार्रवाई हुई, जहां सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। सरकार ने प्रदर्शनों को दबा दिया होने का दावा किया है और सड़कें शांत बताई हैं।
इस बीच, 30 जनवरी 2026 के आसपास जारी रिपोर्टों में Planet Labs PBC की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि ईरान के दो प्रमुख परमाणु स्थलों - नतांज और इस्फहान - पर गतिविधियां हुई हैं। जून 2025 में इजराइल के 12-दिवसीय युद्ध और उसके बाद अमेरिका के हमलों में ये स्थल क्षतिग्रस्त हुए थे। नतांज में पायलट फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट (PFEP) को इजराइली हमले में 13 जून को कार्यात्मक रूप से नष्ट कर दिया गया था, जबकि 22 जून को अमेरिकी हमले में बंकर-बस्टिंग बमों से भूमिगत हॉल क्षतिग्रस्त हुए। इस्फहान में भी भारी क्षति हुई।
तस्वीरों में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक क्षतिग्रस्त इमारतों पर नई छतें बनाई गईं। दिसंबर की शुरुआत में छत बनाना शुरू हुआ और महीने के अंत तक पूरा हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार, ये छतें पूर्ण पुनर्निर्माण का संकेत नहीं हैं, बल्कि क्षतिग्रस्त स्थलों से बचे महत्वपूर्ण सामग्री - जैसे उच्च संवर्धित यूरेनियम की सीमित मात्रा - का मूल्यांकन करने या पुनर्प्राप्त करने के प्रयास का हिस्सा हो सकती हैं। ये गतिविधियां जून 2025 के बाद किसी भी क्षतिग्रस्त परमाणु स्थल पर दिखाई गई पहली प्रमुख हलचल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये छतें सैटेलाइट निगरानी से बचाव के लिए बनाई गई हैं ताकि बचे परमाणु तत्वों की जांच या निकासी की जा सके। ये प्रयास पुनर्निर्माण से अलग हैं और मुख्य रूप से क्षति मूल्यांकन पर केंद्रित हैं। ये गतिविधियां राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों पर खूनी दमन के बीच सामने आई हैं, जिससे देश में तनाव और बढ़ गया है। ईरान की आर्थिक स्थिति पिछले वर्षों से बिगड़ रही है, जिसमें 2018 से अमेरिकी प्रतिबंधों और जून 2025 के युद्ध के प्रभाव शामिल हैं। प्रदर्शन शुरू होने के बाद सरकार ने कुछ राहत उपायों की घोषणा की, लेकिन इनका प्रभाव सीमित रहा। मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन ने घरेलू बजट पर भारी बोझ डाला है। ये घटनाएं ईरान में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तनाव को एक साथ दर्शाती हैं। प्रदर्शनों पर दमन और परमाणु स्थलों पर गतिविधियां दोनों ही वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
What's Your Reaction?











