इंदौर जिला अदालत में खौफनाक हादसा: सुनवाई के दौरान जज की कुर्सी पर गिरा चलता हुआ सीलिंग फैन, महिला न्यायाधीश के सिर और कंधे में आई चोट।

इंदौर के जिला न्यायालय की पुरानी इमारत के कोर्ट रूम नंबर 26 में सोमवार दोपहर कार्यवाही अपने पूरे शवाब पर थी। महिला अपर सत्र न्यायाधीश

By INA News Desk
Mar 18, 2026 - 15:12
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इंदौर जिला अदालत में खौफनाक हादसा: सुनवाई के दौरान जज की कुर्सी पर गिरा चलता हुआ सीलिंग फैन, महिला न्यायाधीश के सिर और कंधे में आई चोट।
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  • न्याय के मंदिर में सुरक्षा पर सवाल; इंदौर कोर्टरूम में पंखा गिरने से मची अफरा-तफरी, वकीलों ने जर्जर भवन और खराब रखरखाव को लेकर जताया कड़ा विरोध।
  • अपर सत्र न्यायाधीश के केबिन में मौत बनकर गिरा बिजली का पंखा; बाल-बाल बची जान, वकीलों ने कोर्ट परिसर को बताया 'डेथ ट्रैप' और की ऑडिट की मांग।

इंदौर के जिला न्यायालय की पुरानी इमारत के कोर्ट रूम नंबर 26 में सोमवार दोपहर कार्यवाही अपने पूरे शवाब पर थी। महिला अपर सत्र न्यायाधीश महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें देख रही थीं और वकील अपनी दलीलें पेश कर रहे थे। इसी बीच, छत पर पूरी गति से चल रहा लोहे का भारी सीलिंग फैन अचानक जोर की आवाज के साथ अपने हुक से उखड़ गया। इससे पहले कि वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति कुछ समझ पाता या अपनी जगह से हट पाता, पंखा सीधे न्यायाधीश की कुर्सी पर जा गिरा। पंखे के गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि बाहर गलियारे में मौजूद लोग भी सहम गए और उन्हें लगा कि शायद कोई बड़ा ढांचा ढह गया है।

  • न्यायाधीश को आई गंभीर चोटें

पंखा गिरने के कारण महिला न्यायाधीश को सिर और कंधे के ऊपरी हिस्से में चोट लगी है। गनीमत यह रही कि पंखा सीधे उनके सिर के बीचों-बीच नहीं गिरा, वरना परिणाम और भी घातक हो सकते थे। घटना के तुरंत बाद कोर्ट रूम में मौजूद कर्मचारियों और वकीलों ने न्यायाधीश को संभाला। उन्हें फौरन कोर्ट परिसर में ही मौजूद डिस्पेंसरी ले जाया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने उनका प्राथमिक उपचार किया। दर्द और सदमे के कारण उनकी हालत को देखते हुए बाद में उन्हें उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया गया। सूत्रों के अनुसार, उनकी चोटें फिलहाल खतरे से बाहर हैं, लेकिन इस हादसे ने उन्हें गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है।

  • कोर्ट परिसर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

इंदौर की इस पुरानी जिला अदालत की इमारत में लंबे समय से मेंटेनेंस की कमी देखी जा रही है। वकीलों के अनुसार, सीलिंग फैन का इस तरह गिरना कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि विभाग की घोर लापरवाही है, जो नियमित रूप से बिजली के उपकरणों की जांच नहीं करता है।

  • वकीलों का फूटा गुस्सा और काम बंद की चेतावनी

जैसे ही यह खबर कोर्ट परिसर में फैली, बड़ी संख्या में वकील और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए। वकीलों ने कोर्ट रूम की हालत और बिजली के उपकरणों के जर्जर होने पर गहरा रोष व्यक्त किया। वकीलों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब अदालत परिसर में इस तरह का खतरा महसूस किया गया हो। पुरानी इमारत की छतों से प्लास्टर गिरना और बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होना यहां एक आम समस्या बन चुकी है। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि न्यायाधीश ही अपने केबिन में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता और वकीलों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा।

  • जर्जर भवन और 'डेथ ट्रैप' का आरोप

हादसे के बाद वकीलों ने कोर्ट परिसर का निरीक्षण किया और कई जगहों पर सीलन व कमजोर छतों की ओर ध्यान दिलाया। कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इमारत को 'डेथ ट्रैप' करार देते हुए कहा कि पुरानी फिटिंग्स और सालों पुराने पंखों को अब तक बदला नहीं गया है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद रखरखाव के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। वकीलों ने मांग की है कि पूरी अदालत परिसर के सभी बिजली के उपकरणों और पंखों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। उनका तर्क है कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि छतें और उन पर लगे उपकरण सुरक्षित हैं, तब तक डर के साये में काम करना मुश्किल है।

  • नए भवन के निर्माण में देरी बनी समस्या

इस पूरे मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि इंदौर में नए जिला न्यायालय भवन का निर्माण कार्य पिपल्याहाना क्षेत्र में पिछले काफी समय से चल रहा है। हालांकि, निर्माण की धीमी गति के कारण अभी तक अदालत की कार्यवाही वहां स्थानांतरित नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नई इमारत को पूरी तरह तैयार होने में अभी कम से कम 15 से 18 महीने का समय और लग सकता है। तब तक हजारों की संख्या में वकील, पक्षकार और न्यायाधीश इसी पुरानी और असुरक्षित इमारत में बैठने को मजबूर हैं। इसी देरी को लेकर अब कानूनी बिरादरी में असंतोष बढ़ता जा रहा है और वे तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

  • प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच के आदेश

हादसे की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट प्रशासन ने भी सक्रियता दिखाई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के इलेक्ट्रिकल विंग को कोर्ट रूम के सभी पंखों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि वे इस घटना के कारणों का पता लगाएंगे कि आखिर एक चलता हुआ पंखा हुक से कैसे अलग हो गया। यह भी जांच की जा रही है कि पिछली बार इन उपकरणों का मेंटेनेंस कब किया गया था। कोर्ट के प्रशासनिक अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुराने पंखों को बदलकर नए हाई-स्पीड और सुरक्षित पंखे लगाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।

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