यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र पर भारी विवाद; 'अवसरवादी' का विकल्प 'पंडित' बताने पर भड़का ब्राह्मण समाज, भर्ती बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित दरोगा (SI) भर्ती परीक्षा के एक सेट में हिंदी विषय के अंतर्गत एक प्रश्न पूछा गया
- लखनऊ में पोस्टर वार: समाजवादी पार्टी ने दरोगा भर्ती विवाद को दिया सियासी रंग, सरकार पर लगाया एक विशिष्ट वर्ग के अपमान का आरोप।
- शब्दावली के चयन पर छिड़ा संग्राम; दरोगा परीक्षा में विवादित विकल्प को लेकर चौतरफा घिरी उत्तर प्रदेश सरकार, समाज के विभिन्न वर्गों में गहरा आक्रोश।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित दरोगा (SI) भर्ती परीक्षा के एक सेट में हिंदी विषय के अंतर्गत एक प्रश्न पूछा गया था। इस प्रश्न में 'अवसरवादी' शब्द के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुनने को कहा गया था। विसंगति तब शुरू हुई जब परीक्षा के उत्तर विकल्पों में से एक के रूप में 'पंडित' शब्द को रखा गया। जैसे ही यह प्रश्न पत्र और इसकी उत्तर कुंजी सार्वजनिक हुई, ब्राह्मण समाज और प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने इसे सीधे तौर पर अपनी अस्मिता और गरिमा से जोड़ लिया। लोगों का तर्क है कि 'पंडित' शब्द का अर्थ विद्वान या ज्ञानी होता है, जिसे नकारात्मक अर्थ वाले 'अवसरवादी' शब्द के साथ जोड़ना न केवल भाषाई दृष्टि से गलत है, बल्कि यह एक पूरे समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।
- सामाजिक संगठनों का कड़ा विरोध
इस विवाद के सामने आते ही विभिन्न सामाजिक संगठनों और ब्राह्मण संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है। संगठनों का कहना है कि पंडित शब्द भारतीय संस्कृति में सम्मान का प्रतीक रहा है और इसे अवसरवादिता जैसे शब्द के साथ जोड़कर युवाओं के मन में गलत धारणा पैदा की जा रही है। विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है और कई जगहों पर भर्ती बोर्ड के खिलाफ ज्ञापन सौंपे गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस प्रश्न को तुरंत हटाया जाए और इसके लिए जिम्मेदार पैनल या विशेषज्ञों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। सामाजिक प्रतिनिधियों का मानना है कि सरकारी परीक्षाओं में इस तरह की चूक महज एक तकनीकी गलती नहीं हो सकती, बल्कि यह एक गहरी मानसिकता का परिचय देती है।
- भाषाई विशेषज्ञों का मत
हिंदी व्याकरण और शब्दकोश के जानकारों के अनुसार, 'पंडित' शब्द संस्कृत की 'पंडा' धातु से बना है जिसका अर्थ है बुद्धि या ज्ञान। 'पंडित' का अर्थ वह व्यक्ति है जो किसी विषय का पूर्ण ज्ञाता हो। इसे स्वार्थ या अवसर के लिए अपनी निष्ठा बदलने वाले 'अवसरवादी' के पर्याय के रूप में प्रयोग करना पूर्णतः अनुचित और भ्रामक है।
- सियासी रंग और समाजवादी पार्टी के पोस्टर
जैसे-जैसे यह मुद्दा सोशल मीडिया और जमीन पर फैलने लगा, विपक्षी दलों ने इसे हाथों-हाथ लिया। समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें दरोगा भर्ती के इस विवादित सवाल का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा गया है। इन पोस्टरों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि वर्तमान सत्ता में एक विशेष समाज का अपमान किया जा रहा है। विपक्षी दल इसे 'जातिगत अपमान' के मुद्दे के रूप में पेश कर रहे हैं, जिससे यह मामला अब एक प्रशासनिक गलती से बढ़कर विशुद्ध रूप से राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
- भर्ती बोर्ड की सफाई और जांच की मांग
विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर बोर्ड ने इसे एक मानवीय भूल या प्रश्न पत्र तैयार करने वाली एजेंसी की गलती के रूप में देखने का संकेत दिया है, लेकिन अभ्यर्थी इससे संतुष्ट नहीं हैं। छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता इस बात की जांच की मांग कर रहे हैं कि आखिर किस आधार पर विशेषज्ञों ने 'पंडित' शब्द को 'अवसरवादी' के विकल्प के रूप में चुना। परीक्षार्थियों का कहना है कि एक-एक अंक से भविष्य तय होता है, ऐसे में गलत और विवादित प्रश्नों का शामिल होना भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और गंभीरता पर सवालिया निशान लगाता है।
- धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर प्रहार
इस प्रकरण को लेकर प्रबुद्ध वर्ग का एक बड़ा हिस्सा यह तर्क दे रहा है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत में शब्दों के चयन का बहुत महत्व है। पंडित, पुरोहित या विद्वान जैसे शब्दों का प्रयोग समाज के मार्गदर्शक के रूप में किया जाता रहा है। जब राज्य की एक बड़ी परीक्षा में इस तरह के शब्दों का नकारात्मक चित्रण होता है, तो उसका प्रभाव केवल अंकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज की सामूहिक सोच को भी प्रभावित करता है। कई मठों और मंदिरों के पुजारियों ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की विकृति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका मानना है कि यह घटना पारंपरिक मूल्यों के प्रति अनादर को दर्शाती है।
- प्रशासनिक लापरवाही और परीक्षा प्रणाली
उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के साथ विवादों का जुड़ना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार का विवाद भावनात्मक और सामाजिक रूप से अधिक संवेदनशील है। जानकारों का कहना है कि प्रश्न पत्रों की स्क्रूटनी या समीक्षा करने वाली टीम ने अपना काम ठीक से नहीं किया। यदि परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र का भाषाई और सामाजिक ऑडिट किया गया होता, तो इस तरह के विवाद से बचा जा सकता था। वर्तमान स्थिति यह है कि प्रशासन अब डैमेज कंट्रोल में जुटा है, जबकि आक्रोशित वर्ग इसे एक बड़े आंदोलन में बदलने की चेतावनी दे रहा है। अभ्यर्थियों का एक वर्ग कोर्ट जाने की भी तैयारी कर रहा है ताकि इस विवादित प्रश्न के बदले उन्हें बोनस अंक मिल सकें या इसे रद्द किया जाए।
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