Lucknow : उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो रहा मानसून, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी 'श्री अन्न' की बुवाई और जल-संग्रहण की सलाह

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में लू चलने की आशंका है, जिसके बाद धूल भरी आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है।

By INA News Desk
Jun 25, 2026 - 23:47
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Lucknow : उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो रहा मानसून, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी 'श्री अन्न' की बुवाई और जल-संग्रहण की सलाह
Lucknow : उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो रहा मानसून, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी 'श्री अन्न' की बुवाई और जल-संग्रहण की सलाह

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के उप महानिदेशक डॉक्टर राजर्षि कुमार गौड़ की अगुवाई में क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की चौथी बैठक पूरी हुई। इस बैठक में राज्य के मौजूदा मौसम को देखते हुए किसानों के लिए आने वाले दो हफ्तों का कृषि प्रबंधन प्लान और जरूरी सुझाव जारी किए गए हैं। मौसम के अनुमानों और खरीफ फसलों की मौजूदा बुवाई की समीक्षा कर वैज्ञानिकों ने फसल बचाने की रणनीति तैयार की है।

मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक, आने वाले तीन-चार दिनों में उत्तर प्रदेश में मानसून के आगे बढ़ने और सक्रिय होने के आसार अच्छे हैं। पहले हफ्ते की शुरुआत में छिटपुट बारिश होगी, जिसके बाद तेजी आने की उम्मीद है, फिर भी औसत साप्ताहिक बारिश सामान्य से काफी कम रह सकती है। दूसरे हफ्ते में भी पूरे प्रदेश में पानी गिरने के बाद भी औसत बारिश सामान्य से कम रहने की बात कही गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में लू चलने की आशंका है, जिसके बाद धूल भरी आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ फसलों के तय लक्ष्य के मुकाबले अब तक बुवाई बहुत कम हो सकी है। कम बारिश की आशंका को देखते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की जगह कम पानी लेने वाली 'श्री अन्न' फसलों जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कोदों के साथ उर्द, मूंग और तिल को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

वैज्ञानिकों ने अरहर, मक्का और श्री अन्न की बुवाई कुंड व नाली विधि से करने को कहा है ताकि बारिश के पानी का सही इस्तेमाल हो सके। धान की नर्सरी में पानी जमा न होने देने और रोपाई वाले खेतों में ऊंची मेड़ बनाने की सलाह दी गई है ताकि जल-संग्रहण कर उसका इस्तेमाल सिंचाई में किया जा सके। खाली खेतों की मिट्टी पलट हल से गहरी जुताई करने को कहा गया है ताकि कीड़े और खरपतवार नष्ट हो जाएं। बागवानी करने वाले किसानों को आम की फसल को मक्खी से बचाने के लिए प्रति हेक्टेयर जाल लगाने और नीम के घोल का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। मत्स्य पालकों को तालाबों में पानी का स्तर ठीक रखने और पशुपालकों को पशुओं का मुफ्त टीकाकरण कराने की अपील की गई है। इसके साथ ही पर्यावरण को बचाने के लिए वन विभाग की तरफ से यूकेलिप्टस और पॉपलर को छोड़कर करोड़ों पौधों का मुफ्त वितरण किया जा रहा है। किसानों को मौसम की तुरंत जानकारी और आसमानी आपदाओं से सुरक्षा के लिए 'सचेत ऐप' डाउनलोड करने की सलाह दी गई है।

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