आगरा में थाने में हंगामा- महिला और पुलिसकर्मियों के बीच मारपीट का वीडियो वायरल, शांति भंग की कार्रवाई।

Agra: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ट्रांस यमुना थाने में एक महिला और पुलिसकर्मियों के बीच हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया

Aug 22, 2025 - 11:45
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आगरा में थाने में हंगामा- महिला और पुलिसकर्मियों के बीच मारपीट का वीडियो वायरल, शांति भंग की कार्रवाई।
आगरा में थाने में हंगामा- महिला और पुलिसकर्मियों के बीच मारपीट का वीडियो वायरल, शांति भंग की कार्रवाई।

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ट्रांस यमुना थाने में एक महिला और पुलिसकर्मियों के बीच हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना 20 अगस्त 2025 को हुई, जब एक महिला चोरी के एक पुराने मामले की जानकारी लेने थाने पहुंची थी। पुलिस का कहना है कि महिला ने थाना प्रभारी और एक महिला उपनिरीक्षक के साथ अभद्रता की और मारपीट शुरू कर दी। वहीं, महिला ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें थाने में पिटाई और कपड़े फाड़ने की बात शामिल है। इस घटना के बाद पुलिस ने महिला के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की है, जबकि वायरल वीडियो की जांच भी शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, यह घटना आगरा के ट्रांस यमुना थाने में हुई। पुलिस के मुताबिक, महिला ने सितंबर 2024 में चोरी का एक मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की जांच पूरी होने के बाद जनवरी 2025 में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट (एफआर) दाखिल कर केस बंद कर दिया था। महिला को जब इसकी जानकारी मिली, तो वह थाने पहुंची और फाइनल रिपोर्ट पर सवाल उठाने लगी। पुलिस का दावा है कि महिला ने थाना प्रभारी के साथ अभद्रता की और वहां मौजूद एक महिला उपनिरीक्षक के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि महिला गुस्से में एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बहस कर रही है और उसे धक्का दे रही है। इस दौरान अन्य पुलिसकर्मी उसे शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, महिला ने न केवल मारपीट की, बल्कि उसने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी किया। इस वीडियो में वह पुलिस पर छेड़छाड़, मारपीट और कपड़े फाड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही है। डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि महिला के आरोप निराधार हैं और उसने जानबूझकर पुलिस को बदनाम करने के लिए वीडियो वायरल किया। उन्होंने कहा कि महिला ने थाने में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की, जिसके चलते उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 151 (शांति भंग) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने यह भी कहा कि महिला के दावों की जांच की जा रही है और अगर जरूरत पड़ी तो उसके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

वहीं, महिला का कहना है कि पुलिस ने उसके साथ गलत व्यवहार किया। उसने दावा किया कि थाने में उसे बंद करके पीटा गया और उसके कपड़े फाड़े गए। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने चोरी के मामले का खुलासा नहीं किया और बिना उचित जांच के फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी। उसने कहा कि वह अपनी शिकायत को लेकर थाने गई थी, लेकिन पुलिस ने उसे अपमानित किया और मारपीट की। इस घटना के दो दिन बाद महिला ने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें वह रोते हुए अपनी आपबीती बता रही है। इस वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इस घटना ने आगरा में हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोग दो पक्षों में बंट गए हैं। कुछ लोग पुलिस के पक्ष में हैं और कह रहे हैं कि महिला ने जानबूझकर हंगामा किया और पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की। वहीं, कुछ लोग महिला के दावों का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पुलिस ने उसके साथ अन्याय किया। एक यूजर ने लिखा, "पुलिस को अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। अगर महिला के साथ गलत हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।" वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, "महिला ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की, जो गलत है। पुलिस को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाना ठीक नहीं।"

पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। डीसीपी सिटी ने कहा कि वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि महिला ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और मारपीट की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस ने महिला के साथ कोई बुरा व्यवहार नहीं किया और उसके कपड़े फाड़ने जैसे आरोप पूरी तरह झूठे हैं। पुलिस ने थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी जांच शुरू की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के समय क्या हुआ था। इसके अलावा, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या महिला ने जानबूझकर वीडियो बनाकर पुलिस की छवि खराब करने की साजिश रची। यह पहली बार नहीं है जब आगरा में इस तरह की घटना ने सुर्खियां बटोरी हैं। इससे पहले अगस्त 2024 में रकाबगंज थाने में एक महिला थाना प्रभारी और एक विजिलेंस इंस्पेक्टर की पिटाई का मामला सामने आया था। उस घटना में इंस्पेक्टर की पत्नी और उनके रिश्तेदारों ने थाने में हंगामा किया था, जिसके बाद कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। उस मामले में भी वीडियो वायरल हुआ था, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इस घटना ने पुलिस विभाग की छवि को भी प्रभावित किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि थानों में इस तरह की घटनाएं विश्वास को कमजोर करती हैं। कुछ लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "पुलिस को लोगों की मदद के लिए होना चाहिए, लेकिन अगर ऐसी घटनाएं होती हैं, तो लोग थाने जाने से डरने लगते हैं।"

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष न निकालें। डीसीपी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद सच सामने आ जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर महिला के दावों में कोई सच्चाई होगी, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पुलिस ने महिला को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है। यह मामला एक बार फिर पुलिस और जनता के बीच विश्वास के मुद्दे को सामने लाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा। साथ ही, लोगों को भी कानून का सम्मान करना चाहिए और थानों में हंगामा करने से बचना चाहिए। इस घटना ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया की ताकत कितनी बड़ी है, जो किसी भी घटना को कुछ ही घंटों में पूरे देश में चर्चा का विषय बना देता है। आगामी जांच के परिणाम इस मामले में निर्णायक होंगे। अगर महिला के आरोप सही पाए गए, तो यह पुलिस की कार्यशैली पर एक बड़ा सवाल होगा। वहीं, अगर पुलिस के दावे सही साबित हुए, तो यह एक बार फिर यह सवाल उठाएगा कि लोग पुलिस को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग क्यों कर रहे हैं।

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