Saharanpur : सहारनपुर के कैफे में निजी केबिनों पर सवाल, मिशन शक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई से उठे विवाद

स्थिति देखकर महिला थाना प्रभारी ने सदर बाजार थाने की पुलिस को सूचना दी। इसके बाद स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। मीडिया के पहुंचने पर पुलिस ने पत्रकारों को

By INA News Desk
Jan 16, 2026 - 23:04
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Saharanpur : सहारनपुर के कैफे में निजी केबिनों पर सवाल, मिशन शक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई से उठे विवाद
Saharanpur : सहारनपुर के कैफे में निजी केबिनों पर सवाल, मिशन शक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई से उठे विवाद
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सहारनपुर : मिशन शक्ति और एंटी रोमियो अभियान के तहत महिला थाना की टीम ने सदर बाजार क्षेत्र के ओजपुरा पुलिया स्थित दो कैफे—देसी पॉप कैफे एंड रेस्टोरेंट और न्यू कॉफी शॉप—पर जांच की। महिला पुलिस कर्मियों की टीम वहां पहुंची तो कैफे के अंदर छोटे-छोटे निजी केबिन देखकर हैरान रह गई। इन केबिनों में लड़के और लड़कियां बैठे थे, जिनमें युवा और कम उम्र के भी शामिल थे। केबिनों के आगे पर्दे लगे होने से माहौल पर संदेह हुआ।

स्थिति देखकर महिला थाना प्रभारी ने सदर बाजार थाने की पुलिस को सूचना दी। इसके बाद स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। मीडिया के पहुंचने पर पुलिस ने पत्रकारों को फोटो और वीडियो बनाने से रोका और उन्हें बाहर करने की कोशिश की। महिला थाना प्रभारी ने कहा कि टीम केवल मिशन शक्ति और एंटी रोमियो अभियान के तहत पम्फलेट बांटने आई थी। मौके पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और सदर बाजार थाने की गाड़ियां भी मौजूद रहीं। इंस्पेक्टर सतेंद्र नागर ने कहा कि जांच चल रही है और मीडिया से जांच में बाधा न डालने की अपील की। कुछ देर बाद पुलिस टीम वहां से चली गई। जांच के बारे में पूछने पर पुलिस ने बताया कि कैफे में मौजूद युवा केवल मोमो और चाउमीन खा रहे थे। किसी तरह की अश्लील स्थिति या बेड जैसी कोई गलत चीज नहीं मिली।

हालांकि स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि मुख्य सवाल यह है कि कैफे में ऐसे छोटे केबिन क्यों बनाए गए और उनके आगे पर्दे क्यों लगाए गए। सूत्रों के अनुसार इन कैफे में लड़के-लड़कियां, चाहे वे बालिग हों या कम उम्र के, 200 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से बैठने का शुल्क देते हैं, जबकि खाने-पीने का बिल अलग से लिया जाता है। शहर में ऐसे कई कैफे सालों से चल रहे हैं और पुलिस की नजर से दूर बने हुए हैं। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल उठे हैं कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों का पूरा पालन कर पा रही है। साथ ही कैफे संचालकों के पास फूड लाइसेंस, नगर निगम का लाइसेंस और फायर सेफ्टी का प्रमाण पत्र है या नहीं, यह भी जांच का विषय है। पत्रकारों ने देखा कि कैफे में कोई फायर सुरक्षा उपकरण नहीं दिखा और युवा पत्रकारों को देखकर अपना मुंह छिपाने लगे।

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