Sambhal : भारत सनातनियों का… भगवा के नीचे सबको झुकना पड़ेगा - कल्कि महोत्सव में कैलाशानंद गिरी का विवादित बयान

सम्भल में आयोजित कल्कि महोत्सव के दौरान निरंजनी अखाड़ा से जुड़े कैलाशानंद गिरी द्वारा दिए गए बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने म

By INA News Desk
Dec 4, 2025 - 22:24
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Sambhal : भारत सनातनियों का… भगवा के नीचे सबको झुकना पड़ेगा - कल्कि महोत्सव में कैलाशानंद गिरी का विवादित बयान
Sambhal : भारत सनातनियों का… भगवा के नीचे सबको झुकना पड़ेगा - कल्कि महोत्सव में कैलाशानंद गिरी का विवादित बयान

Report : उवैस दानिश, सम्भल

सम्भल में चल रहे कल्कि महोत्सव के दौरान अखाड़ा परंपरा से जुड़े एक संत के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। संबोधन के दौरान उन्होंने भारत को सनातनियों का देश बताते हुए कहा कि यहां राष्ट्रध्वज और भगवा के नीचे सबको झुकना पड़ेगा, जिसके बाद राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

सम्भल में आयोजित कल्कि महोत्सव के दौरान निरंजनी अखाड़ा से जुड़े कैलाशानंद गिरी द्वारा दिए गए बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने महोत्सव के आयोजन को ‘निर्भीकता पूर्ण’ बताते हुए कहा कि भगवान राम, कृष्ण और कल्कि के आगमन के समय विघ्नों का आना स्वाभाविक है और असुर प्रवृत्ति के लोग हमेशा बाधाएं उत्पन्न करते हैं। उन्होंने दावा किया कि महोत्सव और निर्माण कार्य कानूनी लड़ाई के बाद संभव हुआ है। उनका कहना था कि मामला कोर्ट में गया था और आचार्य प्रमोद कृष्णम कोर्ट से जीतकर आए हैं, तभी यह महोत्सव भव्य रूप से मनाया जा रहा है।सबसे विवादित टिप्पणी तब आई जब उन्होंने देश को सनातनियों का भारत बताते हुए कहा कि भारत सनातनियों का है और रहेगा… यहां राष्ट्रध्वज और भगवा के नीचे सबको झुकना पड़ेगा। जो झुकेगा वही यहां रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग कल्कि भगवान को स्वीकार करेंगे वही उनका संरक्षण पाएंगे। संत ने यह भी कहा कि देश में सनातन का समय और राम राज्य चल रहा है, इसलिए सभी लोगों को सरल, सहज बनकर सनातनी बनने का प्रयास करना चाहिए, और अगर कोई सनातन को स्वीकार नहीं करता तो कम से कम सनातन की जय-जयकार तो करे। इन बयानों को लेकर स्थानीय और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। धार्मिक भावनाओं से जुड़े ऐसे कथन और ‘झुकने’ जैसी टिप्पणी को लेकर इसे विवादित माना जा रहा है। कई लोग इसे समाज में वैमनस्य फैलाने वाला बयान बता रहे हैं।

बाइट - कैलाशानंद गिरि, पीठाधीश्वर निरंजन अखाड़ा

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