Sambhal : प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी हरगिज़ न करे - मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी ने हिमायूं कबीर के बयान से किया किनारा
मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि हिमायूं कबीर को पश्चिम बंगाल के मुसलमान गंभीरता से नहीं लेते और उनका समाज में कोई विशेष वजूद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमायूं कबीर जैसे लोग इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उन्हों
Report : उवैस दानिश, सम्भल
पश्चिम बंगाल में बकरीद और कुर्बानी को लेकर चल रही बहस के बीच मुफ़्ती ए सिरसी मुफ़्ती मौहम्मद आलम रज़ा नूरी ने पश्चिम बंगाल के हिमायूं कबीर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुस्लिम समाज को शासन-प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए और किसी भी प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी नहीं करनी चाहिए।
मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि हिमायूं कबीर को पश्चिम बंगाल के मुसलमान गंभीरता से नहीं लेते और उनका समाज में कोई विशेष वजूद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमायूं कबीर जैसे लोग इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम अमन और शांति का पैगाम देता है, इसलिए ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए जिससे समाज में तनाव फैले या कानून व्यवस्था प्रभावित हो।
मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि चाहे उत्तर प्रदेश हो या पश्चिम बंगाल, हर जगह लोग प्रशासन के निर्देशों का सम्मान करें और प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से पूरी तरह बचें। मुफ़्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि इस्लाम बदनाम हो या मुसलमान किसी परेशानी में पड़ें, ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। अमन-ओ-अमान बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
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