छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल में शिक्षक नहीं लिख पाए ‘Eleven’ और ‘Nineteen’ की स्पेलिंग, वायरल वीडियो ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में एक अंग्रेजी शिक्षक का वीडियो 27 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ...
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में एक अंग्रेजी शिक्षक का वीडियो 27 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वे ‘eleven’ (ग्यारह) और ‘nineteen’ (उन्नीस) जैसे सरल अंग्रेजी शब्दों की स्पेलिंग सही नहीं लिख पाए। वीडियो में शिक्षक ने ब्लैकबोर्ड पर ‘eleven’ की जगह ‘aivene’ और ‘nineteen’ की जगह ‘ninithin’ लिखा। हैरानी की बात यह है कि जब उनसे पूछा गया कि क्या यह स्पेलिंग सही है, तो उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, “हां, यही सही है।” यह वीडियो बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के घोड़ासोत गांव के प्राथमिक स्कूल का बताया जा रहा है। इस घटना ने छत्तीसगढ़ की सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोग सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि जब शिक्षक को ही बुनियादी अंग्रेजी नहीं आती, तो वे बच्चों को क्या सिखाएंगे?
यह वीडियो बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत मड़वा के अंतर्गत घोड़ासोत गांव के प्राथमिक स्कूल में रिकॉर्ड किया गया। बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक औचक निरीक्षण के दौरान बनाया गया, जिसमें एक जांच दल ने स्कूल का दौरा किया। इस दौरान अंग्रेजी शिक्षक से कुछ बुनियादी सवाल पूछे गए। उनसे ब्लैकबोर्ड पर ‘eleven’ (ग्यारह), ‘eighteen’ (अठारह), और ‘nineteen’ (उन्नीस) की स्पेलिंग लिखने को कहा गया। शिक्षक ने ‘eleven’ को ‘aivene’, ‘eighteen’ को गलत तरीके से, और ‘nineteen’ को ‘ninithin’ लिखा। जब उनसे पूछा गया कि क्या ये स्पेलिंग सही हैं, तो उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ हां कहा और गलत स्पेलिंग को बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।
इसके अलावा, शिक्षक से कुछ सामान्य ज्ञान के सवाल भी पूछे गए, जैसे भारत के प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, जिले के कलेक्टर, और पुलिस अधीक्षक (एसपी) का नाम। हैरानी की बात यह है कि शिक्षक इनमें से किसी भी सवाल का सही जवाब नहीं दे पाए। वीडियो में बच्चों को भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम पूछे गए, लेकिन वे भी जवाब नहीं दे सके। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसे अब तक 5 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
इस वीडियो को X पर @talk2anuradha नामक यूजर ने शेयर किया, जिन्होंने लिखा, “अगर किसी देश को बर्बाद करना हो, तो उसकी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दो। 70-80 हजार रुपये की सैलरी लेने वाला शिक्षक ‘eleven’ तक सही नहीं लिख पा रहा। यह शर्म की बात है।” इस पोस्ट को 4 लाख से ज्यादा व्यूज मिले, और कमेंट सेक्शन में लोगों ने शिक्षा व्यवस्था पर अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने लिखा, “ऐसे शिक्षकों को तुरंत नौकरी से निकाल देना चाहिए। ये बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ एक शिक्षक की गलती नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की नाकामी है।” कुछ लोगों ने इसे आरक्षण और सिफारिश से नौकरी मिलने का परिणाम बताया, जबकि अन्य ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग की।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शिक्षक पिछले पांच सालों से इस स्कूल में अंग्रेजी पढ़ा रहा है। वह नियमित सरकारी शिक्षक है और उसे 70,000 से 80,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है। यह जानकारी भी सामने आई कि शिक्षक ने अपनी गलती को स्वीकार नहीं किया और गलत स्पेलिंग को सही बताकर बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की। इस घटना ने यह सवाल उठाया कि क्या शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रिया में कोई कमी है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ऐसे शिक्षक सिफारिश या आरक्षण के आधार पर नौकरी पा लेते हैं, लेकिन उनकी योग्यता की जांच नहीं होती।
यह वीडियो छत्तीसगढ़ की सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाता है। घोड़ासोत गांव बलरामपुर जिले में है, जो एक ग्रामीण क्षेत्र है। यहां के स्कूलों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों की अपर्याप्त योग्यता, और नियमित निरीक्षण की कमी जैसी समस्याएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में ग्रामीण स्कूलों में अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है। इस वीडियो ने यह दिखाया कि जब शिक्षक ही बुनियादी ज्ञान में कमजोर हैं, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित हो सकता है?
छत्तीसगढ़ सरकार हर साल शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। 2024-25 के बजट में स्कूल शिक्षा के लिए 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया गया है। फिर भी, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा। यह घटना नीतियों और उनके कार्यान्वयन के बीच के अंतर को दर्शाती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक भर्ती में केवल डिग्री पर ध्यान देने के बजाय उनकी वास्तविक योग्यता और शिक्षण क्षमता की जांच होनी चाहिए।
- शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
इस वीडियो के वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया। बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने कहा कि इस घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। उन्होंने बताया कि शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन या बर्खास्तगी शामिल हो सकती है। साथ ही, विभाग ने स्कूलों में नियमित निरीक्षण और शिक्षक प्रशिक्षण को बढ़ाने का वादा किया है। हालांकि, अभी तक शिक्षक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
यह कोई पहला मामला नहीं है, जब किसी सरकारी स्कूल के शिक्षक की योग्यता पर सवाल उठे हों। मई 2025 में उत्तराखंड के नैनीताल जिले के एक सरकारी स्कूल में एक छात्र के लिए सात शिक्षक थे, लेकिन वह छात्र 10वीं की परीक्षा में फेल हो गया। इस घटना ने भी शिक्षा व्यवस्था की खामियों को सामने लाया था। इसी तरह, जनवरी 2025 में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में एक स्कूल के शिक्षक और शिक्षिका का आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद दोनों को निलंबित कर दिया गया। ये घटनाएं दिखाती हैं कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की योग्यता और व्यवहार की समस्याएं देशव्यापी हैं।
इस वीडियो ने अभिभावकों में चिंता पैदा की है। कई अभिभावकों ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से डरते हैं, क्योंकि वहां की शिक्षा की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं है। एक अभिभावक ने लिखा, “हम अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि वे पढ़-लिखकर कुछ बन सकें। लेकिन जब शिक्षक ही गलत पढ़ाएंगे, तो बच्चे क्या सीखेंगे?” कई लोगों ने मांग की कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता हो और उनकी नियमित जांच की जाए।
इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत को सामने लाया है। कुछ विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
शिक्षक भर्ती में सुधार: भर्ती प्रक्रिया में लिखित और मौखिक परीक्षा के साथ-साथ शिक्षण क्षमता की जांच होनी चाहिए।
नियमित प्रशिक्षण: शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाए ताकि उनकी जानकारी और शिक्षण कौशल को अपडेट रखा जाए।
औचक निरीक्षण: स्कूलों में नियमित औचक निरीक्षण किए जाएं ताकि शिक्षकों की कमियों का पता चल सके।
अभिभावक जागरूकता: अभिभावकों को अपने बच्चों की पढ़ाई पर नजर रखनी चाहिए और स्कूलों से जवाबदेही मांगनी चाहिए।
डिजिटल शिक्षा: ग्रामीण स्कूलों में डिजिटल शिक्षण सामग्री और ऑनलाइन कक्षाओं को बढ़ावा देना चाहिए।
यह वीडियो केवल एक शिक्षक की गलती को नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कमियों को दर्शाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में कमी के कारण अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना पसंद करते हैं। इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहा है। 2023-24 में छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नामांकन में 8% की कमी दर्ज की गई थी। यह घटना उस अविश्वास को और बढ़ा सकती है, जो अभिभावकों और समाज में सरकारी स्कूलों के प्रति है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना को शिक्षा व्यवस्था की नाकामी का प्रतीक बताया। एक यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ एक शिक्षक की बात नहीं है। यह पूरे सिस्टम की विफलता है। जब तक भर्ती और प्रशिक्षण में सुधार नहीं होगा, ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी।”
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के घोड़ासोत गांव के सरकारी स्कूल में एक शिक्षक द्वारा ‘eleven’ और ‘nineteen’ जैसे सरल शब्दों की गलत स्पेलिंग लिखने का वायरल वीडियो शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाता है। यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की योग्यता और प्रशिक्षण की कमी एक गंभीर समस्या है।
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