अब चीन पर कोई टैरिफ नहीं लगाएगा अमेरिका, समझौते की ओर बढ़ाया कदम, टैरिफ खतरे से बची दुनिया, ट्रंप-शी की बैठक तय
यह घोषणा मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन के साइडलाइन पर हुई बातचीत के बाद आई है। बेसेंट ने चीनी उप-प्रधानमंत्री ही लिफेंग के
अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को घोषणा की कि दोनों देशों ने एक व्यापक ढांचे पर सहमति बना ली है, जो नवंबर 1 से लगने वाले 100 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ को टाल देगा। यह समझौता दुर्लभ मिट्टी के खनिजों पर चीन के निर्यात नियंत्रण को स्थगित करने और अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने से जुड़ा है। बेसेंट ने एनबीसी न्यूज के मीट द प्रेस कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच यह समझौता अंतिम रूप लेगा। दोनों नेताओं की मुलाकात दक्षिण कोरिया में इस सप्ताहांत होने वाली है, जहां वे इस ढांचे को मंजूरी देंगे। बेसेंट के शब्दों में, यह समझौता दोनों देशों के बीच संतुलित व्यापार को बढ़ावा देगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा।
यह घोषणा मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन के साइडलाइन पर हुई बातचीत के बाद आई है। बेसेंट ने चीनी उप-प्रधानमंत्री ही लिफेंग के साथ दो दिनों तक गहन चर्चा की। उन्होंने सीएनबीसी को बताया कि ट्रंप की टैरिफ धमकी ने बातचीत में मजबूत स्थिति दी। वर्तमान में अमेरिका चीन से आयात पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है, जबकि चीन ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी उत्पादों पर 125 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया है। यह नया 100 प्रतिशत टैरिफ लगने से व्यापार युद्ध और भयानक हो जाता, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को चरमरा देता। लेकिन अब यह खतरा टल गया है। बेसेंट ने एबीसी के दिस वीक कार्यक्रम में कहा कि चीन दुर्लभ मिट्टी के निर्यात पर नियंत्रण लगाने से पीछे हटेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों के लिए जरूरी है। अमेरिका को इससे बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि चीन दुनिया के 80 प्रतिशत दुर्लभ मिट्टी का उत्पादन करता है।
समझौते के मुख्य बिंदु कई हैं। सबसे पहले, अमेरिकी सोयाबीन किसानों को फायदा होगा। बेसेंट ने कहा कि चीन अमेरिकी सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों की पर्याप्त खरीद करेगा, जो पिछले कुछ वर्षों में लगभग बंद हो गई थी। एक समय अमेरिका का 60 प्रतिशत सोयाबीन निर्यात चीन जाता था, लेकिन व्यापार युद्ध से यह गिरकर शून्य के करीब पहुंच गया। अब किसान आने वाले मौसमों के लिए आशावादी हैं। दूसरा, फेंटेनिल संकट पर सहयोग। बेसेंट ने सीबीएस के फेस द नेशन में बताया कि चीन फेंटेनिल के पूर्ववर्ती रसायनों के निर्यात को रोकने के लिए कदम उठाएगा। यह अमेरिका के ओपिऑयड संकट को कम करने में मददगारा साबित होगा, जहां हर साल हजारों मौतें होती हैं। तीसरा, टिकटॉक सौदा। बेसेंट ने कहा कि टिकटॉक के अमेरिकी ऑपरेशंस पर विवाद सुलझाने के लिए विवरण तय किए जा रहे हैं, जिसे ट्रंप और शी की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा। यह समझौता अमेरिकी डेटा सुरक्षा चिंताओं को दूर करेगा।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति ने यह सफलता हासिल की। बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति की 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी ने चीन को बातचीत की मेज पर ला दिया। पॉलिटिको के अनुसार, यह समझौता रणनीतिक अलगाव की दिशा में प्रगति है, जहां अमेरिका अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को चीन से हटाने का प्रयास कर रहा है। लेकिन अभी पूर्ण अलगाव संभव नहीं, इसलिए संतुलित सौदेबाजी जरूरी है। रॉयटर्स ने बताया कि टैरिफ ट्रूस को 10 नवंबर के बाद भी बढ़ाया जाएगा। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है कि यह प्रारंभिक सहमति दोनों पक्षों के हित में है। चीनी व्यापार प्रतिनिधि ली चेंगगांग ने कहा कि यह बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करेगा। हालांकि, कुछ विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं, जैसे टैरिफ में कितनी कमी होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका 145 प्रतिशत से नीचे 60 प्रतिशत तक टैरिफ कम करने पर विचार कर रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर सकारात्मक होगा। व्यापार युद्ध से 2018 से अब तक दोनों देशों को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। एक्सिओस के अनुसार, यह ढांचा व्यापार को संतुलित बनाने की दिशा में कदम है। अमेरिकी उपभोक्ताओं को सस्ते चीनी सामान मिलेंगे, जबकि चीनी निर्यातक अमेरिकी बाजार खोने से बचेंगे। भारत जैसे देशों को भी फायदा हो सकता है, क्योंकि आपूर्ति श्रृंखलाएं विविधीकृत होंगी। फॉर्च्यून पत्रिका ने बेसेंट के हवाले से कहा कि टैरिफ खतरा अब मेज से हट गया है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पूर्ण समझौता महीनों ले सकता है। द हिल न्यूज के अनुसार, ट्रंप एशिया यात्रा के दौरान कई सौदे करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चीन के साथ यह सबसे जटिल है।
बेसेंट की भूमिका सराहनीय रही। वे हेडge फंड मैनेजर से वित्त मंत्री बने हैं और व्यापार वार्ताओं में माहिर हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता अमेरिकी हितों की रक्षा करता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर बधाई दी और कहा कि अमेरिका फिर से महान बनेगा। चीन की ओर से भी सकारात्मक संकेत हैं। शी चिनफिंग ने कहा कि सहयोग से दोनों देश लाभान्वित होंगे। आने वाले दिनों में ट्रंप-शी की बैठक पर नजरें टिकी हैं। अगर यह सफल रही, तो वैश्विक बाजारों में उछाल आएगा। स्टॉक मार्केट पहले ही इस खबर पर चढ़ गए हैं।
यह समझौता अमेरिका-चीन संबंधों में नया अध्याय खोलेगा। पिछले वर्षों में तकनीक, व्यापार और सुरक्षा पर विवाद बढ़े थे। लेकिन अब संवाद की राह दिख रही है। बेसेंट ने कहा कि दोनों देशों के बीच समझौता आर्थिक स्थिरता लाएगा। उम्मीद है कि यह वैश्विक विकास को गति देगा।
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