चुनाव आयोग करेगा देशव्यापी SIR अभियान की घोषणा: कल शाम 4:15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, पहले चरण में 10-15 राज्य शामिल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग SIR की समयसीमा, प्रक्रिया और अपेक्षित परिणामों पर विस्तार से चर्चा करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण की शुरुआत नवंबर 2025 से हो सक

By INA News Desk
Oct 26, 2025 - 22:48
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चुनाव आयोग करेगा देशव्यापी SIR अभियान की घोषणा: कल शाम 4:15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, पहले चरण में 10-15 राज्य शामिल
चुनाव आयोग करेगा देशव्यापी SIR अभियान की घोषणा: कल शाम 4:15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, पहले चरण में 10-15 राज्य शामिल
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भारत निर्वाचन आयोग देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आयोग ने पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान की घोषणा करने का फैसला किया है। यह अभियान मतदाता सूचियों को साफ-सुथरा और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से चलाया जाएगा, ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों। आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इसकी विस्तृत रूपरेखा सोमवार 27 अक्टूबर 2025 को शाम 4:15 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताई जाएगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी इस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। यह घोषणा बिहार में हाल ही में सफलतापूर्वक चलाए गए SIR अभियान के अनुभव पर आधारित है, जहां लाखों फर्जी या पुरानी प्रविष्टियों को हटाकर नई सूची तैयार की गई।

SIR अभियान क्या है, यह समझना जरूरी है। विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची की गहन समीक्षा का एक तरीका है, जिसमें हर मतदाता के नाम, पता और अन्य विवरणों की जांच की जाती है। यह प्रक्रिया बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO के माध्यम से घर-घर जाकर की जाती है। आयोग का कहना है कि इससे फर्जी वोटरों, मृतकों के नाम या स्थानांतरित लोगों की प्रविष्टियां हटाई जा सकती हैं, साथ ही नए वयस्क मतदाताओं को जोड़ा जा सकता है। जून 2025 में बिहार के लिए SIR की घोषणा की गई थी, जो 24 जून से शुरू होकर 30 सितंबर को अंतिम सूची के प्रकाशन तक चली। बिहार में कुल 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए, जिसमें 3.92 करोड़ पुरुष, 3.50 करोड़ महिलाएं और 14 लाख पहली बार वोट डालने वाले युवा शामिल हैं। इस प्रक्रिया में 68.5 लाख नाम हटाए गए, जबकि 21.5 लाख नए नाम जोड़े गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि नाम हटाने से पहले हर व्यक्ति को नोटिस दिया जाता है और अपील का अवसर मिलता है।

देशव्यापी SIR की योजना लंबे समय से बनाई जा रही थी। 10 सितंबर 2025 को मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ पहली बैठक हुई, जहां सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी पिछली SIR की स्थिति पर प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद 21-23 अक्टूबर को नई दिल्ली में दूसरी बैठक आयोजित की गई, जहां आयोग ने सभी राज्यों की तैयारियों का जायजा लिया। इस बैठक में CEOs को निर्देश दिए गए कि वे वर्तमान मतदाताओं का पिछले SIR से मिलान करें। आयोग ने कहा कि यह अभियान चरणबद्ध तरीके से चलेगा, ताकि एक साथ पूरे देश पर बोझ न पड़े। पहले चरण में 10 से 15 राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे। इनमें विशेष रूप से वे राज्य प्राथमिकता में हैं, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। जैसे असम, तमिलनाडु, पुदुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल। इन राज्यों में चुनाव से पहले सूची को अपडेट करना जरूरी है, ताकि मतदाताओं का विश्वास बना रहे। दूसरे चरण में शेष राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कवर होंगे, खासकर जहां स्थानीय निकाय चुनाव हैं या सर्दी का मौसम चुनौती पैदा कर सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग SIR की समयसीमा, प्रक्रिया और अपेक्षित परिणामों पर विस्तार से चर्चा करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण की शुरुआत नवंबर 2025 से हो सकती है, लेकिन सटीक तारीख कॉन्फ्रेंस में ही बताई जाएगी। यह अभियान मतदाता सूची को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने का प्रयास है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि सभी राज्य अपनी वेबसाइटों पर पुरानी SIR की सूचियां अपलोड करें, ताकि तुलना आसान हो। बूथ लेवल पर 90,000 से अधिक BLO सक्रिय रहेंगे, जो घर-घर जाकर फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ने), फॉर्म 7 (नाम हटाने) और फॉर्म 8 (सुधार) भरवाएंगे। आयोग का दावा है कि इससे लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी और चुनावी धांधली रुकेगी।

बिहार के अनुभव से सबक लेते हुए आयोग ने कई सुधार किए हैं। बिहार में SIR के दौरान विपक्षी दलों ने विरोध किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे वोट चोरी का प्रयास बताया, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि यह कामकाजी वर्ग, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और महिलाओं को वोट से वंचित करने की साजिश है। लेकिन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में सफाई दी कि आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई है और कोई भी नाम बिना जांच हटाया नहीं गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि अपील का रास्ता खुला है। बिहार में 17 नई पहलें शुरू की गईं, जैसे वोटर इन्फॉर्मेशन स्लिप में रंगीन फोटो और बूथ नंबर बड़ा दिखाना। ये पहलें देशव्यापी SIR में भी लागू होंगी। आयोग ने जोर दिया कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष है और किसी दल के हित में नहीं। हर राजनीतिक दल का पंजीकरण आयोग से होता है, इसलिए पक्षपात असंभव है।

SIR अभियान से मतदाताओं को क्या फायदा होगा। सबसे पहले, सूची में दोहरी प्रविष्टियां हटेंगी, जिससे एक व्यक्ति के कई वोट डालने की संभावना समाप्त हो जाएगी। दूसरे, नए युवा मतदाता आसानी से जुड़ सकेंगे। भारत में हर साल 1.5 करोड़ नए वोटर जुड़ते हैं, लेकिन कई नाम छूट जाते हैं। तीसरा, महिलाओं और प्रवासी मजदूरों की भागीदारी बढ़ेगी। आयोग ने विशेष अभियान चलाने का वादा किया है, जैसे स्कूलों में जागरूकता कैंप। चौथा, डिजिटल प्लेटफॉर्म से नाम जोड़ना आसान होगा। वोटर हेल्पलाइन ऐप पर फॉर्म भर सकते हैं। लेकिन चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण इलाकों में BLO की कमी या मौसम की समस्या हो सकती है। विपक्ष का डर है कि यह प्रक्रिया चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल हो। लेकिन आयोग ने कहा कि समयसीमा सख्त होगी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया मिली-जुली है। भाजपा ने इसे स्वागतयोग्य बताया, जबकि विपक्ष ने सतर्कता बरतने को कहा। तमिलनाडु में DMK ने चेतावनी दी कि यह अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का प्रयास न बने। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि राज्य में पहले ही सूची अपडेटेड है। लेकिन आयोग ने सभी दलों से सहयोग की अपील की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दलों के साथ अलग बैठकें होंगी। यह अभियान 2026 के चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां पांच राज्यों में विधानसभा और कई जगह स्थानीय चुनाव हैं।

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