डीके शिवकुमार ने इस्तीफे की अफवाहों को सिरे से खारिज किया, कहा- राजनीतिक स्वास्थ्य पूरी तरह स्वस्थ।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने रविवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में इस्तीफे की अफवाहों को
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने रविवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में इस्तीफे की अफवाहों को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मानसिक, शारीरिक और राजनीतिक स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि वे कभी भी कांग्रेस को ब्लैकमेल करने के लिए इस्तीफे की धमकी नहीं देंगे। वे पार्टी के एक अनुशासित सिपाही हैं और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा अटल है। यह बयान कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और कैबिनेट फेरबदल की अटकलों के बीच आया है, जो पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि वे दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को कर्नाटक में 100 नई कांग्रेस कार्यालयों के शिलान्यास समारोह में आमंत्रित करने आए हैं। उन्होंने अपनी किताब 'गांधी भारत' के विमोचन की तारीख तय करने के लिए भी उच्च कमान से मुलाकात की है।
शिवकुमार ने कहा, मैंने इस पार्टी को दिन-रात मेहनत से मजबूत किया है। मैं इसे कभी धोखा नहीं दूंगा। इस्तीफा क्यों दूं? इसका कोई कारण ही नहीं है। वे 2028 में कांग्रेस की कर्नाटक में वापसी का भरोसा जताते हुए बोले कि पार्टी मजबूत होगी। अफवाहों को मीडिया की देन बताते हुए उन्होंने कहा कि वे कभी भी संगठन पर दबाव नहीं डालेंगे। यह बयान कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के दिल्ली दौरे के बाद आया, जहां उन्होंने राहुल गांधी से बिहार चुनावों पर चर्चा की थी। सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट फेरबदल पर कोई बात नहीं हुई। शिवकुमार ने भी कहा कि फेरबदल का फैसला मुख्यमंत्री का है, जो उच्च कमान से सलाह लेकर लेंगे। गृह मंत्री जी परमेश्वर ने भी कहा कि केवल कैबिनेट में बदलाव संभव है, नेतृत्व परिवर्तन नहीं।
कर्नाटक की राजनीति में यह अटकलें नवंबर से जोर पकड़ रही हैं। इसे 'नवंबर क्रांति' कहा जा रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था। शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री का पद मिला। कुछ नेताओं का दावा है कि सत्ता बंटवारे के 2.5 साल के फॉर्मूले के तहत नवंबर में नेतृत्व बदलना था। शिवकुमार के समर्थक इसकी मांग कर रहे हैं। लेकिन पार्टी उच्च कमान ने साफ कहा है कि सिद्धारमैया पूर्ण कार्यकाल पूरा करेंगे। शिवकुमार ने कई बार खुद को अनुशासित कार्यकर्ता बताया है। 6 नवंबर को उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी कहे तो सिद्धारमैया 5 या 10 साल और रह सकते हैं। 13 नवंबर को उन्होंने जोर दिया कि वे और सिद्धारमैया एक साथ काम कर रहे हैं। कोई जल्दबाजी नहीं है।
शिवकुमार का दिल्ली दौरा कई मुद्दों पर केंद्रित था। वे 100 नई कांग्रेस कार्यालयों के निर्माण के लिए भूमि तैयार कर चुके हैं। 75-80 जगहों पर जमीन चिह्नित है। परिवहन मंत्री रामलिंग रेड्डी के नेतृत्व में एक कार्यालय का निर्माण शुरू हो चुका है। यह पहल पार्टी को मजबूत बनाने के लिए है। शिवकुमार ने कहा कि वे उच्च कमान से 1 दिसंबर से पहले तारीख मांग रहे हैं, क्योंकि संसद सत्र शुरू हो जाएगा। इसके अलावा, उनकी किताब 'गांधी भारत' बेलगावी अधिवेशन के शताब्दी समारोह पर आधारित है। यह महात्मा गांधी के नेतृत्व वाली 1924 की कांग्रेस बैठक को दर्शाती है। विमोचन समारोह में राहुल गांधी और खड़गे मुख्य अतिथि होंगे। शिवकुमार ने कहा कि ये जिम्मेदारियां निभानी हैं, इसलिए इस्तीफा असंभव है।
कर्नाटक कांग्रेस में आंतरिक कलह की अफवाहें नई नहीं हैं। मई 2023 में सरकार बनने के बाद से सिद्धारमैया और शिवकुमार गुट की चर्चा होती रही। शिवकुमार को पीसीसी अध्यक्ष बनाया गया ताकि वे पार्टी संगठन संभालें। लेकिन मंत्री पद की होड़ और विधायकों की नाराजगी ने तनाव बढ़ाया। अक्टूबर में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हुईं। दो पद खाली हैं- वी नागेंद्र के इस्तीफे और केएन राजन्ना के बर्खास्तगी के बाद। शिवकुमार ने कहा कि पार्टी सर्वोत्तम फैसला लेगी। कोई जल्दबाजी नहीं। भाजपा ने इन अटकलों को हवा दी है। वे कहते हैं कि कांग्रेस में अस्थिरता है। लेकिन शिवकुमार ने पलटवार किया कि कर्नाटक विकास और सामाजिक न्याय में अग्रणी है। बिहार चुनाव परिणाम कर्नाटक को प्रभावित नहीं करेंगे।
शिवकुमार का राजनीतिक सफर लंबा है। वे कद्दाप्र से विधायक हैं। 1985 में पहली बार जीते। कई बार कैबिनेट मंत्री रहे। 2018 में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन गिरने के बाद भाजपा सरकार को गिराने में उनकी भूमिका थी। ऑपरेशन कमल उल्टा पड़ा। 2023 में कांग्रेस की जीत में उनका योगदान बड़ा था। वे वक्फ बोर्ड अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हाल में मुस्लिम आरक्षण पर भाजपा के आरोपों का उन्होंने खंडन किया था। कहा था कि अगर संविधान बदलने की बात साबित हो तो राजनीति छोड़ देंगे। लेकिन अफवाहें थम नहीं रही। सोशल मीडिया पर इस्तीफे की पोस्ट वायरल हो रही हैं। पीटीआई जैसे एजेंसियों ने वीडियो जारी किया, जिसमें शिवकुमार अनुशासित सिपाही कहते दिखे।
पार्टी के अन्य नेता भी एकजुट दिख रहे हैं। सिद्धारमैया ने कहा कि बिहार पर चर्चा हुई, कर्नाटक पर नहीं। परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि नेतृत्व स्थिर है। सतीश जरकीहोली जैसे मंत्रियों ने कहा कि फेरबदल में बदलाव संभव, लेकिन सीएम नहीं बदलेंगे। कांग्रेस का फोकस विकास पर है। बेंगलुरु में टनल रोड प्रोजेक्ट पर शिवकुमार ने भाजपा को चुनौती दी। कहा कि विपक्ष के नेतृत्व में कमिटी बना देंगे। वे लालबाग के पास साइट का निरीक्षण कर चुके हैं। यह प्रोजेक्ट ट्रैफिक कम करने के लिए है। भाजपा विरोध कर रही है।
यह घटना कर्नाटक राजनीति की गतिशीलता दिखाती है। कांग्रेस सत्ता में लौटी तो वादे निभा रही है। ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और किसान कल्याण योजनाएं चल रही हैं। लेकिन आंतरिक संतुलन बनाए रखना चुनौती है। शिवकुमार की बयानबाजी से लगता है कि वे लंबी दौड़ खेल रहे हैं। 2028 चुनाव में वापसी का दावा मजबूत इरादे दिखाता है। उच्च कमान राहुल गांधी के नेतृत्व में एकता पर जोर दे रही है। दिल्ली दौरे से साफ है कि केंद्रीय नेतृत्व स्थिरता चाहता है। अफवाहें फैलाने वालों को जवाब मिला है।
कर्नाटक सरकार दो साल पूरे कर रही है। उपलब्धियां हैं- बजट में वृद्धि, नौकरियां और बुनियादी ढांचा। लेकिन विपक्ष आक्रमक है। भाजपा महाराष्ट्र और हरियाणा की जीत के बाद आश्वस्त है। वे कर्नाटक में घोटालों के आरोप लगा रहे हैं। वाल्मीकि एसटी कॉर्पोरेशन मामले में जांच चल रही है। शिवकुमार ने कहा कि सब साफ हो जाएगा। वे पार्टी को मजबूत बनाने पर टिके हैं। 100 कार्यालयों का निर्माण इसका प्रमाण है। यह ग्रामीण स्तर पर संगठन को मजबूत करेगा।
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