UPSC रिजल्ट्स में रैंक 301 पर दो कैंडिडेट्स का दावा, रोल नंबर भी है सेम, बस इतना सा है फर्क, यूपी- बिहार की कैंडिडेट्स के बीच बढ़ी तनातनी
बिहार के आरा से आने वाली आकांक्षा सिंह का बैकग्राउंड काफी चर्चित रहा है, क्योंकि वह प्रतिबंधित संगठन रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती हैं। ब्रह्मेश्वर सिंह का नाम 1990 के दश
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के परिणामों की घोषणा के साथ ही एक अप्रत्याशित विवाद ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। इस परीक्षा में 301वीं रैंक को लेकर दो अलग-अलग राज्यों की दो महिला उम्मीदवारों ने दावा किया है, और दोनों का नाम आकांक्षा सिंह है। एक तरफ बिहार के आरा जिले से आने वाली आकांक्षा सिंह ने इस सफलता को अपनी मेहनत का नतीजा बताते हुए मीडिया के सामने अपनी खुशी जाहिर की, जबकि दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से संबंध रखने वाली आकांक्षा सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने दस्तावेज साझा कर यह साबित करने की कोशिश की कि यह रैंक असल में उनकी है। इस स्थिति ने न केवल उम्मीदवारों के बीच भ्रम पैदा किया है, बल्कि परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। परिणामों की घोषणा 6 मार्च 2026 को हुई थी, और उसके तुरंत बाद यह विवाद सामने आया, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। कई लोगों ने इस मामले में आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है, क्योंकि दोनों उम्मीदवारों के दावों में रोल नंबर और अन्य विवरणों में समानता बताई जा रही है। इस तरह की घटना परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को इंगित करती है, और इससे लाखों उम्मीदवारों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। परीक्षा में कुल 1016 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया था, लेकिन इस एक रैंक ने पूरे परिणाम को विवादास्पद बना दिया।
बिहार के आरा से आने वाली आकांक्षा सिंह का बैकग्राउंड काफी चर्चित रहा है, क्योंकि वह प्रतिबंधित संगठन रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती हैं। ब्रह्मेश्वर सिंह का नाम 1990 के दशक में बिहार के जातीय संघर्षों से जुड़ा रहा, और उनकी मौत 2012 में हुई थी। आकांक्षा ने दावा किया कि उन्होंने अपनी दूसरी कोशिश में यह परीक्षा पास की है, और रैंक 301 हासिल की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कैथोलिक हाई स्कूल, आरा से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, उसके बाद हरप्रसाद दास जैन कॉलेज से अंग्रेजी ऑनर्स में स्नातक किया, और फिर पटना में तैयारी की। उनके परिवार ने इस सफलता को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में मनाया, और स्थानीय स्तर पर बधाइयों का दौर शुरू हो गया। हालांकि, बाद में जब विवाद बढ़ा, तो उनके पिता ने कहा कि उनके पास कॉल लेटर का फाइल डिलीट हो गया था, जिससे सबूत पेश करने में मुश्किल हुई। इस दावे ने शुरू में काफी सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि यह एक विवादास्पद पृष्ठभूमि से आने वाली उम्मीदवार की सफलता की कहानी लग रही थी। लेकिन जैसे-जैसे जांच की मांग बढ़ी, वैसे-वैसे उनके दावे पर संदेह गहराता गया। कई लोगों ने इसे एक प्रेरणादायक कहानी माना, लेकिन अब यह विवाद की जड़ बन चुकी है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आने वाली आकांक्षा सिंह ने इस विवाद को और गहरा कर दिया, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने एडमिट कार्ड और इंटरव्यू कॉल लेटर साझा किए। इन दस्तावेजों में रोल नंबर 0856794 दिखाया गया है, जो आधिकारिक मेरिट लिस्ट में रैंक 301 के साथ मैच करता है। वह एक एमबीबीएस डॉक्टर हैं और वर्तमान में पटना के एम्स में काम कर रही हैं। उनके पिता का नाम रंजीत सिंह है, और उन्होंने दावा किया कि बिहार वाली आकांक्षा उनके नाम और पहचान का दुरुपयोग कर रही हैं। इस उम्मीदवार ने कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत से यह सफलता हासिल की है, और अब इस विवाद से उनकी उपलब्धि पर पानी फिर रहा है। उन्होंने आयोग से अपील की कि इस मामले की जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आए। उनके दस्तावेजों में क्यूआर कोड और अन्य विवरण स्पष्ट हैं, जो उनके दावे को मजबूत बनाते हैं। इस घटना ने दिखाया कि कैसे नाम की समानता से बड़ी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं, और परीक्षा प्रक्रिया में अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत है। कई विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे मामलों में आयोग को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
इस विवाद ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया है, जहां हजारों यूजर्स ने अपनी राय व्यक्त की। कई प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिसमें दोनों उम्मीदवारों की कहानियां साझा की जा रही हैं। कुछ लोगों ने बिहार वाली आकांक्षा के दावे को झूठा बताते हुए उनकी आलोचना की, जबकि अन्य ने सिस्टम की खामियों पर सवाल उठाए। एक पोस्ट में कहा गया कि दोनों उम्मीदवारों के रोल नंबर समान लग रहे हैं, जो असंभव है, और इससे धोखाधड़ी की आशंका बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, और लोग आयोग से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। इसने लाखों उम्मीदवारों को प्रभावित किया है, जो हर साल इस परीक्षा की तैयारी में जुटे रहते हैं। विवाद ने परीक्षा की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है, और कई पूर्व उम्मीदवारों ने अपने अनुभव साझा किए। कुल मिलाकर, यह घटना डिजिटल युग में जानकारी के प्रसार की गति को दर्शाती है, जहां एक छोटी सी भूल बड़ी समस्या बन सकती है।
संघ लोक सेवा आयोग ने अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों से पता चला है कि जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। आयोग की वेबसाइट पर परिणामों की लिस्ट उपलब्ध है, लेकिन नाम के साथ केवल रोल नंबर दिए गए हैं, जिससे नाम की समानता वाले मामलों में भ्रम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को ऐसे मामलों में अतिरिक्त विवरण जैसे जन्मतिथि या फोटो शामिल करने चाहिए। पिछले सालों में भी कुछ विवाद हुए हैं, लेकिन यह मामला अनोखा है क्योंकि दोनों दावेदारों के पास समान नाम और कथित रोल नंबर हैं। आयोग की भूमिका अब महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि इससे परीक्षा की साख प्रभावित हो रही है। कई संगठनों ने आयोग से अपील की है कि वह जल्द से जल्द स्पष्ट करे कि असली रैंक होल्डर कौन है। इस बीच, दोनों उम्मीदवारों के परिवार तनाव में हैं, और कानूनी कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
इस विवाद के संभावित कारणों में नाम की समानता के अलावा दस्तावेजों की जालसाजी या गलत जानकारी का प्रसार शामिल हो सकता है। बिहार वाली आकांक्षा के मामले में पता चला कि उन्होंने प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं किया था, जो उनके दावे को कमजोर बनाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे मामलों में मीडिया की भूमिका भी जांचनी चाहिए, क्योंकि शुरू में गलत जानकारी फैलाई गई। यह घटना परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की जरूरत को रेखांकित करती है, जैसे डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम को मजबूत बनाना। लाखों उम्मीदवार हर साल इस परीक्षा में भाग लेते हैं, और ऐसे विवाद उनके विश्वास को ठेस पहुंचाते हैं। जांच से साफ हो सकता है कि क्या कोई धोखाधड़ी हुई है, या यह महज संयोग है। कुल मिलाकर, यह मामला प्रशासनिक सेवाओं की चयन प्रक्रिया पर गहन चिंतन की मांग करता है।
इस विवाद के बाद कई अपडेट्स सामने आए हैं, जिसमें गाजीपुर वाली आकांक्षा ने अपना बयान जारी किया और कहा कि वह अपनी सफलता पर गर्व करती हैं, लेकिन इस भ्रम से दुखी हैं। उन्होंने मीडिया से अपील की कि सच्चाई का सम्मान करें। वहीं, बिहार वाली आकांक्षा के परिवार ने अब चुप्पी साध ली है, और जांच का इंतजार कर रहे हैं। देश भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, और कई राजनीतिक हलकों में भी इस पर चर्चा हो रही है।
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