'मैं जहां उंगली रखता, वहां वो साइन कर देते थे', आजम खान ने अखिलेश को मुलायम सिंह के दौर की याद दिलाई
आजम खान का राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी के साथ ही जुड़ा हुआ है। वे 1948 में स्वरकोट, रामपुर जिले में पैदा हुए। वकील बनने के बाद वे राजनीति में आए। 1980 में पहली बार विधायक बने। तब
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने जेल से रिहाई के बाद अपने पुराने साथी अखिलेश यादव को मुलायम सिंह यादव के दौर की याद दिलाई है। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह के समय में पार्टी का हर फैसला एकजुटता से लिया जाता था और उनकी उंगली की ओर इशारा भर से काम हो जाता था। आजम ने भावुक अंदाज में कहा कि न मेरी वफादारी में कमी थी, न मेरी मेहनत में। मैंने कभी सोने-चांदी या बंगला नहीं मांगा, बल्कि बच्चों के लिए कलम मांगी थी। यह बयान समाजवादी पार्टी के आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एकजुटता की अपील है। आजम की रिहाई के बाद यह पहला बड़ा बयान है, जो पार्टी को पुराने दिनों की याद दिला रहा है।
यह बयान 30 सितंबर 2025 को एक निजी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में आया। आजम खान को 23 महीने की जेल काटने के बाद 23 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली। वे सीतापुर जेल से बाहर आए। रिहाई के दो दिन बाद ही उन्होंने मीडिया से बात की। उन्होंने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा, मैं जहां उंगली रख देता था, मुलायम सिंह वहां साइन कर देते थे। यह याद मुलायम के नेतृत्व शैली को दर्शाती है, जब आजम खान को कैबिनेट मंत्री के रूप में कई विभाग सौंपे गए थे। आजम ने कहा कि मुलायम के समय में पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं थी। सब मिलकर काम करते थे। उन्होंने अखिलेश से अपील की कि वे भी वही एकजुटता दिखाएं। आजम ने कहा कि पार्टी के बुजुर्ग नेता अब थक चुके हैं, युवाओं को जिम्मेदारी सौंपें। लेकिन पुरानी वफादारों को भी सम्मान दें।
आजम खान का राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी के साथ ही जुड़ा हुआ है। वे 1948 में स्वरकोट, रामपुर जिले में पैदा हुए। वकील बनने के बाद वे राजनीति में आए। 1980 में पहली बार विधायक बने। तब से वे 10 बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। मुलायम सिंह यादव के साथ उनकी दोस्ती 1992 में समाजवादी पार्टी के गठन से शुरू हुई। आजम को पार्टी का सह-संस्थापक माना जाता है। मुलायम के तीन सरकारों में वे कैबिनेट मंत्री रहे। जेल, वक्फ, नगर विकास जैसे विभाग संभाले। रामपुर को उन्होंने विकास का मॉडल बनाया। कहा जाता है कि मुलायम के समय आजम की एक आवाज पर पूरा जिला चलता था। लेकिन 2012 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने, तो मतभेद शुरू हुए। आजम को अखिलेश ने कई बार नजरअंदाज किया। 2017 के चुनाव में आजम ने अखिलेश के फैसलों की आलोचना की। पार्टी में गुटबाजी बढ़ी। राम गोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव जैसे नेताओं से टकराव हुआ।
2022 में आजम को कई मुकदमों में फंसाया गया। रामपुर में दंगों का आरोप, जमीन हड़पने के केस, नोखा में बुलडोजर कार्रवाई। कुल 80 से ज्यादा मुकदमे चले। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये राजनीतिक प्रतिशोध हैं। लेकिन आजम जेल में रहे। उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम भी जेल गए। अब्दुल्ला को 2024 में जमानत मिली। आजम ने कहा कि जेल ने उन्हें मजबूत बनाया। उन्होंने अखिलेश को बताया कि मुलायम सिंह ने कभी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। जब आजम पर मुकदमे हुए, मुलायम ने दिल्ली जाकर मदद मांगी। आजम ने कहा कि अखिलेश को भी वही करना चाहिए था। लेकिन पार्टी ने उन्हें भुला दिया। रिहाई के बाद शिवपाल सिंह यादव ने आजम का स्वागत किया। इससे अटकलें लगीं कि आजम शिवपाल के खेमे में जा सकते हैं। लेकिन आजम ने साफ कहा कि मैं बिकने के लिए नहीं हूं। अखिलेश ही मेरे नेता हैं, जैसे मुलायम के लिए थे।
यह बयान पार्टी के आंतरिक कलह को दर्शाता है। समाजवादी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में 37 सीटें जीती। लेकिन विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एकजुटता जरूरी है। आजम का मुस्लिम वोट बैंक रामपुर-मुरादाबाद में मजबूत है। वे पांच प्रतिशत मुस्लिम वोटों को प्रभावित कर सकते हैं। अखिलेश ने आजम की रिहाई पर चुप्पी साधी। लेकिन पार्टी के अन्य नेता जैसे राम गोपाल यादव ने कहा कि आजम का स्वागत है। आजम ने कहा कि पार्टी में युवाओं का बोलबाला है, लेकिन अनुभव की कमी है। उन्होंने मुलायम के समय की मिसाल दी। कहा कि मुलायम ने कभी गुट नहीं बनाए। सबको साथ लिया। आजम ने अखिलेश से कहा कि वे पुराने साथियों को महत्व दें। अन्यथा वोट बैंक बिखर जाएगा। उन्होंने कहा कि मेरी कोई शिकायत नहीं, लेकिन पार्टी को मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है।
आजम की रिहाई पर राजनीतिक हलचल बढ़ गई। बसपा प्रमुख मायावती से उनकी पत्नी की मुलाकात की अफवाहें हैं। लेकिन आजम ने खारिज किया। कहा कि मैं बसपा नहीं जाऊंगा। समाजवादी पार्टी ही मेरा घर है। उन्होंने कहा कि जेल में उन्होंने मुलायम की डायरी पढ़ी। उसमें लिखा था कि वफादार साथी कभी नहीं छोड़ने। आजम ने भावुक होकर कहा कि मुलायम मेरे लिए पिता समान थे। उनकी यादें आज भी ताजा हैं। उन्होंने अखिलेश को सलाह दी कि वे मुलायम की विचारधारा अपनाएं। समाजवाद, पिछड़ों का उत्थान, मुस्लिम कल्याण। आजम ने कहा कि वर्तमान में पार्टी में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। युवा नेता सत्ता के लालच में हैं। पुराने कार्यकर्ता उपेक्षित हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम का रोल हमेशा विवादास्पद रहा। 2014 में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने मुलायम को अपशब्द कहा। लेकिन बाद में माफी मांगी। 2019 में लोकसभा चुनाव में आजम ने रामपुर से जीत हासिल की। लेकिन 2022 में उपचुनाव में हार गए। जेल जाने से उनका प्रभाव कम हुआ। लेकिन रिहाई के बाद वे फिर सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि अब वे रामपुर के विकास पर फोकस करेंगे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में काम करेंगे। आजम ने अखिलेश से कहा कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सभी को साथ लें। अन्यथा भाजपा फायदा उठाएगी। भाजपा ने आजम की रिहाई पर कहा कि वे अब थक चुके हैं। लेकिन आजम ने पलटवार किया कि भाजपा के मुकदमों ने मुझे मजबूत बनाया।
यह बयान समाजवादी पार्टी के लिए एक संदेश है। अखिलेश यादव ने 2024 में PDA फॉर्मूला अपनाया। पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक। आजम इसी का हिस्सा हैं। उनकी अपील से पार्टी में एकता आ सकती है। आजम ने कहा कि मुलायम के समय में हमने 2012 में बहुमत हासिल किया। अब वही दोहराएं। उन्होंने युवाओं से कहा कि अनुभव का लाभ लें। आजम की पत्नी तंजीन ने कहा कि आजम अब आराम करेंगे। लेकिन राजनीति नहीं छोड़ेंगे। परिवार ने कहा कि वे अखिलेश के प्रति वफादार हैं।
आजम का यह इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कई कार्यकर्ता उनकी तारीफ कर रहे हैं। कहा कि आजम ही पार्टी के पुराने स्तंभ हैं। अखिलेश को उनकी सलाह माननी चाहिए। विपक्ष ने कहा कि यह गुटबाजी का संकेत है। लेकिन आजम ने कहा कि यह परिवार का मामला है। बाहर से कुछ न लगे। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट 19 प्रतिशत हैं। आजम का प्रभाव रोहिलखंड में है। चुनाव से पहले उनकी वापसी पार्टी के लिए फायदेमंद है।
मुलायम सिंह यादव की यादें आज भी पार्टी को प्रेरित करती हैं। वे 1939 में सैफई में पैदा हुए। 2021 में उनका निधन हुआ। अखिलेश ने हमेशा कहा कि वे पिता की विरासत निभाएंगे। लेकिन आजम का बयान एक चेतावनी है। पार्टी को एकजुट रहना होगा। आजम ने कहा कि मैंने कभी पद की लालसा नहीं की। सेवा ही मेरा मकसद था। यह बयान भावनात्मक है। लेकिन राजनीतिक संदेश साफ है। समाजवादी पार्टी को पुराने दिनों की तरह मजबूत बनाना होगा। उम्मीद है कि अखिलेश इस अपील पर ध्यान देंगे। तभी पार्टी चुनाव में सफल होगी। आजम की रिहाई एक नया अध्याय शुरू कर रही है। बिहार चुनावों की तरह उत्तर प्रदेश में भी एकता जरूरी है।
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