Varanasi : काशी तमिल संगमम 4.0 के छठे दिन नमो घाट पर सांस्कृतिक संध्या, जोगिया गीत पर झूमे दर्शक

कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति ममता शर्मा और उनके दल की थी। लोक गायन से शुरुआत गंगा भजन से हुई, जिसके बोल थे चलो मन गंगा जमुना तीर। इसके बाद शिव भजन जेकर

Dec 8, 2025 - 00:43
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Varanasi : काशी तमिल संगमम 4.0 के छठे दिन नमो घाट पर सांस्कृतिक संध्या, जोगिया गीत पर झूमे दर्शक
Varanasi : काशी तमिल संगमम 4.0 के छठे दिन नमो घाट पर सांस्कृतिक संध्या, जोगिया गीत पर झूमे दर्शक

वाराणसी। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र तंजावूर के सहयोग से संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 के छठे दिन नमो घाट के खुले प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। तमिलनाडु और काशी के कलाकारों ने विविध प्रस्तुतियां दीं। यह आयोजन काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास है।

कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति ममता शर्मा और उनके दल की थी। लोक गायन से शुरुआत गंगा भजन से हुई, जिसके बोल थे चलो मन गंगा जमुना तीर। इसके बाद शिव भजन जेकर नाथ विश्वनाथ उ अनाथ कैसे... प्रस्तुत किया। फिर डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया गीत पर दर्शक झूम उठे। तबला पर संगीत कुमार और आर्गन पर दिलीप कुमार ने साथ दिया।दूसरी प्रस्तुति डॉ. शिवानी शुक्ला और दल की भजन गायन की रही। एकताल में निबद्ध रचना आदि देव महादेव... से आरंभ हुआ। फिर अवगुन चित न धरो... भजन गाया गया। समापन कर मनवा राम रघुराई... से किया। तबला पर अंकित कुमार सिंह, वायलिन पर सुखदेव मिश्रा और साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव ने संगत की। तीसरी प्रस्तुति गीतांजलि और तमिलनाडु दल के लोक नृत्य की थी। इसमें करकट्टम, मईलाट्टम और पोईक्कल कुटीरई अट्टम नृत्य दिखाए गए।

चौथी प्रस्तुति शुभांगी सिंह और दल की भरतनाट्यम नृत्य नाटिका पर आधारित थी। रामायण के जटायु मोक्ष प्रसंग को चित्रित किया। कलाकार थे शुभांगी सिंह, वागीशा सिंह, जयरसा यशोमिया और आरती कंदु।

पांचवीं प्रस्तुति सुनिधि पाठक और दल के कथक नृत्य की रही। मंगलाचरण शिव वंदना से शुरुआत हुई। फिर शुद्ध कथक ताराना प्रस्तुत किया। समापन सूफियाना रचनाओं से रुकसार परंपरा के माध्यम से हुआ। कलाकार थे सुषमा भारती, प्रिया दुबे, विशाल सिंह और अशुतोष सिंह। छठी और अंतिम प्रस्तुति गीतांजलि और तमिलनाडु दल के लोक नृत्य की थी। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। दर्शकों ने सभी प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

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