82 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने तोड़ा उम्र का बंधन: ऋषिकेश में 83 मीटर ऊंची बंजी जंप से रचा नया इतिहास
इस महिला का कारनामा अन्य बुजुर्गों को भी प्रेरित कर रहा है। याद कीजिए, 2023 में 70 वर्षीय एक व्यक्ति ने एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पूरा किया था। या फिर 75 वर्षीय
उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ऋषिकेश में एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल साहसिक खेलों की दुनिया को चौंका दिया, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि उम्र महज एक संख्या है। यहां शिवपुरी इलाके में स्थित जंपिन हाइट्स पर 82 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला ने भारत की सबसे ऊंची बंजी जंप पूरी कर ली। यह जंप 83 मीटर की ऊंचाई से की गई, जो गंगा नदी के ऊपर लटकी हुई प्लेटफॉर्म से शुरू होती है। सामान्यतः इस उम्र में लोग चाय की चुस्की लेते हुए पुरानी यादें ताजा करते हैं, लेकिन इस महिला ने साहस की मिसाल कायम कर दी। उनका यह कारनामा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लाखों लोगों को प्रेरित कर रहा है।
यह घटना 19 अक्टूबर 2025 को घटी। जंपिन हाइट्स एडवेंचर स्पोर्ट्स कंपनी के प्लेटफॉर्म पर महिला को हार्नेस से बांधा गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह जंप से पहले उत्साह से नाच रही थीं। उनके हाथ हवा में लहरा रहे थे, मानो वे कोई बैले डांसर हों। कैमरे की ओर देखे बिना ही वे खुशी से भरी हुईं प्लेटफॉर्म से कूद पड़ीं। नीचे गंगा की धारा चमक रही थी, लेकिन उनके चेहरे पर न तो डर था और न ही हिचकिचाहट। जंप के बाद जब वे ऊपर लौटीं, तो स्टाफ ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। यह वीडियो इंस्टाग्राम पेज ग्लोबसम इंडिया ने शेयर किया, जिसके कैप्शन में लिखा था, "82 वर्षीय महिला बंजी जंपिंग। भारत की सबसे ऊंची बंजी जंपिंग, शिवपुरी, ऋषिकेश।" मात्र कुछ घंटों में इस वीडियो को 20 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं।
ऋषिकेश को भारत का एडवेंचर कैपिटल कहा जाता है। यहां हर साल हजारों पर्यटक राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और बंजी जंपिंग के लिए आते हैं। जंपिन हाइट्स 2011 से यहां सक्रिय है और इसकी बंजी साइट को दुनिया की सबसे सुरक्षित माना जाता है। कंपनी के अनुसार, वे न्यूजीलैंड के विशेषज्ञों से प्रशिक्षित हैं और हर जंप से पहले मेडिकल चेकअप अनिवार्य करते हैं। लेकिन 82 वर्ष की उम्र में यह जंप करना वाकई असाधारण है। सामान्यतः बंजी जंप के लिए उम्र सीमा 12 से 45 वर्ष रखी जाती है, लेकिन विशेष मामलों में फिटनेस के आधार पर छूट दी जाती है। इस महिला ने अपनी फिटनेस से सभी को हैरान कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी उम्र में हृदय और हड्डियों की मजबूती जरूरी होती है, और शायद उन्होंने योग और स्वस्थ जीवनशैली अपनाई होगी।
वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तारीफों की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने लिखा, "उन्हें उड़ने दो। देखिए कितनी सुंदरता से वे हाथ लहरा रही हैं, मानो हवा में बैले नाच रही हों।" दूसरे ने कहा, "वे इतनी स्वतंत्र थीं कि कैमरे की परवाह ही नहीं की। यह जीवन का असली मजा है।" कई लोगों ने इसे उम्र के भेदभाव को तोड़ने वाली मिसाल बताया। एक कमेंट में लिखा, "यह साबित करता है कि साहस की कोई उम्र नहीं। हमें भी अपने सपनों को पूरा करना चाहिए।" परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिली, लेकिन माना जा रहा है कि वे उनके साथ थे और उन्हें प्रोत्साहित किया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह जंप उनके पोते या परिजनों के साथ की गई यात्रा का हिस्सा था।
इस घटना ने कई सवाल भी खड़े किए। क्या बुजुर्गों के लिए एडवेंचर स्पोर्ट्स सुरक्षित हैं? जंपिन हाइट्स के मालिक ने बताया कि वे हर प्रतिभागी की उम्र और स्वास्थ्य जांचते हैं। पिछले वर्षों में यहां 10 लाख से ज्यादा जंप हो चुके हैं, बिना किसी बड़ी दुर्घटना के। लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बुजुर्गों को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। भारत में बंजी जंपिंग की लोकप्रियता बढ़ रही है, खासकर युवाओं में। ऋषिकेश के अलावा नैनीताल और गोवा में भी ऐसी साइट्स हैं। लेकिन शिवपुरी की यह साइट सबसे ऊंची है, जहां से कूदने पर लगभग 5-6 सेकंड फ्री फॉल होता है। यह अनुभव दिल की धड़कनें तेज कर देता है, लेकिन खत्म होने पर एक अजीब सी मुक्ति मिलती है।
इस महिला का कारनामा अन्य बुजुर्गों को भी प्रेरित कर रहा है। याद कीजिए, 2023 में 70 वर्षीय एक व्यक्ति ने एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पूरा किया था। या फिर 75 वर्षीय महिला ने स्काईडाइविंग की। ये कहानियां बताती हैं कि स्वास्थ्य और इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं। सरकार भी अब वरिष्ठ नागरिकों के लिए एडवेंचर प्रोग्राम चला रही है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने इस घटना का स्वागत किया और कहा कि यह राज्य की साहसिक छवि को मजबूत करता है। विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "ऐसे उदाहरण पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। हम बुजुर्गों के लिए विशेष पैकेज सोच रहे हैं।"
बंजी जंपिंग का इतिहास भी रोचक है। यह वनुआतु द्वीप के रिवाज से शुरू हुआ, जहां युवतियां ऊंचाई से कूदकर अपनी बहादुरी साबित करती थीं। 1980 के दशक में न्यूजीलैंड में इसे आधुनिक रूप दिया गया। भारत में 2007 में गोवा में पहली बार शुरू हुई। आज यह युवाओं का पसंदीदा खेल है, लेकिन इस महिला ने दिखा दिया कि यह सबके लिए है। वीडियो में उनकी मुस्कान देखकर लगता है कि वे जीवन के हर पल को जी रही थीं। शायद यही जीवन का सार है - डर को जीतना और खुशी से भर जाना।
View this post on Instagram
Also Click : Hardoi : घरेलू कलह में अधेड़ ने लगाई फांसी, मौत, अर्धनग्न अवस्था में मिला शव
What's Your Reaction?









