बुलंदशहर में दरोगा की 'फिल्मी' वीडियो रिकॉर्डिंग वायरल, एसपी ने अनुभवहीनता का ठहराया दोष, विभागीय जांच शुरू
वीडियो में उपनिरीक्षक को सीन सेट करते देखा जा सकता है। वे कांस्टेबलों को निर्देश दे रहे हैं कि कैमरा कैसे रखें, महिला से क्या बोलना है और पति को कैसे पोज देना है। एक
बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक उपनिरीक्षक की वीडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, जिसमें वे एक घरेलू विवाद सुलझाते हुए फिल्म डायरेक्टर की तरह व्यवहार करते नजर आ रहे हैं। यह घटना 20 नवंबर 2025 को सिकंदराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में घटी, जब एक महिला ने अपने पति पर घरेलू हिंसा और तमंचे से जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया। उपनिरीक्षक रामवीर खेनवार मौके पर पहुंचे और मामले को सुलझाने के दौरान वीडियो बनवाया, जो बाद में 'बिहाइंड द सीन' जैसा लगने लगा। वीडियो में दरोगा निर्देश देते दिख रहे हैं, जिससे लोगों ने इसे मजाक उड़ाया और पुलिस की छवि पर सवाल उठे। जिला एसएसपी डॉ. मनोज कुमार ने वीडियो को देखते हुए कहा कि उपनिरीक्षक की अनुभवहीनता के कारण कुछ गलतियां हुईं, जिसके लिए विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो जांच के प्रमाण के रूप में बनाया गया था, लेकिन प्रक्रिया में चूक हुई।
घटना की शुरुआत तब हुई जब सिकंदराबाद थाने में एक 32 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि उसका पति, जो एक स्थानीय किसान है, अक्सर नशे में घर आता है और मारपीट करता है। हाल ही में उसने एक अवैध तमंचा निकालकर धमकी दी कि वह उसे मार डालेगा। महिला ने डर के मारे थाने पहुंचकर मदद मांगी। ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक रामवीर खेनवार ने तुरंत एक टीम बनाई और महिला के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। वहां पति को हिरासत में लिया गया और तलाशी में उसके पास से एक देशी तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस ने तमंचे को जब्त कर एफआईआर दर्ज की, जिसमें आर्म्स एक्ट और घरेलू हिंसा अधिनियम की धाराएं लगाई गईं। लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब खेनवार ने पूरे प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड करने का आदेश दिया।
वीडियो में उपनिरीक्षक को सीन सेट करते देखा जा सकता है। वे कांस्टेबलों को निर्देश दे रहे हैं कि कैमरा कैसे रखें, महिला से क्या बोलना है और पति को कैसे पोज देना है। एक हिस्से में वे कहते हैं, "कैमरा यहां रखो, लाइट ठीक करो, अब बोलो कि धमकी दी।" यह दृश्य किसी फिल्म की शूटिंग जैसा लग रहा है, जहां डायरेक्टर कलाकारों को गाइड कर रहा हो। वीडियो में पति कोने में खड़ा है, हाथ बंधे हुए, और महिला रोते हुए बयान दे रही है। कांस्टेबल फोन से रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड होते ही हंसी-मजाक के मीम्स बनने लगे। लोग कमेंट कर रहे हैं कि "दरोगा साहब को बॉलीवुड में होना चाहिए था" या "यह केस सुलझाना नहीं, शॉर्ट फिल्म बना रहे हैं।" वायरल होने के कुछ घंटों में ही लाखों व्यूज हो गए। बुलंदशहर पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एसपी ने बाइट जारी की, जिसमें उन्होंने कहा कि वीडियो जांच के लिए बनाया गया था, लेकिन तरीका गलत रहा।
एसएसपी डॉ. मनोज कुमार ने 22 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि उप निरीक्षक रामवीर खेनवार नए-नए हैं और उन्हें प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है। वीडियो रिकॉर्डिंग पुलिस मैनुअल के अनुसार सही है, क्योंकि अवैध हथियार बरामदगी के मामलों में प्रमाण संरक्षण जरूरी होता है। लेकिन निर्देश देने का अंदाज अनुचित था, जो पेशेवर नहीं लग रहा। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि यह फिल्मी हरकत नहीं थी, बल्कि अनुभव की कमी से हुई भूल। उन्होंने तुरंत अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण डॉ. तेजवीर सिंह को जांच सौंप दी। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या वीडियो में कोई कानूनी चूक हुई या नहीं। अगर दोषी पाए गए, तो सख्त कार्रवाई होगी। एसएसपी ने कहा, "हमारी पुलिस जनसेवा के लिए है, न कि मनोरंजन के लिए। ऐसी गलतियां दोहराई नहीं जाएंगी।" पुलिस ने वीडियो को अपने हैंडल पर शेयर करते हुए स्पष्टीकरण दिया।
उप निरीक्षक रामवीर खेनवार 2018 बैच के हैं और सिकंदराबाद थाने में पिछले छह महीने से तैनात हैं। वे मूल रूप से बुलंदशहर के ही रहने वाले हैं। सहकर्मियों के अनुसार, वे मेहनती हैं लेकिन कभी-कभी ओवर एक्टिव हो जाते हैं। इस घटना के बाद उन्हें लाइन अटैचमेंट पर भेज दिया गया है। खेनवार ने खुद एक बयान जारी कर कहा कि उनका इरादा केवल सही तरीके से केस दर्ज करना था। वीडियो में जो दिख रहा है, वह निर्देश नहीं बल्कि समझाना था। लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हो रही है। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने ट्वीट किया कि पुलिस को ट्रेनिंग में वीडियो प्रोटोकॉल सिखाना चाहिए, ताकि ऐसी भूलें न हों। महिला और उसके पति का बयान लिया गया है। महिला ने कहा कि पुलिस ने सही समय पर मदद की, लेकिन वीडियो का तरीका अजीब लगा। पति को जेल भेज दिया गया है और तमंचे की फॉरेंसिक जांच चल रही है।
यह वीडियो वायरल होने से उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि पर असर पड़ा है। सीएम योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के बावजूद सोशल मीडिया पर पुलिस की कारगुजारियां चर्चा में रहती हैं। बुलंदशहर पहले भी पुलिस विवादों में रहा है। जून 2025 में एक दुकानदार को पीटने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एसआई देवेंद्र शुक्ला को लाइन ड्यूटी पर भेजा गया। अब यह नया मामला जुड़ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो रिकॉर्डिंग अच्छी प्रथा है, लेकिन इसे पेशेवर तरीके से करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई फैसलों में कहा है कि पुलिस कार्रवाई का वीडियो प्रमाण के रूप में जरूरी है। लेकिन अगर यह सर्कस जैसा लगे, तो जनता का विश्वास डगमगाता है। बुलंदशहर के एसएसपी ने सभी थानों को निर्देश दिए हैं कि वीडियो रिकॉर्डिंग में सीन सेट न करें, सीधे रिकॉर्ड करें।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोग हंस रहे हैं और कह रहे हैं कि दरोगा का टैलेंट बर्बाद हो रहा है। एक यूजर ने लिखा, "राम गोपाल वर्मा को देखा है, लेकिन यह तो रामवीर गोपाल खेनवार लग रहे हैं।" वहीं, महिलाओं के संगठनों ने सराहना की कि पुलिस ने घरेलू हिंसा के मामले में तुरंत कार्रवाई की। एक एनजीओ ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी शिकायतें आम हैं, और पुलिस की सक्रियता जरूरी है। लेकिन वीडियो का ड्रामा नुकसानदेह है। पुलिस विभाग ने ट्रेनिंग सेशन शुरू करने का ऐलान किया है, जहां वीडियो प्रोटोकॉल सिखाया जाएगा। एसएसपी ने कहा कि जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में आएगी। अगर निर्दोष पाए गए, तो खेनवार को बहाल किया जा सकता है।
यह घटना घरेलू हिंसा के मुद्दे को भी उजागर करती है। उत्तर प्रदेश में हर साल हजारों महिलाएं ऐसी शिकायतें करती हैं। बुलंदशहर जैसे जिलों में नशा और आर्थिक तनाव से विवाद बढ़ते हैं। महिला ने बताया कि पति पर कर्ज का बोझ था, जिससे गुस्सा निकालता था। पुलिस ने मामले को कोर्ट भेज दिया है। वकीलों का कहना है कि तमंचा बरामदगी से सजा हो सकती है। लेकिन वीडियो विवाद ने मुख्य मुद्दे को पीछे धकेल दिया। सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स ने कहा कि पुलिस को अपनी छवि सुधारनी चाहिए। वायरल वीडियो से सीख लेनी चाहिए।
बुलंदशहर पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा कि वे जनता की सेवा के प्रति प्रतिबद्ध हैं। एसएसपी ने सभी अधिकारियों को मीटिंग बुलाई और कहा कि प्रोफेशनलिज्म बनाए रखें। यह घटना एक सबक है। उप निरीक्षक खेनवार के परिवार ने कहा कि वे निर्दोष हैं, बस गलती हो गई। लेकिन जनता का गुस्सा शांत नहीं हो रहा। मीम्स बनते जा रहे हैं। पुलिस ने वीडियो डिलीट करने की अपील की, लेकिन इंटरनेट पर कहीं नहीं जाता। यह मामला पुलिस सुधारों पर बहस छेड़ रहा है। क्या ट्रेनिंग काफी है या सख्ती जरूरी। समय बताएगा। फिलहाल, जांच चल रही है और केस सुलझ चुका है। महिला अब सुरक्षित है।
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