टीएमसी के दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष, 3 पुलिसकर्मी और 2 केंद्रीय जवान घायल, गोलीबारी और बमबाजी से दहला इलाका।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का संवेदनशील इलाका संदेशखाली एक बार फिर हिंसा और बमबाजी की गूंज से दहल उठा

May 6, 2026 - 14:04
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टीएमसी के दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष, 3 पुलिसकर्मी और 2 केंद्रीय जवान घायल, गोलीबारी और बमबाजी से दहला इलाका।
टीएमसी के दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष, 3 पुलिसकर्मी और 2 केंद्रीय जवान घायल, गोलीबारी और बमबाजी से दहला इलाका।
  • सुरक्षाबलों पर उपद्रवियों का हमला, 3 पुलिसकर्मी और 2 केंद्रीय जवान घायल, इलाके में भारी तनाव
  • वर्चस्व की लड़ाई में चली गोलियां और फेंके गए देसी बम, संदेशखाली में सुरक्षाबलों का बढ़ा पहरा

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का संवेदनशील इलाका संदेशखाली एक बार फिर हिंसा और बमबाजी की गूंज से दहल उठा है। बुधवार की सुबह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ही दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। इस हिंसक झड़प के दौरान न केवल लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया गया, बल्कि खुलेआम गोलीबारी और देसी बमों का भी प्रयोग हुआ। इस अराजक स्थिति को नियंत्रित करने पहुंचे सुरक्षाबलों पर भी उपद्रवियों ने हमला बोल दिया, जिसमें तीन पुलिसकर्मी और केंद्रीय सुरक्षा बल के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है और चप्पे-चप्पे पर सशस्त्र बलों की तैनाती कर दी गई है। उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली ब्लॉक-2 के अंतर्गत आने वाले इलाकों में बुधवार तड़के वर्चस्व को लेकर सत्ताधारी दल के दो गुट आपस में भिड़ गए। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ लंबे समय से चली आ रही आपसी रंजिश और इलाके में राजनीतिक प्रभाव जमाने की होड़ थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे से ही दोनों तरफ से समर्थकों का जमावड़ा शुरू हो गया था, जो देखते ही देखते हिंसक टकराव में बदल गया। उपद्रवियों ने एक-दूसरे पर न केवल पत्थर बरसाए, बल्कि देसी बमों का भी जमकर इस्तेमाल किया। धमाकों की आवाज से पूरा गांव दहल उठा और लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में दुबक गए। इस दौरान हुई गोलीबारी ने स्थिति को और भी भयावह बना दिया, जिससे इलाके में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

हिंसा की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और पास ही तैनात केंद्रीय सुरक्षा बल की टुकड़ी मौके पर पहुंची। जैसे ही सुरक्षाकर्मियों ने उपद्रवियों को खदेड़ने और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया, भीड़ ने उन पर भी हमला कर दिया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए पथराव किया और कुछ ही दूरी से उन पर बम फेंके। इस हमले में राज्य पुलिस के तीन कांस्टेबल और केंद्रीय बल के दो जवान बुरी तरह घायल हो गए। घायलों को तुरंत पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। सुरक्षाबलों पर हुए इस सीधे हमले ने जिला प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं और इसे एक सोची-समझी साजिश के रूप में देखा जा रहा है। घटनास्थल पर तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में विस्फोटक और अवैध हथियार बरामद हुए हैं। पुलिस ने खेत के किनारों और खाली पड़े मकानों से दर्जनों जिंदा देसी बम बरामद किए हैं, जिन्हें निष्क्रिय करने के लिए बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया। इसके अलावा, मौके से कारतूसों के खोखे और धारदार हथियार भी मिले हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि झड़प की योजना काफी पहले से बनाई गई थी। पुलिस ने अब तक इस मामले में करीब 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इलाके में हथियारों का यह जखीरा किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसकी गहराई से जांच की आवश्यकता है।

संदेशखाली का पुराना हिंसात्मक इतिहास

संदेशखाली और उसके आसपास के इलाके पिछले कई महीनों से राजनीतिक हिंसा के केंद्र बने हुए हैं। इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर हुए हमले और महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था। वर्तमान घटना ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन की सख्त निगरानी के बावजूद, जमीनी स्तर पर राजनीतिक गुटबाजी और अवैध हथियारों का बोलबाला खत्म नहीं हुआ है। बार-बार होती ये घटनाएं निर्वाचन प्रक्रिया और सामान्य जनजीवन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। क्षेत्र में फैले तनाव को देखते हुए प्रशासन ने संदेशखाली के प्रभावित हिस्सों में धारा 144 लागू कर दी है। पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक साथ एकत्र होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस ने गांव में फ्लैग मार्च निकाला है ताकि निवासियों के भीतर व्याप्त डर को कम किया जा सके। इसके बावजूद, गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और बाजार पूरी तरह बंद हैं। प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी रोक लगाने पर विचार किया है ताकि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी भी प्रकार की अफवाह को फैलने से रोका जा सके। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और अतिरिक्त बलों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो टीएमसी के भीतर की यह गुटबाजी पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन गई है। हार और जीत के समीकरणों के बीच स्थानीय नेताओं की आपसी प्रतिद्वंद्विता ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाया है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा प्रहार किया है और आरोप लगाया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उनका दावा है कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता ही जब पुलिस और केंद्रीय बलों पर हमले कर रहे हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? हालांकि, सत्ता पक्ष ने इस घटना को स्थानीय विवाद करार देते हुए कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी गुट से क्यों न हों। अस्पताल में भर्ती घायल जवानों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें अगले कुछ दिनों तक निगरानी में रखने का फैसला किया है। केंद्रीय सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस घटना की एक विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेजने की तैयारी की है। रिपोर्ट में विशेष रूप से उस माहौल का जिक्र किया जाएगा जिसमें जवानों को उग्र भीड़ का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने भी चिंता व्यक्त की है और राज्य के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक से तत्काल रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्दीधारी कर्मियों पर हमला किसी भी सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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