गोरखपुर में गुरु ग्रंथ साहिब के 421वें प्रकाश पर्व पर बोले सीएम योगी, सिख गुरुओं ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए दिया बलिदान।
Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 24 अगस्त 2025 को पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के 421वें प्रकाश पर्व के अवसर पर एक भव्य समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 24 अगस्त 2025 को पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के 421वें प्रकाश पर्व के अवसर पर एक भव्य समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पैडलेगंज स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने गुरुवाणी का पाठ सुना, संगत में शामिल हुए और गुरुद्वारे के सुंदरीकरण कार्यों का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने सिख गुरुओं के बलिदान और सनातन धर्म की रक्षा में उनके योगदान की चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं की परंपरा अनुपम और अटूट रही है, जिन्होंने देश, धर्म और मानवता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास में वही जाति और समाज जीवित रहता है, जो अपने पूर्वजों के शौर्य, पराक्रम और बलिदान को अपने जीवन का हिस्सा बनाता है। उन्होंने बताया कि सिख गुरुओं ने हमेशा भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपने जीवन को समर्पित किया। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक, हर गुरु ने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। जब भी भारतीय संस्कृति पर संकट आया, सिख गुरुओं ने अपने बलिदान से उसे बचाया। विशेष रूप से गुरु तेग बहादुर जी की शहादत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों को विदेशी आक्रांताओं के धर्म परिवर्तन के दबाव से बचाने के लिए अपनी जान दी।
मुख्यमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि औरंगजेब ने साहिबजादों को लोभ और दबाव देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया, लेकिन उन्होंने अपने धर्म को नहीं छोड़ा। छोटे साहिबजादों, जोरावर सिंह और फतेह सिंह, को सरहिंद के नवाब ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया, लेकिन उन्होंने सिर नहीं झुकाया। योगी ने कहा कि यह सिख समुदाय का गौरवशाली इतिहास है, जो देश और धर्म के लिए समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि सिख गुरुओं ने कभी अपने लिए नहीं, बल्कि देश और सनातन धर्म के लिए बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 421 वर्ष पहले इसी दिन गुरु ग्रंथ साहिब जी को हरमंदिर साहिब में स्थापित किया गया था और उन्हें गुरु के रूप में स्वीकार किया गया था। यह परंपरा आज भी विश्व भर में आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने अपने जीवन का हर क्षण देश, धर्म और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित किया। आज का यह पवित्र दिन हमें उनकी शिक्षाओं और बलिदानों को याद करने का अवसर देता है। योगी ने कहा कि हमारा दायित्व है कि हम सिख गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और उनकी शिक्षाओं को अपनाकर राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए कार्य करें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पैडलेगंज गुरुद्वारे में 2.34 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सुंदरीकरण कार्यों का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर के तीन प्रमुख गुरुद्वारों जटाशंकर, मोहद्दीपुर और पैडलेगंज को आधुनिक स्वरूप देने का कार्य किया है। पहले इन गुरुद्वारों में सुविधाओं का अभाव था, लेकिन अब पर्यटन विभाग और सरकार की मदद से इन्हें बेहतर बनाया गया है। अब यहां श्रद्धालुओं के लिए गुरुवाणी पाठ, लंगर और अन्य धार्मिक कार्यक्रम बेहतर सुविधाओं के साथ आयोजित हो सकेंगे। योगी ने कहा कि यह कार्य सिख गुरु परंपरा के प्रति सरकार की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सिख समुदाय की लंबे समय से मांग थी कि गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को मान्यता दी जाए। इस मांग को पूरा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में घोषित किया। इसके अलावा, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत वर्ष के उपलक्ष्य में देश-विदेश में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। योगी ने बताया कि हाल ही में उनके मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवाणी कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसके बाद मंडली दिल्ली के शीशगंज गुरुद्वारे तक कीर्तन करती हुई पहुंची। गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर भी उनके आवास पर कीर्तन का आयोजन किया गया था।
कार्यक्रम में योगी ने सिख समुदाय की एकता और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पैडलेगंज गुरुद्वारा वर्षों से सिख संगत का आस्था का केंद्र रहा है। यह गुरुद्वारा न केवल सिख समुदाय के लिए, बल्कि सभी धर्मों के लोगों के लिए एकता और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कुछ लोग हिंदुओं और सिखों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। हमें ऐसी ताकतों से सावधान रहना होगा और गुरु परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा को बनाए रखना होगा।
कार्यक्रम में गुरुद्वारा समिति ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिह्न, तलवार और शॉल भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, सांसद रविकिशन शुक्ला, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, कालीबाड़ी के महंत रवींद्र दास और सिख समुदाय के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। संचालन जगनैन सिंह नीटू ने किया।
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