कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप मामला- दीवार के छेद से पीड़िता के अश्लील वीडियो बनाए और ब्लैकमेल किया, चार्जशीट दाखिल, वीडियो और डीएनए से पुष्टि। 

Kolkata : कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में 25 जून 2025 को हुई एक भयावह गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले में कोलकाता पुलिस ने 58 दिन बाद, 23 अगस्त 2025 को अलीपुर

Aug 25, 2025 - 11:26
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कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप मामला- दीवार के छेद से पीड़िता के अश्लील वीडियो बनाए और ब्लैकमेल किया, चार्जशीट दाखिल, वीडियो और डीएनए से पुष्टि। 
कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप मामला- दीवार के छेद से पीड़िता के अश्लील वीडियो बनाए और ब्लैकमेल किया, चार्जशीट दाखिल, वीडियो और डीएनए से पुष्टि। 

कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में 25 जून 2025 को हुई एक भयावह गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले में कोलकाता पुलिस ने 58 दिन बाद, 23 अगस्त 2025 को अलीपुर कोर्ट में 658 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में चार आरोपियों मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा, दो अन्य छात्र जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी, तथा कॉलेज के सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। घटना के अनुसार, 25 जून 2025 को शाम 7:30 से रात 10:50 के बीच साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज की एक 24 वर्षीय प्रथम वर्ष की छात्रा के साथ कॉलेज परिसर में गैंगरेप किया गया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि वह उस दिन परीक्षा फॉर्म भरने के लिए कॉलेज गई थी। फॉर्म भरने के बाद उसे यूनियन रूम में रोका गया। मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा, जो कॉलेज का पूर्व छात्र और तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (टीएमसीपी) का जिला संगठन सचिव है, ने उसे शादी का प्रस्ताव दिया। जब पीड़िता ने प्रस्ताव ठुकरा दिया, तो मनोजीत ने उसे धमकाया और जबरदस्ती शुरू कर दी। पीड़िता ने बताया कि उसने विरोध किया और रोकर रहम की भीख मांगी, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक न सुनी।

पुलिस जांच के अनुसार, मनोजीत मिश्रा ने अपने दो साथियों, जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी, के साथ मिलकर पीड़िता को गार्ड रूम में ले जाकर गैंगरेप किया। इस दौरान उन्होंने पीड़िता को हॉकी स्टिक से पीटा और उसे धमकियां दीं। पीड़िता ने बताया कि मनोजीत ने उसे और उसके परिवार को झूठे केस में फंसाने की धमकी दी, साथ ही उसके प्रेमी को नुकसान पहुंचाने की बात कही। चौंकाने वाली बात यह है कि कॉलेज के सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी ने पीड़िता की मदद करने के बजाय गार्ड रूम का दरवाजा बंद कर दिया, जिससे आरोपियों को अपराध करने में सहूलियत मिली।

चार्जशीट में तीन मुख्य सबूतों का जिक्र किया गया है, जो इस मामले में आरोपियों की संलिप्तता को पुख्ता करते हैं। पहला, फॉरेंसिक जांच में मनोजीत मिश्रा का डीएनए पीड़िता के कपड़ों और शरीर से लिए गए नमूनों से मेल खाता है। दूसरा, आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अश्लील वीडियो बरामद किए गए हैं, जो उन्होंने दीवार में लगे एग्जॉस्ट फैन के छेद से चुपके से रिकॉर्ड किए थे। इन वीडियो में आरोपियों की आवाजें भी रिकॉर्ड हुईं, जो फॉरेंसिक जांच में उनकी पहचान की पुष्टि करती हैं। तीसरा, कॉलेज परिसर और आसपास के सीसीटीवी कैमरों में पीड़िता को जबरदस्ती गार्ड रूम में ले जाते हुए और आरोपियों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। ये सभी सबूत पीड़िता के बयान का समर्थन करते हैं।

चार्जशीट में आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सामूहिक बलात्कार, गलत तरीके से बंधक बनाना, गंभीर चोट पहुंचाना, आपराधिक धमकी देना, अपहरण, और सबूत छिपाने जैसे अपराध शामिल हैं। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67ए और 66ई के तहत भी आरोप दर्ज किए गए हैं, क्योंकि आरोपियों ने अश्लील वीडियो बनाकर पीड़िता को ब्लैकमेल किया। मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा पर बीएनएस की धारा 70(1) के तहत सामूहिक बलात्कार का आरोप है, जिसके लिए कम से कम 20 साल की सजा हो सकती है, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है।

पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता की शिकायत दर्ज होने के छह घंटे के भीतर मनोजीत मिश्रा, जैब अहमद, और प्रमित मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में जांच के दौरान सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी को भी गिरफ्तार किया गया। सभी चारों आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।

इस मामले ने कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक छात्रा के साथ कॉलेज के अंदर इतना बड़ा अपराध होना और सुरक्षा गार्ड का इसमें सहयोग करना यह दर्शाता है कि कॉलेज प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियां हैं। चार्जशीट में यह भी सामने आया है कि मनोजीत मिश्रा का कॉलेज में पहले से दबदबा था। वह 2022 में कॉलेज से पासआउट हुआ था और 2024 से कॉलेज में अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। उसका आपराधिक इतिहास भी रहा है, और वह पहले आठ बार गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन हर बार उसके साथियों ने उसे जमानत पर छुड़ा लिया।

इस घटना ने पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि टीएमसी नेताओं को कानून का कोई डर नहीं है। वहीं, टीएमसी ने कहा है कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, भले ही वे उनके संगठन से जुड़े हों। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और कोलकाता पुलिस से तीन दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पीड़िता को चिकित्सा, मानसिक, और कानूनी सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला कोलकाता में हाल के वर्षों में हुए अन्य गंभीर अपराधों की याद दिलाता है, जैसे कि 2024 में आरजी कर हॉस्पिटल में एक ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या का मामला। उस मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज गैंगरेप मामला एक बार फिर से समाज में महिलाओं की सुरक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाता है।

पुलिस का कहना है कि इस मामले में सभी सबूत मजबूत हैं, और वे दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चार्जशीट में 80 लोगों के बयान शामिल हैं, जो इस मामले की गंभीरता और जांच की व्यापकता को दर्शाते हैं। यह मामला अब कोर्ट में है, और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पीड़िता को कितनी जल्दी और कितना सख्त न्याय मिलता है।

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