जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसा: 9 लोगों की मौत और 6 लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित बरगी डैम के जलाशय में गुरुवार की शाम एक अत्यंत हृदय विदारक दुर्घटना घटित

By INA News Desk
May 2, 2026 - 17:24
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जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसा: 9 लोगों की मौत और 6 लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसा: 9 लोगों की मौत और 6 लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
  • बरगी जलाशय में समाया पर्यटकों से भरा क्रूज: मासूमों और महिलाओं की चीख-पुकार के बीच रेस्क्यू टीम ने तेज किया तलाशी अभियान
  • सोनू सूद ने जताया गहरा शोक: सरकार से सुरक्षा प्रोटोकॉल और अनिवार्य लाइफ जैकेट कानून की पुरजोर वकालत

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित बरगी डैम के जलाशय में गुरुवार की शाम एक अत्यंत हृदय विदारक दुर्घटना घटित हुई, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। पर्यटन विभाग द्वारा संचालित एक क्रूज अचानक आए तेज तूफान और खराब मौसम के कारण बीच पानी में अनियंत्रित होकर पलट गया। इस भयानक हादसे में अब तक नौ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि छह अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। जैसे ही क्रूज पलटा, वहां मौजूद पर्यटकों में भगदड़ मच गई और देखते ही देखते क्रूज पानी की गहराई में समा गया। घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि क्रूज चालक उसे किनारे तक लाने में पूरी तरह विफल रहा। इस त्रासदी ने जल पर्यटन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस क्रूज पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे, जो इस हादसे के मुख्य कारणों में से एक माना जा रहा है। रेस्क्यू टीम ने शुक्रवार की सुबह जब फिर से तलाशी अभियान शुरू किया, तो उन्हें एक मां और उसके चार साल के बेटे का शव मिला, जो एक-दूसरे को मजबूती से पकड़े हुए थे। यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि वहां मौजूद बचाव दल की आंखें भी नम हो गईं। लापता लोगों की तलाश के लिए सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें आधुनिक उपकरणों के साथ जुटी हुई हैं। जबलपुर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। अभी तक करीब 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों में उपचार दिया जा रहा है। बॉलीवुड अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनू सूद ने इस दर्दनाक हादसे पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रशासन से इस दिशा में कठोर नीति बनाने का अनुरोध किया है। सोनू सूद ने जोर देकर कहा कि अब वह समय आ गया है जब पानी में चलने वाली किसी भी नाव या क्रूज के लिए लाइफ जैकेट के निर्देशों को अनिवार्य बना देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को एक ऐसा पोर्टल विकसित करना चाहिए, जहां हर यात्रा से पहले सभी यात्रियों द्वारा लाइफ जैकेट पहने हुए फोटो या वीडियो अपलोड करना अनिवार्य हो। उनका मानना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और नियम सख्त नहीं होंगे, तब तक ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और मृतक परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही, बरगी डैम में फिलहाल सभी क्रूज और नौका संचालन पर तब तक के लिए रोक लगा दी गई है जब तक कि सुरक्षा ऑडिट पूरा नहीं हो जाता।

हादसे के शिकार हुए परिवारों में मातम का माहौल है। कई पीड़ित परिवारों ने प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब मौसम खराब हो रहा था, तो क्रूज को बीच मजधार में ले जाने की अनुमति क्यों दी गई। इसके अलावा, यात्रियों ने यह भी बताया कि क्रूज पर पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं थे और जो थे, उन्हें पहनने के लिए कोई निर्देश नहीं दिए गए थे। सुरक्षा मानकों की इस घोर अनदेखी ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए क्रूज के पायलट, हेल्पर और टिकट काउंटर प्रभारी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी टीमों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बरगी डैम की गहराई और पानी के नीचे जमा गाद के कारण गोताखोरों को शवों को खोजने में कठिनाई हो रही है। शुक्रवार को हैदराबाद और आगरा से सेना के विशेष गोताखोरों को बुलाया गया है ताकि लापता छह लोगों को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके। इसके अलावा, भारी क्रेन और हाइड्रोलिक कटर की मदद से डूबे हुए क्रूज को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा हुआ तो नहीं है। स्थानीय ग्रामीण भी इस अभियान में प्रशासन की सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं, जिनकी बहादुरी की मुख्यमंत्री ने सराहना की है। इस हादसे ने न केवल मध्य प्रदेश बल्कि देशभर के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर पर्यटन स्थलों पर कमाई के चक्कर में सुरक्षा को ताक पर रख दिया जाता है। जबलपुर का यह हादसा भी कुछ वैसी ही कहानी बयां कर रहा है। मौसम विभाग द्वारा पहले ही आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद क्रूज का संचालन जारी रहा। सोनू सूद द्वारा दिए गए सुझावों पर भी अब व्यापक चर्चा हो रही है कि कैसे तकनीक का उपयोग करके सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है। एक जवाबदेह तंत्र की कमी ही ऐसे हादसों का सबसे बड़ा कारण बनती है।

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