Politics News: डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने 8,000 के खरीदे आम, कहा- तुम्हारा आम अच्छा है, वीडियो हुआ वायरल।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या (Keshav Prasad Maurya) ने बीते शनिवार को वाराणसी में आयोजित तिरंगा यात्रा ...
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या (Keshav Prasad Maurya) ने बीते शनिवार को वाराणसी में आयोजित तिरंगा यात्रा के दौरान एक अनोखा और देसी अंदाज दिखाया, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। तिरंगा यात्रा के बाद, मौर्या सड़क किनारे एक ठेले पर रुक गए और वहां रसीले आम खरीदकर उनका लुत्फ उठाया। इस पल को उनके एक समर्थक ने कैमरे में कैद कर लिया, और वीडियो तेजी से वायरल हो गया। तिरंगा यात्रा, जो हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में आयोजित की गई थी, देशभक्ति और एकता का संदेश देने के लिए थी, लेकिन मौर्या का यह आम खाने वाला पल यात्रा का सबसे चर्चित क्षण बन गया।
- तिरंगा यात्रा का आयोजन
वाराणसी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, हमेशा से ही राष्ट्रीय और राजनीतिक आयोजनों का केंद्र रहा है। बीते शनिवार को, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर एक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया। यह यात्रा 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की सफलता का जश्न मनाने और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए थी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या (Keshav Prasad Maurya) इस यात्रा के मुख्य अतिथि थे।
यात्रा सुबह 10:30 बजे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रशासनिक ब्लॉक से शुरू हुई और मलदहिया, लहरतारा, और लहुराबीर होते हुए दोपहर 12 बजे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान पर समाप्त हुई। जिला मजिस्ट्रेट एस. राजलिंगम के अनुसार, इस यात्रा में 10,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जिसमें सरकारी कर्मचारी, पुलिस, अर्धसैनिक बल, स्कूल-कॉलेज के छात्र, और स्थानीय नागरिक शामिल थे। यात्रा में बाइकर्स और पैदल यात्री दोनों शामिल थे, और इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना था।
- सड़क किनारे आम खाने का वायरल पल
तिरंगा यात्रा के समापन के बाद, केशव प्रसाद मौर्या (Keshav Prasad Maurya) अपने काफिले के साथ लौट रहे थे। लहरतारा के पास एक सड़क किनारे ठेले पर उनकी नजर रसीले आमों पर पड़ी। मौर्या ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया और ठेले पर पहुंचकर आम खरीदे। उन्होंने ठेले वाले से बातचीत की और इसके बाद उन्होंने विक्रेता संतोष कुमार सोनकर से पूछा कि ठेले के आम का कितना दाम है। उसने आठ हजार बताया तो सहयोगियों से भुगतान करने को कहकर सभी को खिलाने को कहा। इसके बाद आठ हजार रुपया और एक किलो मिठाई दिया। कहा, तुम्हारा आम अच्छा है। हंसते-हंसते आम चूसकर खाए। इस दौरान, उनके साथ मौजूद एक समर्थक ने इस पल को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में मौर्या को आम खाते हुए और ठेले वाले से मजाक करते हुए देखा जा सकता है।
X पर इस वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, “जब वाराणसी में सड़क किनारे चूसने वाला आम खाने लगे डिप्टी सीएम केशव मौर्य साहब। यह है असली देसी अंदाज!” वीडियो को 48 घंटे के भीतर 1 मिलियन से ज्यादा व्यूज, 50,000 लाइक्स, और हजारों कमेंट्स मिल चुके हैं। यूजर्स ने मौर्या की सादगी और जनता से जुड़ाव की खूब तारीफ की। एक यूजर ने कमेंट किया, “यह देखकर अच्छा लगा कि इतने बड़े नेता भी आम आदमी की तरह आम का मजा लेते हैं।”
- केशव प्रसाद मौर्या (Keshav Prasad Maurya) का देसी अंदाज
केशव प्रसाद मौर्या (Keshav Prasad Maurya), जो उत्तर प्रदेश में बीजेपी के प्रमुख ओबीसी चेहरों में से एक हैं, हमेशा से अपनी सादगी और जनता से जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह 2021 में राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश के आमों पर टिप्पणी का जवाब देना हो, जिसमें मौर्या ने कहा था, “अगर राहुल को यूपी के आम पसंद नहीं, तो क्या उन्हें विदेशी शराब पसंद है?”, या फिर तिरंगा यात्रा के बाद आम खाने का यह पल, मौर्या का देसी अंदाज हमेशा सुर्खियां बटोरता है।
मौर्या का यह कदम उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू दर्शाता है। एक साधारण परिवार से आने वाले मौर्या ने अपने बचपन में अपने पिता के चाय के ठेले पर काम किया था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ राम जन्मभूमि आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। उनकी यह सादगी और जनता से सीधा जुड़ाव उन्हें एक लोकप्रिय नेता बनाता है।
- सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं
मौर्या के आम खाने वाले वीडियो ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं उकसाईं। जहां कुछ लोगों ने इसे उनकी सादगी और जमीन से जुड़ाव का प्रतीक बताया, वहीं कुछ ने इसे एक पब्लिसिटी स्टंट करार दिया। X पर एक यूजर ने लिखा, “मौर्या जी का यह अंदाज दिल जीत लेता है। ऐसे नेता कम ही देखने को मिलते हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “चुनाव नजदीक हैं, तो अब आम खाने का ड्रामा शुरू हो गया।”
स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दीं। लहरतारा के एक दुकानदार, रमेश गुप्ता, ने कहा, “मौर्या जी का ठेले पर रुककर आम खाना हमें अच्छा लगा। इससे छोटे व्यापारियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।” हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि नेताओं को इस तरह के प्रदर्शन के बजाय विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
- तिरंगा यात्रा का महत्व
तिरंगा यात्रा का आयोजन ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य हर घर में तिरंगा लहराना और नागरिकों में राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देना है। वाराणसी में यह यात्रा खास थी, क्योंकि यह पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय सेना की ताकत और एकता का प्रतीक थी। मौर्या ने यात्रा के दौरान अपने भाषण में कहा, “पाक अधिकृत कश्मीर में भी एक दिन तिरंगा लहरेगा। हमारी सेना ने ऑपरेशन सिन्दूर से आतंकवाद को करारा जवाब दिया है।”
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केशव प्रसाद मौर्या (Keshav Prasad Maurya) का वाराणसी में तिरंगा यात्रा के बाद सड़क किनारे आम खाने का पल एक साधारण घटना नहीं, बल्कि उनकी सादगी, जनता से जुड़ाव, और देसी अंदाज का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा, जो देशभक्ति और एकता का संदेश देने के लिए थी, मौर्या के इस अनोखे अंदाज के कारण और चर्चा में आ गई। मौर्या का यह आम खाने वाला पल एक सामान्य घटना से कहीं ज्यादा है। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी छवि को और मजबूत करता है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, बीजेपी पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, और मौर्या का जनता से जुड़ाव इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा, यह घटना उत्तर प्रदेश के आमों की मिठास को भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करती है, जो पहले भी मौर्या और अन्य नेताओं के बयानों में चर्चा का विषय रह चुका है।
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