Punjab: नाभा में किसानों के धरने पर DSP मंदीप कौर से मारपीट, बाल खींचे-वर्दी फाड़ी, पुलिस ने 20 पर केस दर्ज।
पंजाब के नाभा शहर में सोमवार को किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई, जिसमें डिप्टी सुपरिंटेंंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) मंदीप कौर चीमा ने किसानों पर गंभीर आरोप लगाए
पंजाब के नाभा शहर में सोमवार को किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई, जिसमें डिप्टी सुपरिंटेंंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) मंदीप कौर चीमा ने किसानों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि धरने के दौरान किसानों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, बाल खींचे, जूते खींचे और वर्दी पर हाथ डाला। DSP कौर अपनी ऑफिस से निकलने की कोशिश कर रही थीं, तभी किसानों ने उन्हें घेर लिया। इस घटना में कई किसानों को चोटें आईं, जबकि DSP कौर ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। पुलिस ने 20 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। यह हादसा नाभा के DSP कार्यालय के बाहर हुआ, जहां किसान संगठनों ने पिछले सप्ताह के आह्वान पर धरना दिया था। पटियाला रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) परमिंदर सिंह ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जांच चल रही है। किसान संगठनों ने पलटकर आरोप लगाया कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे कई लोग घायल हुए।
घटना सोमवार दोपहर करीब दो बजे शुरू हुई। नाभा DSP कार्यालय के बाहर किसान संगठनों के सदस्य टेंट लगाकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। उनका मुद्दा स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याओं से जुड़ा था, जैसे फसल खरीद में देरी और बिजली-पानी की दिक्कतें। DSP मंदीप कौर चीमा कार्यालय से निकलने वाली थीं। उन्होंने बाद में बताया कि उन्होंने किसानों को रोकने की कोशिश नहीं की। हम शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान करते हैं। लेकिन जैसे ही उनकी गाड़ी बाहर आई, दर्जनों किसान इकट्ठे हो गए। वे गाड़ी को रोकने लगे। DSP कौर के मुताबिक, एक किसान ने गाड़ी का दरवाजा खोला और उन्हें बाहर खींच लिया। फिर भीड़ ने घेर लिया। किसी ने उनके बाल खींचे, तो किसी ने वर्दी पकड़ ली। जूते भी खींचे गए। DSP कौर ने कहा कि मैंने विरोध किया, लेकिन संख्या में ज्यादा होने से कुछ कर न सकीं। मेरी महिला पुलिसकर्मी साथी भी घबरा गईं। इस दौरान हल्की धक्कामुक्की हुई, जिसमें DSP कौर को मामूली चोटें आईं।
चश्मदीदों के अनुसार, किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। वे चिल्ला रहे थे कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। DSP कौर ने कहा कि मैं बातचीत के लिए रुकी, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं। स्थिति बिगड़ते ही अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुलाई गई। लाठीचार्ज नहीं हुआ, लेकिन हल्की धकेलाहट हुई। किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के एक नेता ने बताया कि हमारे 10-12 साथी घायल हुए। पुलिस ने बिना वजह बल प्रयोग किया। लेकिन DSP कौर की शिकायत पर हमारा कोई सदस्य शामिल नहीं। यह झूठा प्रचार है। पुलिस ने वीडियो फुटेज चेक किए हैं। IG परमिंदर सिंह ने कहा कि DSP कौर की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 (सरकारी कार्य में बाधा), 354 (महिला के साथ अभद्रता) और 506 (धमकी) के तहत 20 नामजद और कुछ अज्ञात किसानों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन नोटिस जारी हैं।
DSP मंदीप कौर चीमा पंजाब पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे नाभा में पिछले दो साल से तैनात हैं। उनकी छवि कठोर लेकिन निष्पक्ष की है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं जब किसान आंदोलनों में महिलाओं के साथ ऐसा होता है। 2020-21 के दिल्ली बॉर्डर किसान आंदोलन में भी ऐसी शिकायतें आई थीं। लेकिन हम डटे रहते हैं। इस घटना के बाद DSP कौर को मेडिकल जांच कराई गई। डॉक्टरों ने मामूली खरोंचें बताईं। उनके बालों पर खींचने के निशान दिखे। वर्दी पर फटाव आ गया। पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीरता से लिया। DGP गुरसमेर सिंह भुल्लर ने कहा कि महिलाओं के साथ हिंसा बर्दाश्त नहीं। सख्त कार्रवाई होगी। किसान संगठनों ने पलटकर कहा कि DSP कौर ने ही उकसाया। वे गाड़ी से उतरकर गाली-गलौज करने लगीं। लेकिन वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखा।
नाभा पंजाब का एक छोटा शहर है, जो पटियाला जिले में आता है। यहां कृषि मुख्य व्यवसाय है। किसान अक्सर धरने देते हैं। पिछले हफ्ते किसान संगठनों ने 22 सितंबर को धरना देने का ऐलान किया था। मुद्दे थे गेहूं-धान की MSP, कर्ज माफी और सिंचाई सुविधाएं। सरकार ने बातचीत का आश्वासन दिया, लेकिन किसान सड़क पर उतर आए। इस घटना ने पंजाब में किसान-सरकार तनाव को फिर उजागर किया। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद भी किसान मुद्दे गर्म हैं। AAP सरकार ने कई वादे किए, लेकिन अमल धीमा। विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने DSP कौर के आरोपों की निंदा की। नेता ने कहा कि किसान शांतिप्रिय हैं, लेकिन अगर हिंसा हुई तो जांच हो। कांग्रेस ने कहा कि पुलिस का रवैया आक्रामक है।
घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया। सोमवार शाम को अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई। किसान टेंट हटाने लगे, लेकिन धमकी दी कि अगर FIR नहीं रद्द हुई तो बड़ा आंदोलन होगा। DSP कौर के कार्यालय पर सन्नाटा छा गया। स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि ऐसी झड़पें व्यापार प्रभावित करती हैं। एक दुकानदार ने बताया कि धरना शांतिपूर्ण था, लेकिन अचानक बिगड़ गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए। एक में DSP कौर घिरी दिख रही हैं। दूसरे में किसान चोटें दिखा रहे। यूजर्स ने दोनों पक्षों की आलोचना की। एक ने लिखा, किसान सही हैं लेकिन हिंसा गलत। दूसरा बोला, पुलिस महिलाओं को आगे भेजकर उकसाती है। पंजाब पुलिस ने अपील की कि शांति बनाए रखें।
यह घटना पंजाब के किसान आंदोलनों की याद दिलाती है। 2020-21 में लाखों किसानों ने दिल्ली बॉर्डर पर डेरा डाला। वहां भी पुलिस-किसान झड़पें हुईं। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगे। लेकिन किसान संगठनों ने हमेशा शांति का आह्वान किया। नाभा जैसी छोटी घटना बड़े मुद्दे को हवा दे सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को किसानों से सीधी बात करनी चाहिए। MSP कानून बनाने का वादा पूरा करें। सिंचाई और बिजली पर ध्यान दें। DSP कौर ने कहा कि हम किसानों के हितैषी हैं। लेकिन कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। IG ने जांच टीम गठित की। दो हफ्ते में रिपोर्ट आएगी। अगर किसान निर्दोष पाए गए तो FIR रद्द हो सकती।
किसान नेता जोगिंदर सिंह उमरानांगल ने कहा कि हम DSP कौर से माफी मांगने को तैयार, लेकिन सच्चाई सामने आए। घटना में घायल किसानों को अस्पताल पहुंचाया गया। कोई गंभीर नहीं। पुलिस ने कहा कि अगली बार बातचीत का रास्ता अपनाएं। नाभा में सामान्य जीवन बहाल हो गया। लेकिन बहस जारी है। मीडिया ने कवरेज किया। अखबारों में प्रमुखता से छापा। टीवी पर डिबेट हुई। पंजाब सरकार ने कहा कि किसान भाई हैं, लेकिन हिंसा गलत। CM भगवंत मान ने ट्वीट कर शांति की अपील की।
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