दुबई में प्रॉपर्टी निवेश पर ईडी की टेढ़ी नजर, क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने वाले सैकड़ों भारतीय जांच के घेरे में

प्रवर्तन निदेशालय अब उन निवेशकों से उनके बैंक स्टेटमेंट और आय के स्रोतों का पूरा ब्यौरा मांग रहा है। जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि क्या इन निवेशकों ने क्रेडिट कार्ड की सीमा का उपयोग करके एलआरएस की निर्धारित सीमा को

Mar 24, 2026 - 11:45
 0  9
दुबई में प्रॉपर्टी निवेश पर ईडी की टेढ़ी नजर, क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने वाले सैकड़ों भारतीय जांच के घेरे में
दुबई में प्रॉपर्टी निवेश पर ईडी की टेढ़ी नजर, क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने वाले सैकड़ों भारतीय जांच के घेरे में

  • फेमा नियमों का उल्लंघन बना गले की फांस: विदेश में घर खरीदने के लिए उधार की रकम का इस्तेमाल पड़ा महंगा
  • इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड स्वाइप कर दुबई में विला और अपार्टमेंट खरीदने वालों को नोटिस, धन के स्रोत पर जवाब मांग रही जांच एजेंसी

संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में आलीशान प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट में निवेश करना कई रईस भारतीयों के लिए अब मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन भारतीय नागरिकों के खिलाफ एक व्यापक जांच शुरू की है, जिन्होंने दुबई में संपत्तियां खरीदने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया था। आर्थिक अपराधों की निगरानी करने वाली इस केंद्रीय एजेंसी ने फरवरी 2026 के दौरान ऐसे कई हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों के माध्यम से एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन विदेशी संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए इस्तेमाल किया गया धन वास्तव में कहां से आया था और भुगतान की पूरी प्रक्रिया क्या थी। यह कार्रवाई मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत की जा रही है, क्योंकि विदेशों में वित्तीय लेनदेन के लिए भारत में कड़े कानून लागू हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच के दायरे में आए अधिकांश लोगों ने दुबई यात्रा के दौरान वहां के रियल एस्टेट डेवलपर्स के कार्यालयों में जाकर अपने भारतीय बैंक खातों से जुड़े क्रेडिट कार्ड स्वाइप किए थे। इसके अलावा, कई निवेशकों ने भारत में बैठे-बैठे ऑनलाइन पेमेंट लिंक के माध्यम से भी बड़ी मात्रा में डॉलर में भुगतान किया। ईडी की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कई मामलों में बुकिंग अमाउंट से लेकर अगली किस्तों तक का भुगतान क्रेडिट कार्ड के जरिए किया गया। एजेंसी अब इन सभी लेनदेन का विवरण बैंकों से जुटा रही है और यह मिलान कर रही है कि क्या इन लोगों ने आयकर रिटर्न में अपनी विदेशी संपत्तियों का उल्लेख किया था। इस जांच ने दुबई के रियल एस्टेट बाजार में सक्रिय उन भारतीय एजेंटों और दलालों के बीच भी हड़कंप मचा दिया है जो भारतीयों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

इस पूरी जांच के केंद्र में भुगतान का वह तरीका है जिसे कानूनी भाषा में 'उधार' की श्रेणी में रखा जाता है। भारतीय नियमों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से किया गया कोई भी भुगतान तकनीकी रूप से बैंक द्वारा दिया गया एक असुरक्षित ऋण (Unsecured Loan) माना जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों के तहत, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के माध्यम से कोई भी भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख डॉलर तक की राशि विदेश भेज सकता है। हालांकि, इस योजना के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि विदेशों में अचल संपत्ति यानी जमीन या घर खरीदने के लिए उपयोग किया जाने वाला पैसा निवेशक की अपनी शुद्ध बचत या व्यक्तिगत आय होनी चाहिए। किसी भी प्रकार का कर्ज, उधार या क्रेडिट सुविधा लेकर विदेश में प्रॉपर्टी खरीदना कानूनन वर्जित है, और यही वह बिंदु है जहां निवेशक फंसते नजर आ रहे हैं। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत भारतीय नागरिकों को निवेश की अनुमति तो है, लेकिन इसमें 'उधार लिए गए फंड' का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। क्रेडिट कार्ड एक क्रेडिट लाइन है, न कि आपके बैंक खाते में जमा आपकी अपनी पूंजी। इसी तकनीकी बारीकी के कारण ईडी ने इन लेनदेन को संदिग्ध माना है।

प्रवर्तन निदेशालय अब उन निवेशकों से उनके बैंक स्टेटमेंट और आय के स्रोतों का पूरा ब्यौरा मांग रहा है। जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि क्या इन निवेशकों ने क्रेडिट कार्ड की सीमा का उपयोग करके एलआरएस की निर्धारित सीमा को पार करने की कोशिश की थी। जानकारों का कहना है कि कई बार लोग बैंक से सीधे विदेशी मुद्रा भेजने के बजाय क्रेडिट कार्ड का रास्ता इसलिए चुनते हैं क्योंकि इसमें त्वरित भुगतान की सुविधा मिलती है और शुरुआती स्तर पर उतनी कागजी कार्रवाई नहीं होती जितनी बैंक ट्रांसफर में होती है। लेकिन अब यही सुविधा उनके लिए कानून का उल्लंघन बन गई है। नोटिस पाने वाले लोगों को यह साबित करना होगा कि उन्होंने क्रेडिट कार्ड से जो भुगतान किया, उसे बाद में अपनी वैध आय से चुकाया और यह किसी व्यापक मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का हिस्सा नहीं है।

दुबई में निवेश करने वाले भारतीयों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है, क्योंकि वहां का गोल्डन वीजा प्रोग्राम और टैक्स-फ्री वातावरण निवेशकों को आकर्षित करता है। लेकिन भारतीय जांच एजेंसियों की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विदेशी निवेश के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है। ईडी विशेष रूप से उन मामलों को देख रही है जहां एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग बैंकों के कई क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल कर करोड़ों की संपत्ति खरीदी है। जांच एजेंसी यह भी संदेह कर रही है कि कुछ मामलों में क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए गए भुगतान का स्रोत संदिग्ध हो सकता है या यह अघोषित धन को विदेश में ठिकाने लगाने का एक प्रयास हो सकता है। यदि यह सिद्ध होता है कि संपत्ति खरीदने में फेमा नियमों की अवहेलना हुई है, तो निवेशकों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और कुछ मामलों में संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।

इस पूरे प्रकरण ने उन वित्तीय सलाहकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं जिन्होंने निवेशकों को क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने की सलाह दी थी। आमतौर पर, विदेशी संपत्ति की खरीद के लिए धनराशि बैंक के माध्यम से सीधे डेवलपर के खाते में ट्रांसफर की जानी चाहिए, ताकि ट्रांजैक्शन का पूरा ट्रेल और उद्देश्य बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज रहे। क्रेडिट कार्ड का उपयोग अक्सर दैनिक खर्चों या यात्रा के दौरान छोटी खरीदारी के लिए किया जाता है, लेकिन इसे पूंजीगत निवेश का जरिया बनाना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा करता है। ईडी की इस कार्रवाई का असर भविष्य में होने वाले विदेशी निवेशों पर भी पड़ेगा, क्योंकि अब बैंक और निवेशक दोनों ही क्रेडिट कार्ड के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को लेकर अधिक सतर्क रहेंगे।

आने वाले हफ्तों में यह जांच और भी तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि ईडी अब उन रियल एस्टेट कंपनियों का डेटा भी खंगाल रही है जिनके दुबई में बड़े प्रोजेक्ट्स हैं और जिन्होंने भारतीय ग्राहकों से भारी मात्रा में क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स स्वीकार किए हैं। इस खबर के बाद से कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स विशेषज्ञों के पास उन लोगों की भीड़ उमड़ रही है जिन्होंने हाल के दिनों में दुबई में निवेश किया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिन लोगों ने अनजाने में इस तरह का भुगतान किया है, उन्हें समय रहते अपनी गलतियों को सुधारने और अधिकारियों को सही जानकारी देने का प्रयास करना चाहिए। बहरहाल, दुबई में प्रॉपर्टी रखने वाले भारतीय अब रडार पर हैं और उन्हें अपनी हर एक पाई का हिसाब जांच एजेंसी को देना होगा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow