'धुरंधर द रिवेंज' पर मद्रास हाई कोर्ट में याचिका: चुनाव से ठीक पहले रिलीज को बताया आचार संहिता का उल्लंघन
तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा का हमेशा से गहरा प्रभाव रहा है, यही कारण है कि 'धुरंधर 2' की रिलीज को लेकर यहां की पार्टियां भी सतर्क हैं। राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज है और फ्लाइंग स्क्वॉड द्वारा लगातार जब्ती की कार्रवाई की जा र
- विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा तमिलनाडु: राजनीतिक विषयों वाली फिल्म 'धुरंधर 2' पर प्रतिबंध लगाने की मांग
- मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने उठा फिल्म का मुद्दा: एकतरफा नैरेटिव और वोटरों को प्रभावित करने के आरोपों से घिरा सिनेमा
बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही फिल्म 'धुरंधर द रिवेंज' (धुरंधर 2) अब एक गंभीर कानूनी विवाद के भंवर में फंसती नजर आ रही है। मद्रास उच्च न्यायालय में एक तत्काल याचिका दायर की गई है, जिसमें तमिलनाडु राज्य में इस फिल्म के प्रदर्शन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वर्तमान में आदर्श आचार संहिता लागू है। ऐसे में इस फिल्म की रिलीज, जिसमें गहरे राजनीतिक संदेश और एक विशिष्ट विचारधारा का पुट है, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। यह मामला तब सामने आया जब फिल्म अपनी वैश्विक कमाई के आंकड़ों से फिल्म जगत को हैरान कर रही थी, लेकिन अब इसकी स्क्रीनिंग पर मंडराते संकट ने मेकर्स की चिंता बढ़ा दी है।
कानूनी कार्यवाही के दौरान एक महिला वकील ने मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष मौखिक रूप से यह विषय उठाया। उन्होंने दलील दी कि 'धुरंधर द रिवेंज' महज एक काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि इसमें समकालीन राजनीति और सरकारी रणनीतियों का ऐसा चित्रण है जो मतदाताओं के मानस को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव होने हैं, और मतदान में अब एक महीने से भी कम का समय शेष है। वकील का कहना है कि ऐसी संवेदनशील अवधि में इस तरह की फिल्म को रिलीज करना चुनावी नियमों की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने सुझाव दिया कि फिल्म के प्रदर्शन को चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए।
अदालत ने इस मौखिक दलील को गंभीरता से लेते हुए याचिकाकर्ता को इसे औपचारिक रूप से एक रिट याचिका के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका पूरी तरह से दाखिल होने के बाद ही इस पर विस्तृत सुनवाई की जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने इस विषय की गंभीरता को स्वीकार किया है कि फिल्म का कंटेंट 'एकतरफा नजरिया' पेश कर सकता है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि फिल्म में दिखाए गए कई दृश्य और संवाद वर्तमान सत्ता पक्ष की रणनीतियों को महिमामंडन के रूप में पेश करते हैं, जो विपक्षी दलों के लिए चुनावी मैदान में असमानता पैदा कर सकता है। फिल्म के निर्देशक आदित्य धर और मुख्य अभिनेता रणवीर सिंह के लिए यह कानूनी अड़चन एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। 'धुरंधर द रिवेंज' अकेली ऐसी फिल्म नहीं है जो चुनावी मौसम में विवादों में है। थलपति विजय की फिल्म 'जन नायकन' को भी हाल ही में सेंसर बोर्ड (CBFC) ने प्रमाणन देने से रोक दिया है और समीक्षा के लिए भारत निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। इन दोनों मामलों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या कलात्मक अभिव्यक्ति को चुनाव के दौरान सीमित किया जाना चाहिए।
फिल्म की कहानी और इसके विषयों को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। 'धुरंधर द रिवेंज' कराची के ल्यारी जैसे संवेदनशील इलाकों की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें कंधार विमान अपहरण, 2001 का संसद हमला और 26/11 मुंबई हमलों जैसी वास्तविक घटनाओं के संदर्भों को जोड़ा गया है। आलोचकों का एक वर्ग इसे 'राष्ट्रवादी' भावनाओं को उभारने वाली फिल्म बता रहा है, जबकि याचिकाकर्ता का मानना है कि इसमें कुछ राजनीतिक हस्तियों की छवियों को जानबूझकर सकारात्मक या नकारात्मक रूप में पेश किया गया है। फिल्म का एक लोकप्रिय संवाद 'ये घर में घुसेगा भी और मारेगा भी' पहले ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे चुनाव प्रचार के नारों से जोड़कर देखा जा रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा का हमेशा से गहरा प्रभाव रहा है, यही कारण है कि 'धुरंधर 2' की रिलीज को लेकर यहां की पार्टियां भी सतर्क हैं। राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज है और फ्लाइंग स्क्वॉड द्वारा लगातार जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में एक ऐसी फिल्म का बड़े पर्दे पर आना, जो सीधे तौर पर शासन व्यवस्था और आतंकवाद विरोधी नीतियों की बात करती है, कूटनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। वकील शीला, जिन्होंने यह याचिका दायर की है, का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी मनोरंजन का माध्यम चुनावी लाभ का औजार न बने। उनका दावा है कि फिल्म का तमिल संस्करण खासतौर पर उन क्षेत्रों में प्रचारित किया जा रहा है जहां चुनावी मुकाबला कड़ा है।
फिल्म के निर्माता और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए यह कानूनी लड़ाई आर्थिक रूप से भी जोखिम भरी है। 'धुरंधर 2' ने अपने शुरुआती चार दिनों में ही दुनिया भर में 761 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है और यह 'पुष्पा 2' के बाद दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग वाली भारतीय फिल्म बन गई है। तमिलनाडु एक बड़ा बाजार है और यदि यहां फिल्म पर प्रतिबंध लगता है या इसकी स्क्रीनिंग रुकती है, तो इससे करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें मद्रास उच्च न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या अदालत अभिव्यक्ति की आजादी को प्राथमिकता देगी या चुनाव आयोग के आदर्श आचार संहिता के तर्कों को मानकर फिल्म पर रोक लगाएगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
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