किसानों का गुस्सा: सोयाबीन की जगह मक्का दर्ज, भावांतर योजना में रजिस्ट्रेशन रुका, 7 दिन में सुधार की मांग।
मध्यप्रदेश के बैतूल में शासन ने किसानों के साथ किया भेदभाव भावान्तर योजना से किया किसानों को वंचित,रिकॉर्ड में सोयाबीन की जगह चढ़ा दिया मक्का दरअसल मुख्यमंत्री की
शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
- किसानों को किया गया गुमराह, सोयाबीन की जगह रिकॉर्ड में चढ़ा दी मक्के की फसल,रजिस्ट्रेशन कराने पहुँचे किसानों का नही हुआ भावान्तर योजना में पंजीकरण, किसानों ने दी 7 दिन में सुधार करने की चेतावनी, वर्ना करेंगे आमरण अनशन और धरना,वहीं मेंढा जलाशय का लाभ भी नही दिए जाने का आरोप
मध्यप्रदेश के बैतूल में शासन ने किसानों के साथ किया भेदभाव भावान्तर योजना से किया किसानों को वंचित,रिकॉर्ड में सोयाबीन की जगह चढ़ा दिया मक्का दरअसल मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद किसान अपनी सोयाबीन की फसल का पंजीयन कराने सोसाइटी पहुँचे थे जहाँ उनका पंजीयन पोर्टल पर नही हुआ जिसके बाद किसान तहसीलदार के कार्यालय पहुँचे जहाँ उन्हें पता चला कि सभी किसानों का रिकॉर्ड में सोयाबीन की जगह मक्का चढ़ा दिया गया है जबकि किसानों के खेतों में अभी भी सोयाबीन की फसल लगी हुई है जो कि अतिवृष्टि से अत्यधिक मात्रा में खराब हो गई है।
जिसका सर्वे भी अब तक नही हुआ पर कार्यालय में बैठे पटवारी बाबुओं ने मिलकर किसानों के साथ अन्यायपूर्ण तरीके से सोयाबीन को मक्का बता दिया है इस मामले में तहसीलदार से शिकायत करने पहुँचे किसानों को तहसीलदार मौके पर नही मिले जिसके बाद सैकड़ों किसान जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टर कार्यालय पहुँचे जहाँ सैकड़ो किसानों ने कलेक्टर बैतूल के नाम ज्ञापन सौपा और किसानों ने बताया कि इस तरह से उन्हें गुमराह करके शासन ने योजना के लाभ से वंचित रखा है जिसके सुधार के लिए शासन को 7 दिन का समय दिया और इसके बाद भी समस्या का समाधान न हाने पर उग्रआन्दोलन करने और आमरण अनशन करने की बात भी किसानों द्वारा की गई है अब देखना यह होगा की इस मामले में जिला कलेक्टर संज्ञान लेकर कोई कार्यवाही करते है या किसानों को इसी तरह गुमराह करके पटवारी और बाबू योजनाओं से वंचित करने का काम करते रहेंगे ।
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