ग्वालियर में व्यापमं घोटाले के गवाह आशीष चतुर्वेदी के साथ पुलिस की चाल- नोटिस चिपकाया, फोटो खींचा और फाड़ दिया।
MP News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में व्यापमं घोटाले के प्रमुख गवाह और आरटीआई कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी के साथ एक चौंकाने वाली घटना सामने आई...
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में व्यापमं घोटाले के प्रमुख गवाह और आरटीआई कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी के साथ एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। ग्वालियर पुलिस ने आशीष को एक मामले में कोर्ट में गवाही के लिए नोटिस देने का नाटक किया। पुलिस ने उनके घर की दीवार पर नोटिस चिपकाया, उसकी तस्वीर खींची, और फिर तुरंत उसे फाड़ दिया ताकि आशीष को इसकी जानकारी न मिले और वे कोर्ट में गवाही न दे सकें। इस घटना का वीडियो, जो आशीष ने स्वयं उपलब्ध कराया, सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
17 जुलाई 2025 को ग्वालियर के झांसी रोड पुलिस स्टेशन की एक टीम आशीष चतुर्वेदी के घर पहुंची। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने आशीष के घर की दीवार पर एक नोटिस चिपकाया, जिसका उद्देश्य उन्हें कोर्ट में गवाही के लिए बुलाना था। नोटिस चिपकाने के बाद, पुलिस ने उसकी तस्वीर खींची, जो संभवतः उनके रिकॉर्ड के लिए थी। लेकिन इसके तुरंत बाद, पुलिस ने नोटिस को फाड़ दिया और वहां से चली गई। इस पूरी घटना को आशीष के घर के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया गया, जिसे उन्होंने बाद में सार्वजनिक किया।
आशीष ने इस घटना को “न्याय प्रक्रिया को कमजोर करने की साजिश” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने जानबूझकर नोटिस फाड़ा ताकि उन्हें कोर्ट में गवाही देने की सूचना न मिले। यह नोटिस व्यापमं घोटाले से जुड़े एक मामले में उनकी गवाही से संबंधित था, जिसमें वे एक प्रमुख गवाह हैं। वीडियो में साफ दिखता है कि पुलिसकर्मी नोटिस चिपकाने के बाद उसे तुरंत हटाते हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह गवाही को रोकने की सुनियोजित कोशिश थी।
- आशीष चतुर्वेदी और व्यापमं घोटाला
आशीष चतुर्वेदी मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित व्यापमं घोटाले को उजागर करने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में से एक हैं। यह घोटाला, जो 2013 में सामने आया, मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं से संबंधित है। इसमें नेताओं, अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर फर्जी उम्मीदवारों, पेपर लीक, और रिश्वतखोरी के जरिए गैर-कानूनी तरीके से लोगों को मेडिकल कॉलेजों और सरकारी नौकरियों में भर्ती करवाया। आशीष ने 2011 में एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए इस घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसमें उन्होंने एक डॉक्टर को उजागर किया जो दिल्ली में अपनी प्रवेश परीक्षा के दौरान भोपाल में फिल्म देख रहा था।
आशीष की शिकायतों के आधार पर सीबीआई ने कई मामलों में जांच शुरू की, और लगभग 4,000 लोग गिरफ्तार हुए। लेकिन इस साहस का उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। 2012 से 2015 तक उनके जीवन पर 17 बार हमले हुए, जिसमें एक अपहरण की कोशिश भी शामिल थी। व्यापमं घोटाले से जुड़े 70 से अधिक लोगों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो चुकी है, जिससे आशीष की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं। 2014 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया, लेकिन आशीष का आरोप है कि पुलिस उनकी सुरक्षा के बजाय उनकी निगरानी और परेशान करने में लगी है।
- पुलिस की निगरानी और गोपनीयता का उल्लंघन
आशीष ने पहले भी पुलिस पर उनकी निजता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। 2017 में उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि उनकी 24x7 वीडियो निगरानी उनकी गोपनीयता का उल्लंघन है। उन्होंने आरटीआई के जरिए पूछा था कि उनकी निगरानी के आदेश किसने दिए, लेकिन पुलिस ने विरोधाभासी जवाब दिए। पहले कहा गया कि कोई आदेश नहीं थे, फिर बताया गया कि यह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुआ। 2019 में ग्वालियर के पुलिस इंस्पेक्टर पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगा था, क्योंकि उन्होंने आशीष को गलत जानकारी दी थी।
आशीष का कहना है कि उनकी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए कर्मचारी उनकी जासूसी करते हैं। 2017 में उन्होंने बताया कि उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) उनकी फोन बातचीत तक रिकॉर्ड करते थे, जिसके कारण उनके परिवार और दोस्त उनसे खुलकर बात करने से डरते थे। एक बार तो एक दुकानदार ने उन्हें बिस्कुट बेचने से मना कर दिया, यह डरते हुए कि कहीं उसे जहर देने का आरोप न लग जाए।
- पुलिस और आशीष के बीच तनाव
आशीष और ग्वालियर पुलिस के बीच तनाव का इतिहास रहा है। 2025 में पहले भी कई घटनाएं सामने आईं, जिनमें आशीष ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। जनवरी 2025 में, पुलिस ने उनके खिलाफ गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप में एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसे आशीष ने “झूठा और बदले की कार्रवाई” बताया। मार्च 2025 में, जब पुलिस उन्हें एक गिरफ्तारी वारंट के लिए लेने पहुंची, तो आशीष और एक सब-इंस्पेक्टर के बीच झड़प हो गई, जिसमें दोनों को चोटें आईं। आशीष ने दावा किया कि पुलिस ने उनके घर में जबरदस्ती घुसकर उनके परिवार के साथ बदसलूकी की और उन्हें पीटा।
मई 2025 में, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आशीष और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी किया। आशीष ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती एक अज्ञात पदार्थ का इंजेक्शन दिया और उन्हें अपराधी की तरह पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
17 जुलाई 2025 की घटना का वीडियो X पर वायरल होने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्यशैली की कड़ी आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, “यह न्याय प्रक्रिया को कमजोर करने की साजिश है। क्या यही सुशासन है?” एक अन्य ने कहा, “पुलिस से भरोसा उठ गया। नोटिस चिपकाकर फाड़ देना साफ दिखाता है कि गवाहों को डराने की कोशिश हो रही है।” कई यूजर्स ने आशीष के साहस की तारीफ की और मांग की कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो।
व्यापमं घोटाला मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा भर्ती और प्रवेश घोटाला है, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया। आशीष ने अपनी मां के कैंसर इलाज के दौरान अक्षम डॉक्टरों को देखकर इस घोटाले की जांच शुरू की थी। उनकी शिकायतों ने 5,000 से अधिक डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच की मांग की, जिसके परिणामस्वरूप कई गिरफ्तारियां हुईं। लेकिन इस प्रक्रिया में आशीष को लगातार धमकियां और हमले झेलने पड़े।
आशीष चतुर्वेदी की 17 जुलाई 2025 की घटना ने एक बार फिर ग्वालियर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। नोटिस चिपकाकर फाड़ने की घटना, जो सीसीटीवी में कैद हो गई, न केवल पुलिस की मंशा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि व्यापमं घोटाले के गवाहों को अभी भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। आशीष का साहस और उनकी न्याय की लड़ाई प्रेरणादायक है, लेकिन यह चिंता का विषय है कि एक कार्यकर्ता को अपनी सुरक्षा और निजता के लिए बार-बार कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि न्याय प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
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