हरदोई: कंस के अत्याचार से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी तब भगवान कृष्ण हुए अवतरित -डॉ. सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री
कंस के अत्याचार से पृथ्वी जब त्राहि त्राहि करने लगी तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया, ले..
By INA News Hardoi.
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का मां कृष्ण प्रिया भवन में कार्यक्रम चल रहा है। जिसमें छठवें दिन कंस वध, रूकमणि विवाह की कथा सुनाई गई और झांकियो का चित्रण किया गया। जिसे कथावाचक डॉ. सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री ने सुनाया। जिसको सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन डॉ. सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री महाराज ने कंस वध व रुकमणी विवाह के प्रसंगों का चित्रण किया। कथावाचक ने बताया कि भगवान विष्णु के पृथ्वी लोक में अवतरित होने के प्रमुख कारण थे, जिसमें एक कारण कंस वध भी था।
कंस के अत्याचार से पृथ्वी जब त्राहि त्राहि करने लगी तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा। 11 वर्ष की अल्प आयु में कंस ने अपने प्रमुख अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने कृष्ण, बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए और अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी को जहां कारागार से मुक्त कराया, वही कंस के द्वारा अपने पिता उग्रसेन महाराज को भी बंदी बनाकर कारागार में रखा था, उन्हें भी श्रीकृष्ण ने मुक्त कराकर मथुरा के सिंहासन पर बैठाया।
Also Read: हरदोई: बड़ी कार्रवाई- 2 निरीक्षकों सहित 3 उपनिरीक्षक लाइन हाजिर, 17 को नई तैनाती मिली
श्री शास्त्री ने बताया कि रुकमणी जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थी, जो विष्णु रूपी श्रीकृष्ण से विवाह करने को इच्छुक थी। लेकिन रुकमणी जी के पिता व भाई इससे सहमत नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने रुकमणी के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी विवाह के लिए आमंत्रित किया था, जैसे ही यह खबर रुकमणी को पता चली तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई और काफी संघर्ष हुआ युद्ध के बाद अंततः श्री कृष्ण रुकमणी से विवाह करने में सफल रहे।
यह प्रवचन कथावाचक डॉ. सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री ने दिए। जिसमें आए सैकड़ो भक्तो ने बड़े धूमधाम से कथा का रसपान किया है। श्रीमद् भागवत कथा में आनंद मिश्रा, अशोक मिश्रा, मनोज यादव, श्याम बिहारी मिश्रा, सत्येंद्र त्रिपाठी, कृष्णा मिश्रा, रजनीश पांडेय, जगदीश पांडेय, गौरव सिंह आदि भक्तगण मौजूद रहे।
What's Your Reaction?











