करौली में गर्भवती महिला को कढ़ाई में बैठाकर नदी पार कराई, वायरल वीडियो ने दिखाई मानवता की मिसाल।
Rajasthan Viral News: राजस्थान के करौली जिले में एक अनोखी और प्रेरणादायक घटना सामने आई, जब भारी बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण टूटी पुलिया के बीच एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के
राजस्थान के करौली जिले में एक अनोखी और प्रेरणादायक घटना सामने आई, जब भारी बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण टूटी पुलिया के बीच एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्थानीय लोगों ने लोहे की कढ़ाई का सहारा लिया। कांकरखेड़ा क्षेत्र के अडूदा भागीरथपुरा गांव के पास कालीसिल नदी में तेज बहाव के कारण पुलिया टूट गई थी, जिससे सड़क संपर्क पूरी तरह से कट गया था। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों और ग्रामीणों ने मिलकर उसे एक बड़ी लोहे की कढ़ाई में बैठाकर नदी पार कराई और सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, और लोगों ने इस मानवीय प्रयास की जमकर तारीफ की।
करौली जिला, जो अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए जाना जाता है, इन दिनों भारी बारिश के कारण मुश्किलों का सामना कर रहा है। कालीसिल नदी, जो जिले के कई गांवों से होकर गुजरती है, मूसलाधार बारिश के कारण उफान पर थी। अडूदा भागीरथपुरा गांव में रहने वाली गर्भवती महिला, जिसका नाम राधा बाई बताया जा रहा है, को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। नजदीकी अस्पताल, जो नदी के दूसरी ओर था, पहुंचना असंभव लग रहा था, क्योंकि तेज बहाव ने पुलिया को तोड़ दिया था। सड़कें जलमग्न थीं, और एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में परिजनों और गांव के लोगों ने मिलकर एक अनोखा उपाय निकाला। उन्होंने एक बड़ी लोहे की कढ़ाई में राधा बाई को बैठाया और सात-आठ युवकों ने मिलकर कढ़ाई को पकड़कर नदी पार की।
वीडियो में साफ दिखता है कि नदी का पानी लोगों के गले तक पहुंच रहा था। तेज बहाव के बीच ग्रामीण सावधानी से कढ़ाई को पकड़े हुए थे, जिसमें राधा बाई के साथ एक अन्य महिला भी बैठी थी, जो उनकी देखभाल कर रही थी। किनारे पर खड़े लोग उनकी सलामती की दुआ मांग रहे थे। कई लोग तैरते हुए और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कढ़ाई को स्थिर रखने की कोशिश कर रहे थे। इस जोखिम भरे प्रयास के बावजूद, ग्रामीणों की हिम्मत और एकजुटता ने राधा बाई को सुरक्षित नदी के उस पार पहुंचाया, जहां से उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में उनकी हालत स्थिर बताई गई, और समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। एक एक्स यूजर ने लिखा, “करौली के लोगों ने मानवता की सच्ची मिसाल पेश की। ऐसी एकजुटता और हिम्मत हर जगह देखने को नहीं मिलती।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह वीडियो देखकर गर्व होता है, लेकिन यह भी सोचने वाली बात है कि आज भी हमारे गांवों में बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं हैं?” कई लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाए कि आखिर क्यों बारिश के मौसम में ऐसी स्थिति बनती है, जहां लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
करौली में भारी बारिश ने कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से काट दिया है। कालीसिल नदी के अलावा, जिले में पांचना बांध का जलस्तर भी 258.30 मीटर तक पहुंच गया था, जिसके कारण बांध के चार गेट खोलकर 26,233 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जल संसाधन विभाग ने नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी थी। करौली के लांगरा क्षेत्र में भी एक 22 वर्षीय युवक, वीरसिंह जाटव, पुलिया पार करते समय तेज बहाव में बह गया था, जिसकी तलाश में प्रशासन और ग्रामीण जुटे थे। इन घटनाओं ने जिले में बुनियादी ढांचे की कमी को सामने ला दिया है।
स्थानीय निवासी रामलाल मीणा ने बताया कि अडूदा भागीरथपुरा गांव में हर साल बारिश के मौसम में ऐसी स्थिति बनती है। उन्होंने कहा, “पुलिया की हालत पहले से ही खराब थी। बारिश ने इसे पूरी तरह तोड़ दिया। प्रशासन को पहले से ही इसका इंतजाम करना चाहिए था।” एक अन्य ग्रामीण, श्यामसुंदर, ने बताया कि गांव में न तो कोई वैकल्पिक मार्ग है और न ही बारिश के समय नाव की व्यवस्था। ऐसे में लोग मजबूरी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कालीसिल नदी पर एक मजबूत पुल बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
यह घटना देश के उन कई क्षेत्रों की स्थिति को दर्शाती है, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लोग मुश्किलों का सामना करते हैं। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में भी हाल ही में एक गर्भवती महिला, प्रिया रानी कोल, महाना नदी में उफान के कारण अस्पताल नहीं पहुंच सकी और उनकी मृत्यु हो गई। इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, जो प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती हैं। करौली की इस घटना में ग्रामीणों की त्वरित कार्रवाई ने एक जान बचा ली, लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर समय पर पुलिया की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था होती, तो क्या लोगों को इतना जोखिम उठाने की जरूरत पड़ती?
करौली जिला, जो चंबल नदी और ब्रज क्षेत्र के लिए जाना जाता है, अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए भी मशहूर है। यहां के कैला देवी मंदिर और सिटी पैलेस हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में जिले के कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं। सड़कें, पुल, और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी होती है। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू किए हैं और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर लोगों ने ग्रामीणों की हिम्मत की तारीफ की, लेकिन साथ ही प्रशासन की लापरवाही पर भी नाराजगी जताई। एक यूजर ने लिखा, “यह वीडियो दिखाता है कि हमारे लोग कितने हिम्मतवाले हैं, लेकिन सरकार को ऐसी स्थिति में सुधार करना चाहिए।” एक अन्य यूजर ने कहा, “कढ़ाई में बैठाकर नदी पार कराना कोई सामान्य बात नहीं है। यह ग्रामीणों की एकजुटता और मानवता का प्रतीक है।” कुछ लोगों ने इसे मजबूरी का नतीजा बताया और कहा कि अगर समय पर सड़क और पुल बनाए गए होते, तो ऐसी स्थिति नहीं आती।
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