कांगड़ा में भारी बारिश से चक्की नदी पर बना पुराना पुल आंशिक रूप से ढहा, पठानकोट-हिमाचल संपर्क प्रभावित।

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में 24 और 25 अगस्त 2025 को लगातार हुई भारी बारिश ने व्यापक तबाही मचाई। कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र में चक्की नदी पर बना पुराना पुल, जो पठानकोट

Aug 27, 2025 - 19:07
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कांगड़ा में भारी बारिश से चक्की नदी पर बना पुराना पुल आंशिक रूप से ढहा, पठानकोट-हिमाचल संपर्क प्रभावित।
कांगड़ा में भारी बारिश से चक्की नदी पर बना पुराना पुल आंशिक रूप से ढहा, पठानकोट-हिमाचल संपर्क प्रभावित।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में 24 और 25 अगस्त 2025 को लगातार हुई भारी बारिश ने व्यापक तबाही मचाई। कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र में चक्की नदी पर बना पुराना पुल, जो पठानकोट (पंजाब) को हिमाचल प्रदेश से जोड़ता है, नदी के तेज बहाव और सैलाब के कारण आंशिक रूप से ढह गया। इस पुल का एक बड़ा हिस्सा बह गया, जिसके कारण प्रशासन ने पहले से बंद वाहनों की आवाजाही के साथ-साथ अब पैदल आवाजाही पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है। इस घटना ने पठानकोट-जालंधर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) को भी प्रभावित किया है, जिससे यातायात व्यवस्था ठप हो गई है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, चंबा और लाहौल-स्पीति जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, और भारी बारिश का दौर 27 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है।

कांगड़ा जिला, जो हिमालय की दक्षिणी ढलानों पर बसा है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धौलाधर पर्वत शृंखलाओं के लिए जाना जाता है। लेकिन भारी बारिश और भूस्खलन ने इस क्षेत्र को बार-बार प्रभावित किया है। चक्की नदी, जो ब्यास नदी की एक सहायक नदी है, भारी बारिश के कारण उफान पर आ गई। नूरपुर के पास स्थित पुराना चक्की पुल, जो पहले से ही खराब हालत में था, नदी के तेज बहाव को सहन नहीं कर सका। 24 अगस्त की रात को नदी में आए सैलाब ने पुल के एक हिस्से को पूरी तरह बहा दिया। स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अनुसार, समय रहते खतरे को भांप लिया गया था, जिसके कारण वाहनों की आवाजाही पहले ही रोक दी गई थी। इस वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

पठानकोट के एसएचओ मंदीप सलगोत्रा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों की बारिश ने चक्की नदी के जलस्तर को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया था। उन्होंने कहा, “पुल का एक हिस्सा ढहने के बाद भारी वाहनों को पहले ही रोक दिया गया था। अब सुरक्षा के लिए पैदल आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।” प्रशासन ने नए चक्की पुल पर भी खतरे को देखते हुए यातायात बंद कर दिया है, जिससे पठानकोट-जालंधर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। स्थानीय लोगों और यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है, लेकिन भूस्खलन और सड़क कटाव ने इन मार्गों को भी प्रभावित किया है।

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें चक्की नदी का तेज बहाव और ढहता हुआ पुल साफ दिखाई दे रहा है। एक एक्स यूजर ने लिखा, “कांगड़ा में चक्की नदी ने पुराने पुल को बहा दिया। यह देखकर डर लगता है कि प्रकृति कितनी ताकतवर है। प्रशासन को जल्दी वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “हर साल बारिश में हिमाचल में ऐसी घटनाएं होती हैं। सरकार को स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए।” इन टिप्पणियों से लोगों में डर और प्रशासन के प्रति नाराजगी दोनों झलक रही है।

कांगड़ा जिले में बारिश ने कई अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है। इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में कई गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। वार्ड-2 और वार्ड-3 में लोगों के घरों में पानी घुस गया, जिससे फर्नीचर और सामान को नुकसान पहुंचा। इंदौरा में कई वाहन भी बाढ़ के पानी में बह गए। शाहपुर विधानसभा की सुधेड़ पंचायत के धार चचोट गांव में भूस्खलन के कारण एक पशुशाला ढह गई, जिसमें 15 भेड़-बकरियां मर गईं। धर्मशाला-चड़ी मार्ग पर एचआरटीसी की कार्यशाला के पास एक बहुमंजिला इमारत भी ढह गई। गगल हवाई अड्डे पर तीन में से केवल एक विमान ही उतर सका, क्योंकि खराब मौसम ने उड़ानों को प्रभावित किया।

मौसम विभाग ने 26 अगस्त को कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू और लाहौल-स्पीति के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। विभाग के अनुसार, 1 जून से 25 अगस्त तक हिमाचल में सामान्य से 22 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, और अगस्त में यह आंकड़ा 44 प्रतिशत अधिक है। भारी बारिश के कारण राज्य में 795 सड़कें बंद हैं, जिनमें कांगड़ा में 23, मंडी में 289 और चंबा में 214 सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा, 956 बिजली ट्रांसफार्मर और 517 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। चक्की नदी के अलावा, ब्यास नदी और उसकी सहायक नदियां जैसे बिनवा, न्यूगल और गज भी उफान पर हैं, जिसने कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। सेना और एनडीआरएफ की टीमें वैकल्पिक मार्ग बनाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हैं। कांगड़ा के डीसी हेमराज बैरवा ने बताया कि जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां लोगों को भोजन और आश्रय प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। नदी किनारे बसे गांवों को खाली कराया गया है, और सड़कों को जल्द बहाल करने के लिए टीमें काम कर रही हैं।” स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि चक्की नदी पर एक मजबूत और आधुनिक पुल बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश से जुड़ी घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 20 जून से 25 अगस्त तक 156 लोगों की मौत हो चुकी है, और 38 लोग लापता हैं। राज्य को 2,394 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और चंबा जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। चक्की नदी पर पुराने पुल का ढहना इस आपदा का एक हिस्सा है, जो बारिश और बाढ़ की तीव्रता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी किनारे अनियोजित निर्माण और पुराने ढांचों की मरम्मत में देरी ने इस नुकसान को बढ़ाया है।

स्थानीय निवासी रामेश्वर सिंह ने बताया कि चक्की पुल कई वर्षों से कमजोर था। उन्होंने कहा, “हर साल बारिश में यह डर रहता है कि पुल बह जाएगा। प्रशासन को पहले ही इसकी मरम्मत करनी चाहिए थी।” एक अन्य निवासी, अनीता देवी, ने कहा कि बाढ़ ने उनके खेतों को बर्बाद कर दिया, और अब उनके पास आय का कोई साधन नहीं बचा। लोगों ने सरकार से मुआवजे और पुनर्वास की मांग की है।

सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को 2023 की बाढ़ से जोड़कर देख रहे हैं, जब भी हिमाचल में भारी बारिश ने कई पुल और सड़कें बहा दी थीं। एक यूजर ने लिखा, “कांगड़ा में चक्की पुल का ढहना दुखद है। सरकार को अब स्थायी समाधान ढूंढना होगा, वरना हर साल यही होगा।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता तो आकर्षक है, लेकिन बारिश में यह जानलेवा हो जाती है।” ये टिप्पणियां लोगों की चिंता और प्रशासन से बेहतर तैयारी की उम्मीद को दर्शाती हैं।

यह घटना हिमाचल प्रदेश के सामने जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की चुनौती को सामने लाती है। चक्की नदी पर बना पुराना पुल कई वर्षों से पठानकोट और हिमाचल को जोड़ने का महत्वपूर्ण साधन था, लेकिन इसकी कमजोर स्थिति और बारिश की तीव्रता ने इसे नष्ट कर दिया। प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन भारी बारिश और भूस्खलन ने इन प्रयासों में बाधा डाली है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी और नालों से दूर रहें और बिना जरूरत यात्रा न करें।

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